हरिद्वार।
नरेश गुप्ता
3 माह के इस मुस्लिम परिवार के शिशु को मुस्लिम बच्चा चोर गैंग ने ही चुरा कर बेच दिया था हिन्दू को।4 लाख 90 हजार में बेचा गया था बच्चा मेरठ के विशाल गुप्ता को।
हरिद्वार जनपद के कलियर में अमरोहा उत्तर प्रदेश से 11 अक्टूबर को जहीर अंसारी अपनी पत्नी व तीन माह के बेटे के साथ जियारत के लिए कलियर आए थे, पति पत्नी और बच्चा रात्रि में एक दुकान के पास रुक गए और देर रात में दो महिलाएं उनके पास आई और कुछ लोगों द्वारा छेड़छाड़ की शिकायत करते हुए वहीं रुक गई इस दौरान दोनों अनजान महिलाओं ने इस परिवार से जान पहचान बढ़ा ली और घुलना मिलना शुरू कर दिया, कुछ समय बाद अपरिचित महिलाएं सो रही जहीर अंसारी की पत्नी के बराबर में ही शो रहे बच्चे को चुरा कर रफू चक्कर हो गई।

सूचना मिलते ही पुलिस हुई सक्रिय, एस एस पी ने बच्चा बरामदगी के लिए बनाई थी टीम, दिये थे बच्चे की तुरन्त बरामदगी के निर्देश।
एसएसपी को मिली सूचना के आधार पर एसएसपी ने तुरंत थाना अध्यक्ष कलियर से पूरे प्रकरण की जानकारी लेने के बाद एसएसपी प्रमेन्द्र डबराल ने तुरंत मुकदमा दर्ज करने के आदेश देते हुए ,कलियर में आसपास के थानों की एक संयुक्त टीम को बच्चे की जल्द तलाश करने के निर्देश दिए, तथा टेक्निकल सपोर्ट के लिये सी आई यू प्रभारी रूड़की को भी आवश्यक निर्देश देते हुए बच्चे को जल्द से जल्द बरामद करने की हिदायत दी,पुलिस की पड़ताल में बच्चा चोरी करने का एक बड़ा गैंग पुलिस के हाथ लग गया, मैन्युअल एवं डिजिटल सबूतों का पीछा करते हुए पुलिस टीम मेरठ पहुंची तो उनके हाथ इस पूरी वारदात की एक अहम कड़ी लगी जिसका नाम था आस मोहम्मद लंगड़ा ,पूछताछ के आधार पर पुलिस आस मोहम्मद की पत्नी शहनाज और फिर सलमा तक पहुंची और उनसे पूरे मामले की विस्तृत पूछताछ की पूछताछ में बच्चा चोरी के बाद उसके बेचने की पूरी चैन ही पुलिस टीम के हाथ लग गई।
बच्चा चोर गैंग के 5 सदस्य व एक बच्चे का खरीदार पुलिस के हाथ चढ़ गया।
पुलिस ने आंचल, नेहा शर्मा और बच्चे के खरीदार विशाल गुप्ता को दबोच लिया और बच्चा भी बरामद कर लिया,
पुलिस की पकड़ में आए विशाल गुप्ता के अनुसार उसकी शादी को 10 साल हो गए थे, और उसके कोई संतान नहीं थी जिस कारण वह अपना और अपनी पत्नी का मेरठ के एक अस्पताल में इलाज करा रहा था जहां नेहा शर्मा पेशेंट कोऑर्डिनेटर का काम करती थी इलाज के दौरान विशाल गुप्ता ने नेहा शर्मा को बताया यदि कोई गरीब अपने बच्चों का पालन पोषण नही कर पा रहा हो तो वह बच्चे को लेने व पालन करने को तैयार है ।

नेहा शर्मा ने बच्चा चोरी करने वाले गैंग के सरगना आस मुहम्मद लँगड़े से सम्पर्क कर एक बच्चे की डिमांड की।
आस मुहम्मद लँगड़े ने अपनी पत्नी शहनाज व एक अन्य महिला सलमा को साथ लेकर रूड़की के कलियर से बच्चा चोरी का प्लान बनाया । कलियर में अमरोहा उत्तर प्रदेश से ज्यारत के लिए आये जहीर अंसारी के बच्चे को चोरी कर लिया गया ।
जहीर अंसारी के बच्चे को 3 जगह बेचा गया,अंतिम और असली खरीदार तक बच्चा 4 लाख 90 हजार में बिका।
बच्चे बेचने में प्रॉफिट भी ठीक ठाक होता है। बच्चा चोरी करने में सफल होने पर शहनाज, सलमा , आस मोहम्मद लंगड़ा बुक की गई स्विफ्ट डिज़ायर गाड़ी के जरिए बच्चे सहित कलियर से फरार हो गए, इन्होंने बच्चा 3 लाख रु में आंचल को और आंचल ने नेहा शर्मा को बच्चा 4 लाख में बेच दिया। नेहा शर्मा ने भी 4 लक 90 हजार में बच्चे को विशाल गुप्ता को बेच दिया ।

पुलिस ने बच्चे सहित बच्चा चोर गैंग को भी दबोचा,अपना बच्चा मिलने पर ,जहीर अंसारी के परिवार की खुशी का ठिकाना नही है,
पुलिस ने इस बच्चे को बरामद तो कर लिया है। और बच्चा चोरों के एक गैंग को भी पुलिस ने पकड़ लिया है, लेकिन अब बात यह आती है की चोरी करने वाले गैंग की न तो कोई जाती होती है और न ही धर्म होता हैं, उनके लिए जाति धर्म का कोई मायने नहीं होता उनका जाती धर्म तो केवल और केवल पैसा होता है।
बच्चा चुराने वालो में मुस्लिम व हिन्दू दोनो ही साझीदार है।बच्चा खरीदने वाला भी हिंदू।
मुस्लिम परिवार का बच्चा चुराने वालों में मुस्लिम महिलाएं और पुरुष के अलावा हिंदू महिलाएं तो शामिल थी ही , बच्चे को खरीदने वाला विशाल गुप्ता भी हिंदू था इसलिए यह बच्चा अगर पुलिस बरामद नहीं कर पाती और पुलिस को पता नहीं चल पाता तो शायद यह बच्चा मुसलमान से हिंदू बन गया होता, छोटे बच्चे का ना कोई धर्म होता है न जाति होती है।
जहां उसका लालन पालन हो जाए वह उसी जाति धर्म के नाम से जाना जाता है, शायद अगर पुलिस ना पकड़ पाती तो यह बच्चा भी विशाल गुप्ता के परिवार में बड़ा हो जाता, और बड़ा होकर इसका नाम भी वैश्य परिवार के ही विशाल गुप्ता कुछ भी नाम रख देते ,ना तो इसकी खतना होती ना किसी को पता चला कि यह बच्चा मुसलमान है। विशाल गुप्ता ने जिनसे बच्चा खरीदा था उन्हें इस बात से कोई मतलब नही था कि बच्चा मुसलमान है कि हिंदू है। उनको तो बच्चा बेच कर पैसा कमाना था ।
हरिद्वार द्वार पुलिस को बड़ी सफलता, एस एस पी के नेतृत्व की भी सराहना।
हरिद्वार पुलिस ने इस प्रकरण में तो कमाल का कार्य किया ही है और पुलिस यदि और थोड़ा सतर्क हो जाए तो कलियर में जो अपराध पनप रहे हैं , जो लोग गरीब गुरबा होते हैं और जियारत करने के लिए आते हैं उनके पास होटल में रुकने के लिए स्थान नहीं होता है, और ऐसे ही वह कहीं सड़क पर और कहीं किसी दुकान के आसपास लेट जाते हैं उनके साथ जो कारनामे कलियर के ही कुछ जरायम पेशेवर लोग करते हैं वह कारनामे अगर आम जनमानस के सामने आ जाएं, तो लोग दांतों तले अंगुली दबा लेंगे ।एक तरफ लोग यहाँ पूरी दुनिया से जियारत करने आते हैं ।दुआएं मांगने आते हैं और एक तरफ लोग इस तरीके के कारनामे को भी अंजाम देते हैं ।

एस एस पी ,हरिद्वार
यहाँ कुछ होटलों में वेश्यावृत्ति, होने के साथ ही महिलाओं, लड़कियों के साथ बलात्कार व चोरी की वारदातें सुनने को मिलती रहती है।
कई बार शिकायती आई है कि महिलाओं को और लड़कियों के साथ बलात्कार होने के साथ ही सामान भी चोरी हो जाता है लेकिन इस तरीके के मुस्लिमों के विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल पर होने वाले कर्म को देखकर मुस्लिम समुदाय को कुछ तो अकल आनी चाहिए कि हमारे इस तीर्थ स्थल पर इस तरीके के कार्य जो लोग कर रहे हैं उन पर निगाह रखें ।
लेकिन यहां तो दरगाह के लिए जिन लोगों को प्रबंधक के कार्य पर लगाया है वही दरगाह पर आने वाली धनराशि को लूटने में लगे रहते हैं। और इस दरगाह की प्रबंधन समितियां में अक्सर झगड़े होते हुए देखे जाते हैं । हरिद्वार पुलिस को इस बच्चों को बरामद करने के लिए वास्तव में बधाई देनी चाहिए, क्योंकि पुलिस ने मुस्लिम बच्चों को हिंदू होने से जहां बचाया है। वही एक गरीब परिवार जिसका बच्चा था उसका बच्चा वापस कर उसकी मां को और उसके परिवार को जो सुकून दिया है उसको शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है।

