हरिद्वार। हरिद्वार में सरकारी सस्ते गल्ले के राशन का खेल बहुत मोटा है। राज्य सरकार गरीबों के लिए निशुल्क चावल वितरण के लिए राशन दुकानदारों को देती है, लेकिन यह दुकानदार गरीबों को चावला न देकर चावल का 50% भाग राशन माफियाओ को बेच देते हैं , जो नही बेचना चाहते उनसे जबरन राशन माफिया डरा धमकाकर ,ले लेते है।
चरनजीत पर जिलापूर्ति अधिकारी मेहरबान,यशपाल के निधन के बाद यशपाल की दुकान भी चरणजीत को।
अभी हाल ही में यशपाल नामक दुकानदार की मृत्यु के बाद उसकी दुकान भी चरणजीत को ही दे दी गई है, जबकि चरणजीत के पास पहले से ही दो दुकाने हैं, तीसरी दुकान भी चरणजीत को दी गई है , नियम विरुद्ध हर कार्य इस देश में होता ही रहता है। जिला पूर्ति अधिकारी श्याम आर्य ने बिना कोई जांच पड़ताल कराए या किसी तरीके से उपकृत होकर या किसी पुरानी दोस्ती में यह दुकान चरणजीत को दी है ।

यह दुकान यशपाल की मृत्यु के बाद रिक्त हुई थी, जबकि चरणजीत की दुकान से यशपाल की दुकान कम से कम एक किलोमीटर दूरी पर है, इस बीच कई अन्य राशन दुकानदार और भी है जिनको यह दुकान एलाट की जा सकती थी। लेकिन बीच में पडने वाले किसी भी दुकानदार को यह दुकान न देकर एक किलोमीटर दूर इस दुकान को चरणजीत के सुपुर्द कर दिया गया है, जबकि वह स्वयं ही अपनी दो दुकानों पर कम बैठते हैं ,ज्यादातर इधर-उधर घूमते रहते हैं।
इसी तरह गगन नामक दुकानदार को भी 3 माह पूर्व उपकृत कर उसको भी सुरेश चौहान की दुकान और दे दी गई ,इस मामले में शराब वाले की भूमिका मुख्य है,6 पेटी का खेल जो हुआ है।
एक अन्य प्रकरण में सुरेश चौहान नामक एक दुकानदार का राशन रात में 10 बजे कॉलोनी के ही कुछ लोगों ने उस समय ऑटो विक्रम में ले जाते हुए पकड़ लिया जब यह ऑटो विक्रम वाला उक्त दुकानदार के यहां से उत्तराखंड राज्य सरकार की बोरियों में लदा राशन लेकर निकला था ,उसी समय कॉलोनी के कुछ लोगों ने इस ऑटो वाले को पकड़ लिया और ऑटो वाले ने साफ-साफ रूप से बताया मैने सुरेश से यह राशन लिया है, उसके बाद उस दुकानदार की भी दुकान गगन नाम के राशन दुकानदार को एलॉट कर दी गई है ।वह दुकान भी गगन की विष्णु गार्डन वाली दुकान से काफी दूर है ।
इस बीच में भी कई दुकानें और भी पड़ती है ,लेकिन उनमें से किसी को वह दुकान भी नहीं दी गई ,और गगन को वह दुकान एलॉट की गई। यह दुकान गगन को उसके यार एक पूर्ती निरीक्षक की सिफारिश पर प्राप्त हुई है। अब गगन दो-दो दुकानों का माल ठिकाने लगा रहा है। खुद की दुकान तो उसकी कभी खुलती ही नहीं थी, अब विगत 25 दिनों से उसकी विष्णु गार्डन वाली दुकान खुलनी शुरू हुई है। उसको एक दुकान और मिल गई है ।उसका राशन भी कहां जा रहा है ,किसको मिल रहा है, कुछ पता नहीं है। सुरेश वाली दुकान से जो, जो ग्राहक चावल लिया करते थे उनको पता ही नहीं है कि अब चावल कहां से मिलेगा कौन देगा ,इसलिए गगन जी की भी मौज ही मौज है,क्योंकि सैय्या भये कोतवाल तो डर काहे का।

गरीबों के पेट पर लात मारकर अपनी तिजोरियां भरने की होड़ मची हुई है।खुलकर हो रही है चावल की चोर बजरी।
हालत यह है की गरीबों के पेट पर लात मार कर यह लोग गरीबों का माल खुद डकार रहे हैं, और राज्य सरकार को खुलकर चूना लगा रहे हैं, इस कारोबार में उनके साथ पूर्ति कार्यालय व राशन गोदाम के कर्मचारी भी मिले हुए हैं, जिसकी जांच ना तो आज तक हुई है और ना होगी। और यदा कदा यदि कभी जांच हुई भी है, तो उन जांचों के परिणाम शून्य ही सामने आए हैं।
जबकी जांच के दौरान तमाम गड़बड़ियां व भ्रष्टाचार को पकड़ा गया है ,उसके बावजूद भी कोई कार्यवाही आज तक नहीं हुई है ,जिला पूर्ति अधिकारी श्याम आर्य जी की फिलहाल दो जांच राज्य सरकार में चल रही है। लेकिन जांचों के चलते भी वह हरिद्वार जैसे महत्वपूर्ण स्थान की पोस्टिंग प्राप्त करने में सफल हो गए हैं। अब यह पोस्टिंग उन्होंने कैसे प्राप्त की है यह तो उन्हीं को पता होगा

चरणजीत को मिली तीसरी दुकान को लेकर चर्चा 10 पेटी की,हम पुष्टि नही करते,लेकिन कुछ तो हुआ है।
चरणजीत को मिली तीसरी दुकान को लेकर चर्चा यह है की जो तीसरी दुकान दी गई है, उसकी एवज में 10 पेटियां मिली है, यह बात हम नहीं कह रहे हैं, राशन दुकानदार ही काना फूसी कर रहे है ।लेकिन हम इस बात की पुष्टि इसलिए नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि हमारे पास इसका कोई प्रमाण नहीं है।
लेकिन कोई ना कोई या कुछ ना कुछ तो खेल जरूर हुआ है ,जिसकी एवज में चरणजीत को जिला पूर्ति अधिकारी महोदय ने तीसरी दुकान प्रदान कर उपकृत किया है। हो सकता है , चरण जीत को इसलिए उपकृत किया गया हो क्योंकि वे अभी 15 दिन पहले ही जिला पूर्ति अधिकारी महोदय के स्वागत सत्कार में उनके कार्यालय जाकर उनको पुष्प गुच्छ भेंट करके आए थे। शायद यह पुष्प गुच्छ भेंट करने का ही इनाम हो जो चरणजीत को प्राप्त हुआ है।


