29 Mar 2026, Sun

7 सौ रु कुंटल लाओ और माल ठिकाने लगाओ। योगी और जैन फिर सक्रिय।

हरिद्वार में राशन विक्रेताओं के पास इस समय गेहूं और चावल काफी मात्रा में दुकानों में मौजूद है इसके पीछे कारण यह है कि जिलाधिकारी कमरेंद्र सिंह के सख्त आदेशों के बाद राशन माफिया को इस बार चावल और गेहूं नसीब नहीं हो पाया है इसके कारण राशन विक्रेताओं के पास ही यह सारा सामान पहुंचा है और उनकी दुकानों में यह सामान भरा पड़ा है अब इस सामान को ठिकाने लगाने के लिए राशन विक्रेताओं को जिला पूर्ति कार्यालय ने हुक्म जारी कर दिया है कि ₹700 प्रति कुंतल के हिसाब से ले आओ और चाहे जब तक माल ठिकाने लगाओ चर्चा है की रुड़की व मंगलौर के राशन वालों ने यह मांग स्वीकार भी कर ली है । हरिद्वार के भी कुछ राशन डीलरों ने ₹700 कुंतल देकर माल ठिकाने लगाने में ही भलाई समझी है और कुछ लोगों ने इस डील के लिए हामी भर दी है। यह डील राशन माफिया योगी और जैन ने ही कराई है । पूर्ति कार्यालय के एक निरीक्षक ने दुकानदारों से 700रू प्रति कुंटल के हिसाब से एकत्र करने भी शरू कर दिये है।

राशनवाले माफिया के आगे सारे नियम कानून फेल ।

सरकार चाहे जितने भी नियम बना ले परंतु राशन माफिया के आगे सारे नियम कानून फेल होते दिखाई दे रहे हैं।इसमें राशन वालों के साथ-साथ अधिकारी वर्ग भी मिला हुआ है।आपको बता दें की अप्रैल माह में नई मशीनों के माध्यम से राशन वितरण हुआ है जिसमें मशीनों के माध्यम से एपीएल यानी पीले राशन कार्ड पर 7:30 किलो चावल मिलता है जो की सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग 30% ही बंटा है बाकी सारा चावल दुकानों पर अवशेष आज भी है।परंतु राशन वालों से माफियाओं के माध्यम से उसे चावल को पुरानी पद्धति से चढ़ाने के लिए₹700 प्रति कुंतल मांगा जा रहा है जो 4 महीने तक वितरण होगा जिसमें रुड़की और मंगलौर के दुकानदारों ने सहमति जता दी है।हरिद्वार में दुकानदारों की प्रतिदिन मीटिंग हो रही है अतः जिलाधिकारी को चाहिए की अप्रैल माह में जो राशन बंट चुका है। उस माह का शेष राशन दुकानों पर पड़ा हुआ है।उस राशन को जांच करके तुरंत अगले माह में समायोजित कर बचा हुआ माल राशन माफियाओं के पेट में न पहुंच पाए।पुरानी पद्धति से माल सिर्फ अपाहिज, वयोवृद्ध,आदि को ही मिलने के आदेश शासन ने दिए हैं।

हरिद्वार जनपद में भ्रष्ट अधिकारियों का संरक्षण दाता कौन।

हरिद्वार में जितने भी भ्रष्ट अधिकारी व कर्मचारी हैं इनके ऊपर किसी न किसी असर दार व्यक्ति का या अधिकारी का हाथ जरूर है। क्योंकि यह भ्रष्ट अधिकारी या कर्मचारी निर्भीक व निडर होकर खुलेआम रिश्वत की मांग करते हैं ।मांग पूरी न होने पर संबंधित लोगों को प्रताड़ित किया जाता है इसलिए लोग इन भ्रष्ट अधिकारियों व कर्मचारियों की मांग पूरी करने में ही अपनी भलाई समझते हैं और जनपद में सबसे मोटा खेल जिला पूर्ति कार्यालय में चल रहा है जिसमें कम से कम एक करोड रुपए महीना का खेल है अब इस एक करोड रुपए में से इस कार्यालय के संरक्षण दाता को क्या भेजा जाता है ।और क्या अन्य लोगों में बांटा जाता है।यह कह पाना मुश्किल है। साथ ही राशन के गोदाम पर भी खेल मार्केटिंग इंस्पेक्टर द्वारा जारी है यह मार्केटिंग इंस्पेक्टर निर्भीक होकर अपना कारोबार इसी खाद्य गोदाम से चलाता है इसके साथ ही जनपद के अन्य भी कार्यालय चाहे वह तहसील हो चाहे वह रजिस्ट्री दफ्तर हो चाहे वह आबकारी विभाग हो चाहे वह अन्य कमाई के दफ्तर हो सब के कर्मचारी निर्भीक होकर काम कर रहे हैं लेकिन इनका कोई कुछ भी बाल बांका नहीं हो पाता है और इसीलिए यह बेलगाम होकर हरिद्वार जनपद को एक तरीके से लूटने पर लगे हुए इन लुटेरों पर कब लगाम लगेगी यह तो कहना बहुत मुश्किल है क्योंकि इन के संरक्षण दाता इतने पावरफुल या शक्तिशाली है कि लुटेरों को बचाने में यह संरक्षण दाता पकड़े जाने पर एड़ी चोटी का जोर लगा देते हैं इसीलिए लुटेरे भी अपने संरक्षण दाता को ही अपना आका मानते हुए लूट के हिस्से का माल संरक्षण दाता को अर्पित करते रहते हैं ।

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