हरिद्वार ।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित इस घटना से है काफी व्यथित मनसा देवी मंदिर पर हुई घटना की बहुत ही बारीकी से की जा रही है मजिस्ट्रेट जांच, उसके बाद होगी कार्यवाही। मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के कागजात भी खंगाले जा सकते हैं ,ट्रस्ट डीड में लिखी बातें व ट्रस्टियों के लिए बनाए गए नियमों पर भी जिलाधिकारी ले सकते हैं संज्ञान ,जिलाधिकारी व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के हैं पदेन सदस्य।
शिवालिक पर्वत माला की चोटी पर विराजमान मां मनसा देवी का मंदिर काफी प्राचिन मंदिर है ,मान्यता है कि इस मंदिर में माता के दर्शन करने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती है ,वर्तमान में इस मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष निरंजनी अखाड़ा के महंत रवींद्र पुरी जी महाराज है, रवींद्र पुरी जी महाराज साधु संतों की सर्वोच्च संस्था खड़ा परिषद के अध्यक्ष भी कहलाए जाते हैं हालांकि अखाड़ा परिषद का कोई विधिवत चुनाव अभी तक नहीं हुआ है एक दूसरे संत हैं उनका नाम भी रवींद्र पुरी है वह भी अपने आप को अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष बताते हैं। लेकिन निरंजनी अखाड़े के महंत और वर्तमान में मनसा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष रवींद्र पुरी जी काफी दयालु और दानी प्रवृत्ति के संत हैं

मंशा देवी पर आता है, करोड़ों रु प्रतिमाह का चढ़ावा।D M व S S P है, पदेन ट्रस्टी।
मां मनसा देवी के मंदिर से करोड़ों रुपए प्रति माह की आमदनी चढ़ावे के रूप में मिलने वाली राशि के अलावा सोना ,चांदी ,छतर, वस्त्र आदि के रूप में श्रद्धालु भेंट करके जाते हैं ।यह पैसा व यहां की संपत्ति की देखरेख के लिए न्यायालय ने हरिद्वार के जिला अधिकारी व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पदेन ट्रस्टी मनोनीत किया हुआ है ।और इन दोनों की ही जिम्मेदारी है कि यह इस ट्रस्ट की संपत्ति में मनसा देवी मंदिर पर आने वाले चढ़ावे की देखभाल करें साथ ही यह भी देखभाल करें कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरीके की कोई परेशानी ना हो लेकिन न तो कोई जिलाधिकारी ना ही कोई पुलिस अधीक्षक कभी मनसा देवी मंदिर जाते हैं।जिस के चलते यहां अराजकता का तांडव रहता है। जिला अधिकारी इस कार्य के लिए सिटी मजिस्ट्रेट को नामित कर देते है , वह इस कार्य की देखभाल करें लेकिन सिटी मजिस्ट्रेट के पास भी इतना समय कहां है कि वह मां मनसा देवी के मंदिर पर जाकर इन सारी बातों की देखभाल करें वह तो अपने कार्यालय में बैठे रहते हैं। वहीं पर महंत रवींद्र पुरी जी, जो मंशा देवी मंदिर के अध्यक्ष ट्रस्टी हैं। उनकी तरफ से अधिकारियों के पास हैसियत के हिसाब से प्रति माह एक प्रसाद की पोटली पहुंच जाती है यह प्रसाद वितरित करने की जिम्मेदारी का कार्य महंत जी ने एक मनसा देवी मंदिर के कर्मचारियों को सौपा हुआ है ।यह कर्मचारी प्रतिमा मनसा देवी का प्रसाद और चुनरी लेकर अधिकारियों के यहां जाना नहीं भूलता है ।

नारियल वाले शर्मा जी है, रविन्द्र पुरी के बाद मंदिर के सर्वे सर्वा।
सबसे बड़ा खेल इस मनसा देवी मंदिर पर जो होता है, वह है नारियल वाले शर्मा जी का नारियल वाले शर्मा जी की हैसियत रवींद्र पुरी जी के बाद सेकंड नंबर की है प्रतिमाह मनसा देवी को चढ़ाए जाने वाले नारियल, चुनरी छतर, चांदी, सोना व नकद धनराशि के रूप में करोड़ों के वारे न्यारे शर्मा जी करते हैं, यह नारियल वाले शर्मा जी जब तक मनसा देवी नहीं आए थे उससे पहले एक मामूली से आदमी हुआ करते थे कुछ लोग तो कहते हैं कि यह थ्री व्हीलर चलाया करते थे कुछ लोग कुछ और बातें बताते हैं। लेकिन फिलहाल जब से चंडी देवी के मंदिर पर आए हैं और उन्होंने नारियल के कारोबार की जिम्मेदारी ली है ,तब से शर्मा जी के वारे न्यारे है। शर्मा जी की कोठियां तैयार हो रही है गाड़ियां हैं प्लॉट है बैंक बैलेंस है आखिर मामूली सी नौकरी करने वाले यह शर्मा जी इतनी अकूत संपदा के स्वामी कैसे हो गए इसकी जानकारी तो आदरणीय महंत रवींद्र पुरी जी महाराज को होगी, काफी समय पूर्व हरिद्वार के तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट जय भारत सिंह ने मनसा देवी मंदिर की सारी फाइलें और ट्रस्ट की डीड वगैरह निकलवा कर जब जांच करनी शुरू की तो मनसा देवी पर कार्य करने वाले कर्मचारी और स्वयं कुछ वहां के प्रमुख कर्ताधर्ता को पसीने आने शुरू हो गए थे। लेकिन जय भारत सिंह ज्यादा दिन यहां नहीं रुक पाए और उनका स्थानांतरण हो गया था। उसके बाद फिर वही खेल शुरू हो गया। वर्तमान में ना तो मनसा देवी किसी भी प्रकार की कोई जानकारी जिलाधिकारी कार्यालय व सिटी मजिस्ट्रेट को उपलब्ध कराता है और ना ही इन लोगों को हाई कोर्ट के आदेशों की कोई परवाह है। ज्यादा शोर मचने पर जब कोई बात निकल कर सामने आती है तब सिटी मजिस्ट्रेट की तरफ से खाना पूर्ति करने के लिए एक पत्र मनसा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष महोदय के नाम भेज दिया जाता है और वह पत्र रददी की टोकरी में चला जाता है ।या उसका दो-चार 6 महीने बाद गोलमोल सा जवाब सिटी मजिस्ट्रेट दफ्तर को भेज दिया जाता है ।जो फाइल की शोभा बढ़ाता है। इससे अधिक और कुछ नहीं होता है

यात्रियों की सुविधा के लिए कुछ नही।
मनसा देवी मंदिर पर यात्रियों की सुविधा के लिए कोई प्रबंध नहीं है मनसा देवी मंदिर पर शिकायती रजिस्टर भी रखा हुआ है जो पूरी तरीके से शिकायतो से भरा हुआ है आज तक उस शिकायती रजिस्टर में भरी हुई शिकायत के ऊपर किसी भी तरीके की कोई कार्यवाही नहीं हुई है, ।
मंदिर के व्यापार के लिए अनगिनत दुकाने।
मनसा देवी मंदिर को मंदिर कम बल्कि व्यापार का केंद्र ज्यादा बना दिया गया है। वहां नीचे से लेकर ऊपर तक सैकड़ो की तादाद में व्यापारिक प्रतिष्ठान स्थापित कर दिए गए हैं, सड़कों तक को दस फुट से 4 फुट कर दिया गया है ।यह व्यापारिक प्रतिष्ठान राजा जी नेशनल पार्क की अनुकंपा से स्थापित किए गए हैं और इसमें निरंजनी अखाड़े की भी प्रमुख भूमिका है निरंजनी अखाड़े को भी इन दुकानों से करोड़ों रुपए महीना की आमदनी होने के साथ राजा जी नेशनल पार्क के अधिकारियों को भी अच्छी खासी आमदनी हो जाती है।
भगदड़ में 8 की मौत 29 घायल के बाद प्रशासन नींद से जागा।
कल रविवार को भगदड़ के कारण हुई दुर्घटना में 8 लोगों की मृत्यु व 29 लोगों के घायल हो जाने के बाद प्रशासन की नींद खुली है अभी हाल ही में हरिद्वार के जिलाधिकारी की कुर्सी संभालने वाले जिलाधिकारी मयूर दीक्षित इन दो महीना में तो कांवड़ मेले में ही काफी व्यस्त रहे और उसके बाद यह जो दुर्घटना हुई है यह बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटित हो गई, जिसको लेकर जिलाधिकारी मयूर दीक्षित काफी गंभीर दिखाई दे रहे हैं ।और जिलाधिकारी ने मनसा देवी मंदिर पर बनी तमाम अवैध दुकानों को हटाने और तोड़ने के आदेश दे दिए इन दुकानों को अब राजा जी पार्क के अधिकारी जिन्होंने इन दुकानदारों को बसाया था वहीं अब इनको तोड़
रहे हैं। बताया जा रहा है कि इन दुकानों के कारण ही यहां पर घटनाये होती रहती हैं ।रविवार के दिन हुआ हादसा बड़ा हादसा है, भीड़ ज्यादा बढ़ने के कारण हुआ बताया जा रहा है। मनसा देवी मंदिर पर पहले भी भीड़ बढ़ा करती थी पहले भीड़ जब बढ़ती थी सभी अधिकारी उस पर निगाह रखते थे। मनसा देवी मंदिर के ट्रस्टी व उषा ब्रेको उड़न खटोला के कर्मचारी भी भीड़ पर निगाह रखा करते थे और भीड़ बढ़ने पर तुरंत नीचे सूचना दे दी जाया करती थी, की अभी फिलहाल भीड़ को रोक लिया जाए और अभी ऊपर ना आने दिया जाए , जिससे भीड़ ऊपर से जब कम होती थी तभी नीचे से भीड़ को ऊपर जाने दिया जाता था।

पुलिस भी प्रसाद ग्रहण करने में रहती है, वयस्त
पुलिस के पास रोजाना दर्जनों शिकायतें मनसा देवी मंदिर से आती हैं लेकिन आज तक किसी पर भी एक भी कार्यवाही नहीं हुई है क्योंकि हर अधिकारी को तो महीने में प्रसाद की पोटली पहुंचती है । मां मनसा देवी का प्रसाद तो कोई मना कर नहीं सकता तो मां मनसा देवी का प्रसाद और चुनरी ओढ़ते हैं ,और चादर तानकर सोते हैं, उसी का परिणाम यह कल की दुर्घटना है। दुर्घटना में 8 लोग काल के गाल में समा गए और 29 लोग अस्पताल में पड़े हुए उपचार करा रहे हैं।
मुख्यमंत्री पूजा पाठी व करुणामयी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जो की बहुत ही पूजा पार्टी व गरीब लोगों के प्रति उनके अंदर काफी सहानुभूति रहती है। घटना के बाद हरिद्वार आए और उन्होंने हरिद्वार आकर अस्पताल में उपचार करा रहे हैं मरीजों का हाल-चाल जाना और अस्पताल के डॉक्टरो व अधिकारियों को घायलों के अच्छे उपचार के निर्देश दिए। साथ ही राज्य सरकार की तरफ से दो-दो लाख रुपये मृतकों के लिए और 50-50 हजार रुपये गंभीर घायलों के लिए भी दिए साथ ही घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश कर दिए गए , मजिस्ट्रेट जांच के आदेश जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने किए हैं और मजिस्ट्रेट जांच अधिकारी एसडीएम हरिद्वार को बनाया गया है एसडीएम हरिद्वार को यह जांच पूरी कर 15 दिन में जिलाधिकारी को रिपोर्ट देनी होगी।

नारियल वाले शर्मा जी की दुकानें
मनसा देवी मंदिर के नारियल वाले शर्मा जी की तो खुद की करीब 20 से ज्यादा दुकान मनसा देवी मंदिर पर है। करीब आधा दर्जन दुकान चंडी देवी मंदिर पर हैं दो दुकान दक्षिण काली मंदिर पर हैं और भगवान जाने किन-किन मंदिरों पर उनकी दुकान होगी, यह उनको ही ज्यादा पता होगा इन सभी मंदिरों पर नारियल और चुनरी मंशा देवी मंदिर से लाकर बेच दी जाती है, जो चुनरी और नारियल मनसा देवी मंदिर पर चढ़ते हैं वही नारियल और चुनरी नीचे आ जाते है फिर वही ऊपर चली जाती है मनसा देवी मंदिर पर व और दुकानों वही नारियल व चुनरी बिकती हैं। और धड़ल्ले से वही रीसाइकलिंग हो रही है ।मंशा देवी पर चढ़ने वाले एक ही नारियल को दस से बीस बार मां मनसा देवी, मां चंडी देवी, मां दक्षिणी काली मंदिर पर चढ़ा दिया जाता है। और पैसे शर्मा जी की जेब में जाते हैं या फिर इसमें से कुछ राशि शर्मा जी अपने किसी आका को भी जरूर देते होंगे और यह आका निरंजनी अखाड़े से ही जुड़े होंगे । ट्रस्ट डीड के अनुसार कोई भी ट्रस्टी अपने ऊपर किसी तरीके की कोई राशि खर्च नहीं कर सकता है लेकिन इस डीड में लिखे होने से क्या होता है क्योंकि यहां तो लोग हाई कोर्ट हो या कोर्ट हो या D M हो या सिटी मजिस्ट्रेट हो। उनके आदेशो का पालन नहीं करते हैं ।तो ट्रस्ट डीड का क्या पालन करेंगे ।इसलिए आराम से ट्रस्ट के पैसे की गाड़ियों में घूमते हैं, आराम से ड्राइवर रखे हुए हैं।
पेटी कांट्रेक्टर
इतनी आमदनी होती है कि अपने नीचे पेटी कर्मचारी रखे हुए हैं । शर्मा जी को मामूली सी तनख्वाह मनसा देवी मंदिर से मिलती है। उन शर्मा जी ने कम से कम अपने दो दर्जन से ज्यादा पेटी कर्मचारी अपने नीचे रख रखे हैं जिन्हें मोटी तनख्वाह दी जाती है अब यह तनख्वा तो नारियल और चुनरी के खेल से आती होगी ।
जिलाधिकारी सुधार लायेंगे।
लेकिन अब लगता है कि वर्तमान जिलाधिकारी मयूर दीक्षित इस गोरख धंधे को शायद खत्म करके ही दम लेंगे क्योंकि मयूर दीक्षित जी को प्रसाद की इच्छा कम रहती है। वे प्रसाद प्राप्त करने में कम विश्वास रखते हैं अब देखना यह है कि यह जो ट्रस्ट है। जिस पर भी जबरन कब्जा है। यह ट्रस्ट किसी और के नाम का था। इस पर बाकायदा कब्जा कर लिया गया है। और जिन लोगों
का यह ट्रस्ट था असली मालिक जो है उनको धमका कर यहां से नौ दो ग्यारह कर दिया गया है। हालत यह बताए जाते हैं महाराज जी जो मनसा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष होने के साथ ही साथ निरंजनी अखाड़े के महंत भी हैं। साथ ही अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष भी हैं।

दयालु है, रविन्द्र पूरी
रविंद्र पुरी जी इतने दयालु हैं उनसे किसी गरीब की गरीबी नहीं देखी जाती इसलिए सुबह ही बेचारे एक नोटो की गड्डी हाथ में लेकर खड़े हो जाते हैं ।और जरूरतमंदों को वितरित करते हैं। और यह कार्य वह यहां रहते हुए प्रतिदिन करते हैं, अगर महाराज जी हरिद्वार में है और कहीं गए हुए हैं ।तो यह जो बेचारे रोजाना महाराज जी की अनुकंपा पर पल रहे हैं वह महाराज जी की प्रतीक्षा करते हैं महाराज जी जब तक नहीं आते तब तक भाईयो का अखाड़े में ही नाश्ता पानी रोटी चलता रहता है ।और महाराज जी जब आते हैं तो नोटों की गड्डी निकाल कर एक-एक नोट देकर भाई लोगों को विदा कर दिया जाता है। अच्छा है महाराज जी के मन में गरीब लोगों के प्रति इतनी श्रद्धा है
रविन्द्र पुरी ने मृतको को 5 , 5 लाख व घायलों को 1 , 1 लाख दिए।
इस घटना में मृत लोगों के लिए 5 लख रुपए व गंभीर घायलों के लिए एक लाख रुपए देने की घोषणा महंत रविन्द्र पूरी ने की है ।यह पैसा मनसा देवी ट्रस्ट से दिया जाएगा महाराज जी पैसा खर्च करने में पीछे नहीं रहते हैं पैसे के बल पर ही उन्होंने पूरे शहर को अपनी मुट्ठी में ले रखा है। महाराज जी कुछ भी कर ले कितना भी उत्तम कार्य कर ले लेकिन उनके उत्तम कार्यों पर कोई उंगली उठाने वाला नहीं है, क्योंकि उनके पास पैसा इतना है कि हर चीज को पैसे से खरीद लेते हैं।
मुख्यमंत्री सुलझे हुए, परिपक्व नेता।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बहुत ही सुलझे हुए नेता के रूप में उभर रहे हैं ।खासकर साधु संत व गरीब जनता को लेकर तो वह बहुत ही संवेदनशील रहते हैं हरिद्वार में केवल और केवल उनके एक गुरु हैं, स्वामी राज राजेश्वरानंद एक तरीके से फक्कड़ बाबा है एक धोती में रहते हैं संघ से पुराने जुड़े हुए हैं। इन्हीं के पास पुष्कर सिंह धामी आते हैं बाकी पांच सितारा होटल नुमा आश्रमों में रहने वाले साधु संतों से पुष्कर सिंह धामी थोड़ा दूरी रखते हैं । पुष्कर सिंह धामी ने एक बहुत ही उत्तम कार्य इस राज्य की जनता के लिए करने का प्रयास तो किया है इस कार्य को नाम दिया गया है, कालनेमि ऑपरेशन , कालनेमियो की पहचान कैसे हो हरिद्वार और ऋषिकेश के अलावा उत्तराखंड की अन्य कई जगहों पर कालनेमियो की कमी नहीं है ।और यह कालनेमि छोटे-मोटे नहीं बड़े-बड़े धंधे करते है। ज्यादातर कालीमियों में खुलकर शिष्याओं को पालने की भी परंपरा शुरू हो गई है। इन कालनेमियो ने अपने-अपने अखाड़े और आश्रमों में शिष्याएं रखने का प्रचलन शुरू कर दिया है ।और भव्यता में तो इनके कहने क्या ,लेकिन इनके ऊपर हाथ कैसे डाला जाए, इसके बारे में अभी कोई रणनीति नहीं बनी है ,इन कालनेमियो के चक्कर में जो असली साधु हैं ।
संत है सनातन धर्म का प्रचार करते हैं । जंगलों में रहते हुए कंदमूल फल तो नहीं कहा जा सकता लेकिन जो मिल गया वह खाकर अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं ।ना उन्हें किसी से मिलने की चाहत जिसे मिलना है उनसे जाकर मिल ले ,यही हाल राज्य राजेश्वर फक्कड़ बाबा का है कहने को तो यह जगतगुरु शंकराचार्य हैं लेकिन है फक्कड़ इनके पास कोई धन संपदा नहीं है या ऐसा कोई फाइव स्टार कल्चर नहीं है लेकिन नाम राज्य राजेश्वर नंद का काफी है।जगतगुरु आश्रम में बीजेपी हो या संघ के बड़े से बड़े नेता हो आते हैं। और बिना A C वाले उनके कक्ष में बैठकर भोजन प्रसाद ग्रहण कर लेते हैं तो इस तरीके के संत भी है। कुछ संत पूजा पाठ भी करते हैं सनातन धर्म का प्रचार प्रसार भी करते हैं लेकिन कालनेमियों को प्रचार प्रसार व पूजा पाठ से कोई लेना देना नहीं है इन कालनामियों का काम तो देश के राजनेताओं और उद्योगपतियों से संबंध स्थापित कर अपने भक्तों और राजनेताओं के बीच लाइजनिंग का काम कर मोटी रकम हासिल करना है। इन पर हाथ डालना आसान नहीं है ।लेकिन अगर पुष्कर सिंह धामी ने मन मजबूत करके किसी एक कालनेमि को रगड़ दिया तो बाकी कालनेमि खुद ही सीधे हो जाएंगे।
राजसी ठाट बाट
फिलहाल तो मां मनसा देवी की अनुकंपा से और मां मनसा देवी के यहां आने वाले चढ़ावे से जहां अखाड़े के महंत जी व मनसा देवी के ट्रस्टी आदरणीय रविंद्र पुरी जी राजशाही ठाट बाट में रहते हैं वहीं उनके ट्रस्टी मौज उड़ा रहे हैं और करोड़ों के वारे न्यारे हर महीने कर रहे हैं ।अगर इन नारियल वाले साहब की संपत्ति की जांच हो जाए तो इनको यह बताने में काफी परेशानी होगी की मामूली सा वेतन प्राप्त करने वाले मान्यवर के पास इतनी अकूत संपदा चंद वर्षों में ही कहां से आई है। लेकिन बात वही है की बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे , संत परंपरा से हटकर कोई भी साधु अगर कोई कार्य करता है तो उसके खिलाफ आवाज बाबा हठ योगी उठातें है। उनके अंदर ही एक जज्बा है बाकी सब तो देखते रहते हैं ।काना फूसि करते रहते हैं पत्रकारों को बताते रहते हैं कि देखो भैया क्या हो रहा है लेकिन खुलकर कुछ नहीं कहते अगर कह दिया जाए की महाराज जी आपका बयान छाप दिया जाए।तुरंत ही कहेंगे अरे नहीं नहीं मेरा बयान नही मैं तो तुम्हें बता रहा हूं ।तो यह हालत है ।
मुख्यमंत्री धामी को कुछ तो करना ही होगा।
पुष्कर सिंह धामी जैसे मुख्यमंत्री को राज्य हित के लिए कुछ तो करना होगा और खासकर मनसा देवी मंदिर के लिए अब किसी रिसीवर को नियुक्त करने की परंपरा शुरू करनी होगी और यह कार्य मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ही कर सकते हैं क्योंकि मां वैष्णो देवी मंदिर की तर्ज पर यदि मनसा देवी मंदिर का भी रिसीवर नियुक्त कर दिया गया तो यहां भी आने वाले श्रद्धालुओं को जहां काफी सुविधा होगी वहीं राज्य सरकार इस मंदिर के विकास के साथ ही अन्य विकास कार्यों के लिए भी कार्य कर सकेगी अन्यथा मां मनसा देवी पर आने वाला करोड़ों रुपए महीने का चढ़ावा तो इन महाराजाओं की और महाराजाओं के नामित ट्रस्टियों की चाहे वह नारियल वाले हो । या अन्य कोई ट्रस्टि उनकी जेब में जाता रहेगा। और वह मौज उड़ाते रहेंगे। और लोग ऐसे ही शिकार होते रहेंगे इस बार यदि मनसा देवी ट्रस्ट के पूरे कागजात खँगाल कर दूध का दूध पानी का पानी कर दिया गया तो मंशा देवी के काफी कर्मचारी धरातल पर आ जाएंगे । पाप का घड़ा कभी तो भर्ता ही है।वैसे तो मनसा देवी मंदिर और उससे नीचे तक हटाई गई इन दुकानों से ही अपने नारियल वाले शर्मा जी को काफी झटका लगा है। यह वह जिलाधिकारी हैं जिनका नाम मयूर दीक्षित है मैं पहले ही बता चुका हूं इन्हें प्रसाद की पोटली का कोई शौक नहीं है यह खुद मंदिर जाते हैं प्रसाद चढ़ाते हैं और वही प्रसाद ग्रहण कर लेते हैं।इस लिये इनसे कुछ उम्मीद दिखाई पड़ रही है।

