रुड़की 15 नवम्बर,
दीक्षांत भाषण में राज्यपाल ने उपाधि प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों और शिक्षकों को बधाई दी और कहा कि दीक्षांत समारोह जीवन का वह स्वर्णिम क्षण है, जो परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति का सुखद परिणाम होता है।

उन्होंने उपाधि धारकों से कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता और यह लंबे समय तक किए गए कठिन परिश्रम, धैर्य और अनुशासन का परिणाम होता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे बड़े और असीमित सपने देखें और उन्हें साकार करने के लिए निरंतर परिश्रम, दृढ़ संकल्प और सकारात्मक सोच अपनाएं।

राज्यपाल ने कहा कि नैतिकता, चरित्र और विनम्रता ही स्थायी सफलता के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। उन्होंने आधुनिक तकनीकी क्रांति, एआई, डेटा एनालिटिक्स, रोबोटिक्स और क्वांटम कंप्यूटिंग, का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से “लाइफ लॉन्ग लर्निंग” अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि भविष्य में वही युवा नेतृत्व करेगा जो सीखना बंद नहीं करेगा और नई तकनीकों को आत्मसात करेगा।

राज्यपाल ने कहा कि भारत अमृत काल की महत्वपूर्ण यात्रा पर अग्रसर है और वर्ष 2047 तक विकसित भारत का निर्माण युवाओं की सक्रिय सहभागिता से ही संभव होगा।


