हरिद्वार।मंशा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष रविन्द्र पुरी ने 3 माह पूर्व से पहले हरिद्वार के जिलाधिकारी व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ट्र्स्ट का पदेन सदस्य माना ही नही।जबकी हाईकोर्ट ने वर्ष 2012 में दोनों अधिकारियों को ट्र्स्ट का पदेन सदस्य बनाने के आदेश दिए थे।
हरिद्वार के एक जागरूक नागरिक सुरेश तिवारी जो पहले मंशा देवी मंदिर पर ही पुजारी हुआ करते थे लेकिन सुरेश तिवारी के अनुसार उनको अकारण मंदिर के पुजारी पद से मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष ने हटा दिया है ,लेकिन हरिद्वार के जिलाअधिकारी व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ट्र्स्ट का पदेन सदस्य होते हुए इन दोनों अधिकारियों की भी लापरवाही मानते हुए हाईकोर्ट में याचिका सुरेश तिवारी ने दायर की हुई है।

मंशा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष रविन्द्र पुरी जी ने जिलाधिकारी व एस एस पी को कभी पदेन ट्रस्टी माना ही नही।हाई कोर्ट के 2012 के आदेशों की भी परवाह नही की।हाईकोर्ट के आदेशों के विरुद्ध अध्यक्ष जी सुप्रीम कोर्ट भी गये थे।लेकिन वहाँ से भी अध्यक्ष जी को राहत नही मिली थी।
हाई कोर्ट ने वर्ष 2012 में आदेश दिए थे के मनसा देवी, गंगा सभा व चंडी देवी ट्र्स्ट के, हरिद्वार के जिला अधिकारी और एस एस पी पदेन सदस्य होंगे। लेकिन मनसा देवी मंदिर ट्र्स्ट के अध्यक्ष रविन्द्र पुरी हाई कोर्ट के आदेशो के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट चले गए थे। की इन दोनों अधिकारियों को पदेन सदस्य न बनाया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने मनसा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी। की जब आप लोग ईमानदारी से कार्य करते है तो इन दोनों अधिकारियों से आपको क्या दिक्कत हो सकती है।

महंत रविन्द्र पूरी
लेकिन हाई कोर्ट का आदेश हो या सुप्रीम कोर्ट का आदेश मनसा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी जी ने आज तक इन दोनों को पदेन सदस्य के रूप में स्वीकार नहीं किया, और ना ही पदेन सदस्य के रूप में विगत 13 वर्षों से किसी भी बैठक में बुलाया,अपनी मनमर्जी करते रहे । यह मामला तो अभी मई माह में जब मनसा देवी पर हादसा हुआ और 9 श्रद्धालुओं की मौत हो गई तब सामने आया, जब डीएम व एसएसपी ने सख्त रुख अपनाया और उन्होंने सारी फाइलें खंगाली के वह ट्र्स्ट के पदेन सदस्य है या नही जब कागजो की बारीकी से जांच की गई तब हाईकोर्ट का 2012 का आदेश मिल गया

जिलाधिकारी, हरिद्वार
जिलाधिकारी व एस एस पी ने बुलाई थी मंशा देवी घटना के बाद बैठक ,जिलाधिकारी ने मंदिर पर तमाम कमियाँ पाते हुए ,मंदिर पर रिशिवर नियुक्त करने की बात कही थी।तो अध्यक्ष जी के तोते उड़ गए थे।
हाईकोर्ट को यदि पता चला की उसके 2012 के आदेशों का अभी तक पालन नही किया गया है,तो मामला अध्यक्ष जी के लिये बहुत ज्यादा टिपिकल हो सकता है।
अब हाई कोर्ट को यह तय करना होगा कि जब उसने 2012 में यह आदेश कर दिए थे, की जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मनसा देवी ट्रस्ट के पदेन ट्रस्टी होंगे तो। मनसा देवी ट्रस्ट ने इन दोनो अधिकारियों को 13 साल तक पदेन सदस्य क्यो नही माना, और इस अवधि में किसी भी ट्रस्ट की बैठक में इनको क्यों नहीं आमंत्रित किया गया।

एस एस पी , हरिद्वार
इसका जवाब ट्रस्ट के अध्यक्ष रवींद्र पुरी को हाई कोर्ट को देना ही पड़ेगा ।अब देखना है, की हाई कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाती है , जबकी रविंद्र पुरी पर हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना का आरोप तो बनता ही है।अब हाईकोर्ट भी इस प्रकरण का तभी संज्ञान ले सकती है, जब यह पूरा प्रकरण हाईकोर्ट के समक्ष आये।
मंशा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष जी की पसंद के ट्रस्टी
अनिल शर्मा ट्र्स्ट का ट्रस्टी है, ट्रस्टी बनने से पहले अनिल शर्मा गुजर बसर करने के लिए थ्री विहलर चलाया करते थे।एक ट्रस्टी सीमा गिरी बताई जाती है।अध्यक्ष रविन्द्र पुरी ,सीमा गिरी को कभी ट्रस्टी मानते है, कभी नही।जिलाधिकारी द्वारा बुलाई गई बैठक में भी सीमा गिरी को ही अध्यक्ष जी ने चौथे ट्रस्टी के रूप में पेश किया था। बताया तो यह भी जाता है, की पहले सीमा गिरी जी रामानन्द इंस्टीट्यूट में कार्य किया करती थीं, ये इंस्टीट्यूट भी रविंद्र पुरी जी के संरक्षण में चलता है।

अनिल शर्मा, ट्रस्टी
दूसरे ट्रस्टी है राज गिरी , जिन पर तो बहुत ही सुंदर ,सुंदर आरोप है।लेकिन ये भी अध्यक्ष जी के खास है।
दूसरे ट्रस्टी है, राज गिरी पर कई तरह के आरोप है।रोशनी,काल्पनिक नाम की एक कन्या तो राज गिरी की तलाश में विकाश नगर तक पहुंच गई थी,रात्री में अकेली घूम रही रोशनी को पुलिस ने पकड़ लिया था। रोशनी को छुड़ाने के लिए महिला इंस्पेक्टर को तरह तरह के प्रलोभन दिये गए थे , लेकि पुलिस ने रोशनी को छोड़ा नही था।तीसरे ट्रस्टी प्रदीप शर्मा जो इन महान ट्रस्टियों की हरकतें देख, छोड़ कर चले गए है।

सीमा गिरी ट्रस्टी
अनिल शर्मा के पास अध्यक्ष जी का कोई न कोई गहरा राज है। जिसकी वजह से अनिल शर्मा मौज ले रहे है।
अब मंशा देवी ट्र्स्ट के असली करता धर्ता अनिल शर्मा ही है। अनिल शर्मा के पास अध्यक्ष जी की कोई न कोई ऐसी नस दबी हुई है।जिसके कारण पूरा मन्दिर पूर्व में थ्री विहलर चलाने वाले के सुपुर्द कर रखा है। थ्री व्हीलर चलाना कोई बुरी बात नही है।लेकिन मन्दिर पर आने वाली दान की राशि से ही अनिल शर्मा करोड पति बन गया है।

अब अनिल शर्मा ने अपने पुत्र नमन शर्मा की भी परमानेंट सर्विस मंशा देवी पर ही लगा दी है। अब दोनो पिता पुत्र मंशा देवी मंदिर ट्रस्ट के एक तरीके से मालिक हो गए है।मंशा देवी मंदिर पर कार्य करने वाले ज्यादातर कर्मचारी वहाँ से पैसे चुराते है।और चुराए भी क्यों न मात्र 7 से 10 हजार रु के प्रतिमाह वेतन में गुजारा कैसे होगा ,ये तो अध्यक्ष जी को सोचना होगा।

नमन शर्मा, अनिल शर्मा का पुत्र

