हरिद्वार। तीर्थ नगरी हरिद्वार में हर वर्ष उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग द्वारा संचालित गंग नहर को गंग नहर की सफाई व मरम्मत के नाम पर बंद किया जाता है ।यह गंगा बंदी 20 दिन के लिए दशहरा से दिवाली तक चलती है हरिद्वार से कानपुर तक जाने वाली यह गंग नहर कानपुर तक बंद रहेगी अब यह गंग नहर दीपावली पर खोली जाएगी।

हरिद्वार आने वाले श्रद्धालु होंगे मायूस। उत्तर प्रदेश सिचाई विभाग की मौज।
इस बीच हरिद्वार आने वाले तीर्थ यात्रियों को गंगा के दर्शन न होने से काफी मायूसी का सामना करना पड़ेगा, इस गंगा बंदी के दौरान सिंचाई विभाग की मौज आ जाती है सिंचाई विभाग की ही खुलकर दिवाली मनती है। गंग नहर बंदी के दौरान सफाई और मरम्मत के नाम पर उत्तर प्रदेश सरकार से करोड़ों रुपए का बजट प्राप्त होता है। लेकिन यह बजट केवल और केवल वाउचरो के माध्यम से बिल बनाकर नोट अधिकारियों की तिजोरियों की शोभा बढ़ाते है। और मां लक्ष्मी की पूरी कृपा जे ई से लेकर अधिशासी अभियंता तक के ऊपर पूरी तरीके से बरसती है ।

गंगा बन्दी का रहता है, इंतजार गंगा भरती है सबका पेट।
हरिद्वार के लोग भी इस गंगाबंदी का प्रतिवर्ष इंतजार करते हैं। हरिद्वार में भी गंगा बंदी के दौरान काफी लोगों को जो बेरोजगार हैं या भिखारी हैं गंगा बीनने वाले हैं इन सब की भी मौज आ जाती है क्योंकि गंगा बंदी के दौरान यह लोग गंगा को खोद खोद कर उसके अंदर से बहुमूल्य वस्तुएं प्राप्त करने में लगे रहते हैं काफी लोगों को सोना चांदी पैसे मिलते हैं और इनका खर्चा भी मां गंगा पूरा कर ही देती है । गंगा है जो तीर्थ नगरी हरिद्वार के लोगों को रोजी-रोटी देने का कार्य करती है लेकिन मां गंगा हरिद्वार ही नहीं हरिद्वार के बाहर से भी आने वाले व्यापारियों का पेट भर रही है ।लेकिन जिन लोगों का मां गंगा पेट भर रही है ।उन्हें या हमें स्वयं सोचा होगा की गंगा के लिए हम क्या कर रहे है।

तीर्थ पुरोहित की संस्था गंगा सभा भी दान की राशि बटोरने तक सीमित।कलयुग में साक्षात देवी है माँ गंगा।
तीर्थ पुरोहितों की सर्वोच्च संस्था गंगा सभा जिसे गंगा सभा । जिसे दान में प्रतिवर्ष प्राप्त होती है ,मोटी धनराशि उसके पदाधिकारीयो को भी गंगा की स्वच्छता से या गंगा किनारे की स्वच्छता से कोई लेना-देना नहीं है। केवल गंगा सभा अपने परिसर में ही सफाई व्यवस्था का कार्य देखती है ।बाकी , गंगा के घाटों पर क्या हो रहा है कितनी गंदगी फैली है। कौन क्या कर रहा है। कहां शराब बिक रही है कहां टिंचरी बिक रही है कहां सुल्फा बिक रहा है कहां स्मेक बिक रही है , इन सब बातों से गंगा सभा का कोई लेना-देना नहीं है । गंगा सभा के पदाधिकारियों का यही कहना होता है ।की हमारे क्षेत्र में यह घाट नहीं आते हैं। यह काम नगर निगम का और पुलिस का है हमारा यह काम नहीं है।गंगा सभा तो अपने कर्तव्य की इतिश्री केवल एक माइक पर अनाउंसमेंट करके की गंगा को साफ रखिए गंगा में कपड़े मत धोइये गंगा में गंदगी ना करिए बस इतने मात्रा से अपने कर्तव्य का पालन कर लेती है।

प्रति माह लाखो की दान की राशि का क्या होता है कोई बताने वाला नही है ,पदाधिकारी नेताओं, उद्योग पतियों व बीयूरोक्रेट्स से सम्बन बनाने में लगे रहते है।
हर की पैड़ी गंगा सभा पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं द्वारा गंगा के नाम पर दी जाने वाली दान की राशि को एकत्र कर इन मोटी मोटी रकमो का क्या किया जाता है इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। इसके बारे में जानकारी होगी तो गंगा सभा के पदाधिकारी को होगी ,पदाधिकारीयो में भी हमेशा से 36 का आंकड़ा रहा है कोई पदाधिकारी एक दूसरे को कुछ बताने को तैयार नहीं होता है। सबकी अपनी अपनी डफली और अपना अपना राग है ।

गंगा सभा के एक पदाधिकारी की तो मौज आ रही है।अब तक के गंगा सभा के इतिहास में सबको पछाड़ दिया है।
गंगा सभा के एक पदाधिकारी की तो इस बार मानो मौज आ गई हो। कल तक गुमनामी की जिंदगी जीने वाले साहब देश के सर्वोच्च उद्योगपतियो ,सर्वोच्च कथावाचको सर्वोच्च ब्यूरोक्रेट्स सर्वोच्च नेताओं से मिलते फिर रहे हैं। वह तो गंगा सभा के पदाधिकारी क्या बने मानो उनकी तो लॉटरी खुल गई हो। जिन्हें कल तक कोई जानता भी नहीं था, वह आजकल अपना फोटो सेशन कराने में और रील बनवाने में व्यस्त रहते हैं।

और हरिद्वार में कम हरिद्वार से बाहर ज्यादा रहते हैं। लेकिन गंगा की शुद्धता स्वच्छता और सफाई से उनको भी कुछ लेना देना नहीं है।लोगों से सम्बंध बनाना कोई बुरी बात नही है।जिस गंगा के कारण आपके सम्बंध बन रहे है।उसकी ओर भी थोड़ा ध्यान दे दीजिए। क्योकी कलयुग में माँ गंगा को साक्षात देवी माना गया है।आपको माँ की सेवा का मौका मिला है।आप बहुत ही भाग्यशाली है।

