हरिद्वार : नगर निगम हरिद्वार के खाते से 56 करोड रुपए निकालकर बेकार पड़ी सराय स्थित 33 बीघा भूमि को खरीदने वाले पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी ने अपने I A S होने का ऐसा रोब इस जनपद के अधिकारियों और कर्मचारियों पर डाल रखा था। कि इन मान्यवर की करतूतो का कोई भी अधिकारी विरोध करने की स्थिति में यहां पर नहीं था। यही कारण है की नगर निगम ने सराय की जो 33 बीघा जमीन 56 करोड रुपए में खरीदी है उसकी फाइलो पर बाकायदा जिन लोगों ने चिड़िया बैठवाई हैं उनमें से चार कर्मचारी तो जांच की आंच में बली का बकरा बन चुके है। सब इन I A S साहब की धौंस के शिकार हुए है। अब पांचवें शिकार होंगे तत्कालीन एसडीएम अजय वीर सिंह। सिंह साहब की गर्दन भी इस खेल के अंदर बिल्कुल फंसी हुई रखी है ।कोई उनकी गर्दन को इस खेल से निकाल नहीं सकता है ।

जांच अधिकारी हो या कोई हो कितनी भी कोशिश कर ली जाय एसडीएम साहब तो फंसे हुए ही हैं ।बचेंगे I A S साहब भी नही।लेकिन फिलहाल तो S D M साहब पर बनी हुई है। एसडीएम साहब की गर्दन बिल्कुल फंस चुकी है क्योंकि मामला इतना गंभीर हो गया है । की जिन जितेंद्र ,धर्मपाल व सुमन ने भूमि का लैंड यूज चेंज करने के लिए एप्लीकेशन दी थी ना तो उस एप्लीकेशन पर कोई डेट है यानी दिनांक है कि किस दिनांक को एप्लीकेशन लैंड यूज चेंज करने के लिए दी गई और S D M साहब कृषि को आवाश य करने के लिये इतनी जल्दी में थे की उन्होंने इस प्रकरण में किसी नियम का पालन ही नही किया। नियमानुसार 143 करने के लिए S D M पहले पटवारी फिर नायब तहसीलदार बाद में तहसीलदार की रिपोर्ट आने के बाद 143 करता है क्योंकि नियम यही है । लेकिन यह मामला I A S साहब से जुड़ा था तो किसी नियम की जरूरत S D M साहब ने महसूस ही नही की।
ये इस लिए हुआ की बिना दिनांक पड़ी हुई एप्लीकेशन पर पता ही नही चलेगा कि 143 के लिए कब एप्लीकेशन दी गई है । 143 के आदेश होते ही जमीन के भाव आसमान छूने लगे और I A S साहब की बल्ले बल्ले हो गई । अब शहर का कूड़ा आवाशय भूमि पर डाला जा रहा है। जांच में नगर निगम के चार अधिकारी जरूर लपेटे में आ गए हैं। जो बेकसूर है। और बेवजह I A S साहब के कारण ही बली का बकरा बन गए है। I A S साहब ताजा उदाहरण उत्तर प्रदेश का है । वहाँ भी I A S साहब ने 50 करोड़ से अधिक का खेल कर दिया था।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी जांच करा कर उनको घर बैठाने की पूरी तैयारी कर दी है । शायद ऐसा ही अनुसरण करते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी कोई ऐसा ही कदम उठा ले तो शायद राज्य की जनता को ऐसे देश सेवा की शपथ लेने वाले देश सेवक से मुक्ति मिल जाय।



