31 Mar 2026, Tue
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अन्नत अम्बानी के कुत्ते को मोक्ष । गंगा सभा की मौज, बिना किसी को बताए , अनन्त अम्बानी से गंगा सभा के लिए 5 करोड़ ले आये महामंत्री।ऋषिकेश वाले सन्त को भी मिले दो करोड़।

हरिद्वार । देश के चोटी के उद्योगपति मुकेश अंबानी के पुत्र अनंत अंबानी पिछले दिनों हरिद्वार आए थे ।और हरिद्वार आकर उन्होंने हर की पैड़ी पर सपत्नी गंगा पूजन भी किया था इस गंगा पूजन से पहले अनंत अंबानी ऋषिकेश स्थित स्वामी चिदानंद के आश्रम भी गए और वहां भी पूजा अर्चना की। चर्चा थी की अनंत अंबानी अपने प्रिय कुत्ते की मौत के बाद उसकी अस्थियां विसर्जित करने के लिए आए थे।अनन्त अंबानी कुत्ते की अस्थियां गंगा में विसर्जित करने तो आये थे लेकिन हरिद्वार के तीर्थ पुरोहितों ने इस कार्य को कराने से इंकार कर दिया । फिर ऋषिकेश में चिदानंद जी से सम्पर्क साधा गया वहाँ से भी ना हो गई। बताया जाता है, ये अस्थियां श्रवण नाथ के एक पांच सितारा होटल के घाट पर विसर्जित करने के लिए अनन्त अम्बानी के कर्मचारियों ने हरिद्वार के तीर्थ पुरोहितों से सम्पर्क साधा था । कुत्ते के अस्थि कलश के हरिद्वार गंगा घाट तक पहुचने से कुत्ते को मोक्ष तो मिल ही गया है।अम्बानी परिवार बहुत ही पूजा पाठी व सनातन धर्म मे आस्था रखने वाला परिवार है। उनको पता नही किसने सलाह दे दी की कुत्ते की अस्थियां हरिद्वार गंगा में विसर्जित की जा सकती है।गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम के अनुसार गंगा में केवल मानव की अस्थियां विसर्जित करने का ही विधान है।नितिन गौतम के अनुसार जानवर की मौत के बाद उसको ज़मीन में दबा दिया जाता है।गाय को भी जमीन में ही दबाया जाता है।जला कर अस्थियों को गंगा में विसर्जित करने का कोई विधान नही है।

गंगा सभा को 5 करोड़ दिए।

कुत्ते की अस्थियों की बात हरिद्वार के हर तीर्थ पुरोहित की जुबान पर है ।लेकिन पुष्टि करने को कोई तैयार नही है।ऋषि केश के संत व हर की पैड़ी की सर्वोच्च संस्था गंगा सभा के पदाधिकारीयो को अनन्त अम्बानी ने उपकृत करने का आस्वासन दे दिया था जिसको पूरा कर दिया गया है। महामंत्री गंगा सभा, गंगा सभा के किसी भी पदाधिकारी को बिना बताए सीधे मुंबई पहुंच गए ।और अनंत अंबानी को हरिद्वार से लेकर गई एक चुनरी और एक गंगा जली भेंट की गई ।इस प्रसाद को ग्रहण कर अनंत अंबानी ने गंगा सभा के लिए 5 करोड़ का चेक महामंत्री जी को प्रदान कर दिया।

यह 5 करोड़ तो गंगा सभा के खाते में आ गए बाकी जो अंबानी परिवार ने तीर्थ पुरोहित महामंत्री जी को जो उपकृत किया होगा यह महामंत्री जी को पता होगा या अनन्त अंबानी जी को पता होगा ।लेकिन महामंत्री जी का अंबानी परिवार में अकेले पहुंच जाना बिना किसी पदाधिकारी को बताएं या बिना कोई मीटिंग करें या बिना किसी से इस बारे में सलाह मशविरा किये की मुंबई जाना है।

अंबानी जी से गंगा सभा के विकास के लिए कुछ लाना है। इसकी जरूरत महामंत्री जी ने महसूस नहीं की और महामंत्री जी अकेले मुंबई अंबानी जी के ऑफिस पहुंच गए महामंत्री जी का अंबानी परिवार में उनके पुत्र अनंत अंबानी ने स्वागत सत्कार किया और उन्हें गंगा सभा के विकास के लिए भारी भरकम धनराशि प्रदान कर दी इतनी भारी भरकम धन राशि पहली बार किसी उद्योगपति ने गंगा सभा को दान के रूप में दी है। अब इस धनराशि से क्या-क्या काम होना है यह तो महामंत्री जी को पता होगा या गंगा सभा के पदाधिकारी को पता होगा। लेकिन इतना जरूर है कि महामंत्री जी की इस यात्रा से गंगा सभा के और पदाधिकारी बेहद नाराज हैं और यह मामला भविष्य मे होने वाली गंगा सभा की बैठक में जोर-शोर से उठाया जा सकता है। कि ऐसी क्या आफत थी की महामंत्री जी बिना किसी को बताए बिना किसी को भरोसे में लिए अकेले अंबानी परिवार के मुंबई स्थित ऑफिस पहुंच गए ।

महामंत्री जी से कुछ नाराज ,कुछ समर्थन में।

अब यह भी चर्चा है कि अंबानी परिवार के कुत्ते को तो मोक्ष मिला या नही । लेकिन भविष्य में गंगा सभा के होने वाले चुनाव में महामंत्री तन्मय वशिष्ठ जी को जीत हासिल करने के लिए काफी पापड़ बेलने पड़ेंगे क्योंकि पंडा समाज के अधिकांश पदाधिकारी ,पुरोहित ,महामंत्री जी की इस हरकत से नाराज हैं। लेकिन कुछ तीर्थ पुरोहितों का कहना है ।की महामंत्री तन्मय वशिष्ठ को कोई पराजित नही कर सकता ।

उधर जब गंगा सभा के महामंत्री जो की पेशे से अधिवक्ता भी हैं से जब उनसे बात की गई की क्या आप किसी को भरोसे में लेकर या किसी पदाधिकारी को बताकर मुंबई गए थे या अपने मन से ही चले गए थे। तो इस पर तन्मय वशिष्ठ जी का कहना है कि किसी से भी दान लेकर आने के लिए किसी भी व्यक्ति से इजाजत लेने की या किसी को बताकर जाने की आवश्यकता नहीं होती है। संस्था में कोई चीज रखने की या बताने की उस समय आवश्यकता होती है जब पैसा खर्च करना हो पैसा अगर कहीं से लाकर संस्था को दिया जा रहा है तो यह कोई जरूरी नहीं है कि संस्था के किसी पदाधिकारी को या किसी को भी बताया जाए क्योंकि हम 10 जगह जाते हैं।

अगर आठ जगह सफलता नहीं मिलती है तो हम किसी से इसका जिक्र नहीं करते हैं ।और अगर हमें दो जगह सफलता मिल जाती है तो उसका जिक्र कर दिया जाता है तो इसलिए गंगा सभा के किसी पदाधिकारी से उन्होंने कोई सलाह मशविरा करना उचित नही समझा । वह तो अकेले गए और वहां से भारी भरकम धनराशि लेकर आए हैं। हम तो यही कहेंगे की इसलिए उनकी तो पीठ थपथपाई जानी चाहिए की इससे पहले वह कभी कहीं से कोई धनराशि नहीं लाए हैं लेकिन इस बार 5 करोड रुपए लेकर आए हैं। गंगा सभा के पदाधिकारीयो को तो उनका सम्मान करना चाहिए ।और आने वाले भविष्य में उनको आजीवन महामंत्री घोषित कर देना चाहिए।ऋषि केश के संत को भी दो करोड़ की राशि प्राप्त होने की चर्चा है।

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