हरिद्वार । हरिद्वार नगर निगम भूमि घोटाले में 58 करोड रुपए को ठिकाने लगाने वाले हरिद्वार नगर निगम के पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी आईएएस इतने बड़े खिलाड़ी रहे हैं , की उन्होंने जहां अपने को आईएएस होने की हनक पूर्व जिला अधिकारी कमरेंद्र सिंह को दिखाई ,साथ ही साथ अपनी इसी हनक के चलते नगर निगम के कर्मचारियों को भी उन्होंने खुलकर धमकाया और फाइल तैयार करने के लिए बाध्य किया नगर निगम के कर्मचारी इस प्रकरण को अच्छी तरह समझ रहे थे, और वह इस फाइल को तैयार करने के लिए राजी नहीं थे ।लेकिन वरुण चौधरी की धमकी के आगे यह फाइल तैयार की गई।

58 करोड़ का कर दिया खेल,और हरिद्वार से ट्रांसवर करा कर देहरादून सचिवालय में जाकर बैठ गया , वरुण चौधरी I A S लेकिन बीजेपी का बोर्ड बनते ही खुल गई पोल।

तत्कालीन जिलाधिकारी कमरेन्द्र सिंह , I A S शिकारी का हो गए शिकार।
वरुण चौधरी द्वारा भूमि विक्रेता से सांठ गांठ कर नगर निगम के 58 करोड़ रुपए को ठिकाने लगाने के कार्य को अंजाम दे दिया।

मुख्यमंत्री ,पुष्कर धामी
कलाकार i A S साहब ने चैक काटने की अनुमति न तो तत्कालीन जिलाधिकारी कमरेन्द्र सिंह से ली, और न ही शासन से करोड़ों के चैक काटने की स्वकृति लेना उचित समझा।

i A S वरुण चौधरी,58 करोड़ हजम करने के बाद डकार भी नही ली।
बिना शासन या जिलाधिकारी की अनुमति के 5 लाख से अधिक नहीं बल्कि करोड़ों के चेक काटकर पैसा भूमि विक्रेता के खाते में नगर निगम के खाते से ट्रांसफर भी करा दिया और साहब इस प्रकरण के खुल जाने की आशंका को देखते हुए अपना स्थानांतरण यहां से कराकर सचिवालय में जाकर बैठ गए लेकिन नगर निगम में बीजेपी का बोर्ड आने के बाद भाजपा के नगर निगम पार्षदों ने इस डील को लेकर हंगामा किया और जांच की मांग की तब जाकर नगर निगम की मेयर किरण जैसल ने इस प्रकरण की जांच कराने के साथ ही साथ मुख्यमंत्री को भी इसकी शिकायत की और सीधे-सीधे शब्दों में कह दिया गया कि यदि इसकी जांच नहीं होती है, तो इस प्रकरण को लेकर नगर निगम हरिद्वार ,हाई कोर्ट तक जाएगा।

सचिन कुर्वे I A S जांच अधिकारी
उसके बाद इस प्रकरण को चिंगारी सांध्य दैनिक उजागर कर दिया। उसके बाद राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस प्रकरण की जांच के आदेश दे दिए । और वरूण चौधरी, कमरेन्द्र सिंह , एस डीएम के अलावा 9 अन्य नगर निगम के कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया, एक बार जांच I A S रणवीर चौहान कर चुके हैं ।साथ ही साथ उनकी जांच पूरी हो जाने के बाद इस केश की जांच विजिलेंस को भी सौंपी गई है, लेकिन विजिलेंस की जांच अभी चल रही है ।इसके साथ ही अब इस प्रकरण की पुन जांच सीनियर आईएएस सचिन कुर्वे को दी गई है।सचिन कुर्वे भी बहुत ही सुलझे हुए वरिष्ठ I A S अधिकारी है, और वे हरिद्वार के जिलाधिकारी भी रह चुके है।
