14 Feb 2026, Sat

मुख्यमंत्री पुष्कर धामी द्वारा कुंभ मेला 2027 की दिव्य, भव्य व्यवस्थाओं के दावों की हवा को भ्रष्ट ,निकम्मे अधिकारियों व ठेकेदारों की चौकड़ी निकालने पर उतर गई है।

हरिद्वार।उत्तराखंड सिंचाई विभाग द्वारा 22 करोड़ की लागत से बनाए जा रहे 2 किलोमीटर लंबे गंगा घाट अधिकारियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार की भेट चढ़ गए है।

शनिवार को कई स्थानों पर टूटे, दरारें पड़े घाटों की बदहाली उजागर होने के बाद मेला अधिष्ठान शनिवार की देर शाम हरकत में आया । व मेलाधिकारी सोनिका जी के निर्देश पर आज अधीक्षण अभियंता सुरेश तोमर ने अधिकारियों के दल के साथ टूटे हुए घाटों का निरीक्षण किया। तोमर साहब के अनुसार 53 मीटर घाट की मरम्मत की जानी है, घाट उत्तर प्रदेश सिचाई विभाग द्वारा छोड़े गए पानी के कारण टूटे है।

घाटों का कोई डिजाइन भी नही बनवाया,

तोमर साहब ने स्वीकार किया की कई स्थानों पर गंगा घाटों में आई दरार व पानी के तेज प्रवाह के कारण घाट टूटे हैं। और उन्हे ठीक किया जायेगा। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग पर ठीकरा फोड़ते हुए अधिकारी अपने भ्रष्टाचार को छुपाने का प्रयास कर रहे हैं।

हकीकत में उत्तराखंड सिंचाई विभाग ने घाटों के डिजाइन के लिए आई आई टी रुड़की से संपर्क किया था लेकिन विभाग द्वारा डाटा उपलब्ध न कराने पर आई आई टी रुड़की ने हाथ खींच लिए थे।मेला अधिष्ठान व उत्तराखंड सिंचाई विभाग को पता था कि छोटी दीपावली की रात को गंग नहर में जल प्रवाह छोड़ा जाएगा, लेकिन इस दौरान घाटों की निगरानी व बड़े अधिकारियों ने घाटों का निरीक्षण नहीं किया। जिसका खामियाजा सामने है।

अब पुनः गंग नहर क्लोजर की उत्तर प्रदेश सिचाई विभाग से मांग, जो सम्भव नही है।दिल्ली व एन सी आर को भी पानी देना होता है मेला अधिष्ठान व उत्तराखंड सिंचाई विभाग के अधिकारी उत्तर प्रदेश से गंगा क्लोजर करने की विनती कर रहे है। लेकिन उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने इसे सिरे से नकार दिया है।

उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विकास त्यागी ने कहा कि उत्तराखंड सिंचाई विभाग के अधिकारी मनमानी कर घाट बना रहे हैं। उन्होंने कहा की गंगनहर बंदी का अधिकार शासन स्तर का है। दिल्ली व एनसीआर को पीने के पानी देने की बाध्यता के कारण क्लोजर अब संभव नहीं है।

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