14 Feb 2026, Sat
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कॉंग्रेस के नेता अशोक शर्मा अब जीरो से हीरो बनने का कर रहे हैं,प्रयास।

हरिद्वार । बड़े बुजुर्गों की कहावत है ,की ऊपर वाला इंसान को कब फर्श से अर्श तक और अर्श से फर्श तक पहुंचा दे कह पाना मुश्किल है लेकिन यह कहावत हरिद्वार की उपनगरी कनखल के कांग्रेसी नेता अशोक शर्मा के ऊपर बिल्कुल सटीक बैठती है। अशोक शर्मा कनखल के रहने वाले हैं, अब से 30 35 साल पूर्व बहुत ही सामान्य श्रेणी के साधारण से व्यक्तिव के मालिक हुआ करते थे रोजी-रोटी के लिए छोटे-मोटे काम भी किया करते थे।

लेकिन भाग्य ने ऐसा पलटा मारा की प्रॉपर्टी के काम में अशोक शर्मा ने हाथ आजमाने शुरू किये इनके एक साथी थे शंकर खन्ना जैसा उनका नाम था वैसा ही उनका व्यक्तित्व भी था ।बहुत ही अच्छे इंसान थे लेकिन प्रभु को शायद उनकी अच्छाई इतनी पसंद आई की प्रभु ने उनको बहुत ही जल्दी अपने पास बुला लिया।

काफी मिलनसार स्वभाव के युवा शंकर खन्ना के जाने के बाद अशोक शर्मा को काफी अकेलापन तो महसूस हुआ ही होगा ।क्योंकि शंकर खन्ना अशोक शर्मा के बिल्कुल खासम खास हुआ करते थे। और यह कहे की शंकर, अशोक शर्मा के दाएं हाथ थे तो यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी, लेकिन प्रभु की जैसी इच्छा प्रभु ने उन्हें बहुत ही अल्प आयु में अपने पास बुला लिया।

अशोक का राजनैतिक कैरियर में ग्राफ़ बढ़ा।

अशोक शर्मा कांग्रेस के ऐसे नेता रहे हैं कि वह नगर पालिका के सभासद रहते हुए ।अगर अशोक शर्मा को तलाशना हो तो सुबह 5:00 बजे उठकर आप कनखल के किसी भी वार्ड की किसी भी गली की नालियों के पास उनको ढूंढ सकते हैं। अशोक शर्मा सुबह उठकर सफाई कर्मचारियों के साथ नालियों की सफाई कराया करते थे। और सड़क पर जहां भी कूड़ा करकट पड़ा होता था।

साफ कराया करते थे इसलिए अशोक शर्मा का नाम काफी प्रचारित हो गया था। और वह कनखल के मतदाताओं के बीच लोकप्रिय होने लगे थे ,अशोक शर्मा ने धीरे-धीरे प्रॉपर्टी के काम में अच्छा खासा माल कमाना शुरू कर दिया। और धीरे-धीरे करोड़ों में खेलने लगे अशोक शर्मा इस धन को पचा नहीं पा रहे थे ।

और उनकी वाणी में कटुता दिखाई पड़ने लगी थी ।अपने आगे किसी को कुछ न समझना उनकी नेचर में शामिल हो गया था।उन्होंने अपने पूरे परिवार को ही राजनीतिक मैदान में उतार दिया था। एसएम जे एन पीजी कॉलेज के छात्र संघ चुनाव में उन्होंने अपने पुत्र को अध्यक्ष पद के लिए उतार दिया और धनबल के कारण उनका पुत्र चुनाव जीतने में सफल रहा ।साथ ही उन्होंने अपनी पुत्री को भी राजनीतिक मैदान में उतारा और कनखल के ही वार्ड से सभासद का चुनाव लड़वाया लेकिन उनकी पुत्री चुनाव में पराजित गई थी।

बी जे पी के सहयोग से मेयर की सीट पर काबिज हुए।

नगर निगम के चुनाव में महिला सीट होने की वजह से अशोक शर्मा ने अपनी धर्मपत्नी को मेयर के पद पर मैदान में उतार दिया। जबकि भाजपा के दिग्गज नेता मदन कौशिक ने अपनी परिचित महिला को मैदान में उतारा था ।और मदन कौशिक जैसे दिग्गज नेता के सामने अशोक शर्मा बहुत ही बौने दिखाई पड़ रहे थे।

चुनाव प्रचार में भी अशोक शर्मा भले ही ढीले दिखाई पड़ रहे थे। लेकिन मतदान वाले दिन यह क्लियर हो गया था कि यह सीट मदन कौशिक से कांग्रेस के अशोक शर्मा ने छीन ली है। जबकि सच्चाई यह थी की अशोक शर्मा को या यह कहे कि अशोक शर्मा की पत्नी को मेयर का चुनाव जिताने में बीजेपी के ही लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

इसके पीछे भाजपा के तमाम दिग्गज नेता मदन कौशिक से नाराज थे, क्योंकि मदन कौशिक ने एक ऐसी अनाम सी महिला को मैदान में उतारा था जो बीजेपी के अन्य नेताओं के गले नहीं उतर रही थी, इस लिए बी जे पी नेताओ ने कांग्रेस की प्रत्याशी को वोट देकर कांग्रेस को जीता दिया ।और मदन कौशिक को एक तरीके से चुनाव हरा दिया।

मदन को बड़ा झटका

मदन कौशिक के लिए यह हार एक तरीके से बहुत बड़ा झटका थी , मदन कौशिक ने उन सभी भाजपा नेताओं से किनारा कर लिया जो कभी उनके बड़े ही खास और किचन कैबिनेट के सदस्य हुआ करते थे। व्यापारिक कार्यों में भी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते थे। लेकिन इस सब नफे नुकसान को दरकिनार करते हुए मदन कौशिक ने उन लोगों से किनारा कर लिया और अशोक शर्मा की बल्ले बल्ले हो गई।

मेयर बनते ही अशोक शर्मा, बड़े नेता हो गये।

अब अशोक शर्मा मेयर बनने के बाद तो शहर के कांग्रेस के बड़े नेता बन गए थे ।यह बड़प्पन अशोक शर्मा पचा नहीं पाए ।और उन्होंने हर व्यक्ति को हर कांग्रेसी को अपने से नीचे समझना शुरू कर दिया। इसके बाद उन्होंने पत्नी के मेयर रहते नगर निगम से काफी कुछ फायदा भी उठाया जिसमें लोगों का कहना है की बस अड्डे के सामने बना एक विशाल होटल भी उनकी उपलब्धि रहा है।

साथ ही अन्य भी कई जगह उन्होंने व्यापारिक उपलब्धियां हासिल कर ,जो पैसा चुनाव में खर्च किया था वह पैसा अर्जित कर लिया। उसके बाद पुनः मेयर चुनाव में महिला सीट होने के चलते बीजेपी ने किरण जैसल को मैदान में उतारा अशोक शर्मा पुनः अपनी पत्नी को मैदान में उतारना चाहते थे लेकिन कांग्रेसियों ने अशोक शर्मा की पत्नी को इस बार टिकट नहीं लेने दिया ।और एक अन्य महिला को कांग्रेस का टिकट मिला जिसकी वजह से कांग्रेस चुनाव हार गई। और बीजेपी की किरण जैसल चुनाव जीत गई,

पुत्री को अशोक शर्मा के बड़बोले पन ने हरवा दिया।

इस चुनाव में अशोक शर्मा ने अपनी पुत्री को कनखल के ही एक वार्ड से पार्षद के प्रत्याशी के रूप में उतारा था ।और अशोक शर्मा की यह पुत्री चुनाव जीतने के कगार पर थी, सभी मतदाताओं का या पूरे वार्ड के लोगों का कहना था की अशोक शर्मा की पुत्री चुनाव जीत जाएगी लेकिन अशोक शर्मा ने मतदान के पहले रात्रि को ही अपनी ही पुत्री का चुनाव खराब कर दिया ।

अशोक शर्मा अंगूरी के आसव को ग्रहण कर के रात्रि में बीजेपी के प्रत्याशी के स्थान पर पहुंच गए और रात में ही बीजेपी से लेकर तमाम बीजेपी के स्थानीय नेताओं को व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर जाने किस-किस को उन्होंने अपने प्रवचन सुना दिए और करीब 1 घंटे तक इसको बाकायदा लाइव चलवाया जिसको देखते ही लोगों ने तय कर लिया कि अब अशोक शर्मा की पुत्री को वह वोट नहीं देंगे ,और एक अनाम से बीजेपी के सदस्य को मतदाताओं ने सुबह मतदान के दौरान खुलकर वोट दिया और वह अनाम कार्यकर्ता चुनाव जीतकर पार्षद बन गया। और अशोक शर्मा देखते रह गए।

बाद में अशोक शर्मा को अपनी गलती का एहसास हुआ और उनको यह भी पता चल गया कि जो उन्होंने राजनीति में विगत 10 वर्षों में जो कमाया था वह जीरो हो गए हैं। इसको कहते हैं कि कब ऊपर वाला इंसान को अर्श से फर्श पर और फर्श से अर्थ पर पहुंचा दे, तो अशोक शर्मा ने अर्श से फर्श व फर्श से अर्श का मजा इसी जन्म में चख लिए हैं। इतना जरूर है की संपत्ति उन्होंने काफी कमा ली है ।यह संपत्ति उन्होंने प्रॉपर्टी डीलिंग के काम से कमाई है या नगर निगम में पत्नी के मेयर रहते कमाई है या अन्य किस तरीके से कमाई है यह तो वही जानते होंगे।

कोंग्रेस के महत्वपूर्ण पद की तलाश

आज की डेट में अशोक शर्मा
जो बहुत ही मामूली से आदमी हुआ करते थे आज करोड़ों में खेल रहे हैं। और अब कांग्रेस के किसी महत्वपूर्ण पद पर पहुंचने की उनकी इच्छा है शायद पहुंच भी जाएं, पैसे की उनके पास कोई कमी नहीं है ।अगर कोई पद प्राप्त करने के लिए उन्हें पैसा भी खर्च करना पड़ा तो वह इससे पीछे नहीं हटेंगे । लेकिन अशोक शर्मा को हमारी एक सलाह है की अगर वह अपनी वाणी पर सैय्यम रखेंगे तो शायद भविष्य में कामयाब हो जाएं।

अन्यथा अर्थ से फर्श पर राजनीतिक गलियारों में वह पहुंच चुके हैं ।रही बात पैसे की इसका भी कोई भरोसा नहीं है के ऊपर वाला कब अपनी आंखे फेर ले और आदमी फिर अपने सही और पुराने मुकाम पर जा बैठे। इसलिए अशोक शर्मा जैसे समाज से जुड़े नेता को अब बहुत फूंक फूंक कर कदम रखने की आवश्यकता है ।और अपनी वाणी पर खासकर सैय्यम रखने की आवश्यकता है

लेकिन आज कल अशोक शर्मा अपने आप को प्रदेश का बहुत बड़ा नेता समझ रहे हैं। हरिद्वार के सब नेताओं को दरकिनार करके सीधे प्रतिदिन देहरादून नजर आ रहे हैं।जबकि हरिद्वार के अधिकतर कार्यकर्ता ने उनसे दूरी बना ली है।

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