हरिद्वार ,धीरेंद्र शास्त्री रूपी बहरूपिये ने राम जी को भी नही बक्शा और कृष्ण जी को तो आड़ा तिरछा बताता ही है , भगवान राम जी के पांच पिता बताता है ,और इस बात को भी मानता है इसमें मती नहीं कुमति है , इस बेहया का यह भी कहना है की ये बात की राम जी के पाँच पिता थे कहीं लिखी नहीं मिलेगी, यह तो इस बहरूपिये को ही पता है ,

भारत वर्ष में तमाम ऐसे साधु संत या कथा वाचक भरे पड़े हैं जिनको सनातन धर्म का कोई ज्ञान नहीं है ,केवल लटके झटके और ग्रह चाल के हिसाब से यह लोग इस देश के अंदर पूजनीय बन जाते हैं, और जिसकी दुकान पर भीड़ ज्यादा होती है उसको बीजेपी तुरंत गले लगा लेती है, चाहे वह किसी भी तरीके का किसी भी चाल चरित्र का व्यक्ति क्यों ना हो,यही हाल इन धीरेंद्र शास्त्री जी का है मान्यवर ने जिस तरीके से कृष्ण जी के बारे में अनाप-शनाप बातें की हैं ठीक उसी तरह इन्होंने भगवान राम के भी पांच पिता बताए हैं, इनको अपनी जुबान पर लगाम नहीं है,

लेकिन फिर भी सनातन धर्म के ठेकेदार आंखें मूंदे इनके प्रवचन सुनते रहते हैं, अब देखना यह है की सनातन धर्म के ठेकेदार इस बहरूपिये से किनारा करते हैं या इसकी चरण वंदना करते रहते हैं, लेकिन अभी तक तो यही लग रहा है कि इस बहरूपिये से किनारा नहीं किया जाएगा, बल्कि इसकी चरण वंदना ही चलती रहेगी, लेकिन ऐसा ना हो की जनता इसका ऐसा हिसाब कर दे की इसको लुंगी उठाकर भागना पड़े।

