देहरादून। उत्तराखंड के खाद्य आपूर्ति विभाग में जमकर खेला हो रहा है।यह विभाग केंद्र सरकार के अधीन आता है परंतु राज्य सरकार केंद्र सरकार के नियमों को ताक पर रखकर अपने नियम बनाती है ताकी करोड़ों के वारे न्यारे हों सके।
राज्य सरकार ने 5 मई को एक आदेश जारी किया था जिसमें राज्य योजना के तहत प्रत्येक राशन कार्ड धारक जिनको 7:30 किलो चावल मिलता है। उसको नई ई पाश मशीनों में न चढ़ाने की छूट दी थी।यह छूट अहसाय, विकलांग,वृद्ध जिनका मिलान नई ई पाश मशीन में नहीं हो रहा था उनको पुरानी पद्धती से राशन कार्ड नंबर डालकर राशन दे दिया जाए। यानी जो माल दुकानों पर पड़ा हुआ है उसको चढ़ाकर बाजार में बेज दिया जाए। और इस बाबत हरिद्वार में राशन विक्रेताओं से ₹700 प्रति कुंतल की दर से बात तय हो गई थी।

लेकिन दिनांक 19 मई को केंद्र सरकार ने यह आदेश निरस्त कर दिए थे और सख्त निर्देश दिए थे की नई ई पोश मशीनों से ही समस्त योजनाओं का राशन वितरण होगा।इस आदेश के आते ही राशन माफिया व जिलापूर्ति कार्यालयों में मातम छा गया था। लेकिन दिनांक 22 मई को राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए नया आदेश जारी कर दिया इसमें सभी योजनाओं का राशन पुरानी पद्धति यानि राशन कार्ड का नंबर डालकर चढ़ाया जा सके । अब इन आदेशों के आते ही राशन माफिया व पूर्ती कार्यालयों की लाटरी खुल गई है।अब इस खेल में करोड़ों रुपए का गड़बड़झाला होगा । क्योंकि अप्रैल माह का 70% तक माल दुकानों पर अवशेष है।उसको ठिकाने लगाने के लिए राज्य सरकार का यह आदेश कारगर साबित होगा।




