29 Mar 2026, Sun

आई ए एस वरुण चौधरी ने नगर निगम के एम एन ए होते ,सर्किल रेट की आड लेकर कर दिया 58 करोड़ का खेल

हरिद्वार ।

नगर निगम हरिद्वार के पूर्व मेयर वरुण चौधरी मोटा खेल करके राजधानी जाकर बैठ गए हैं ।वरुण चौधरी साहब ने 58 करोड रुपए की 35 बीघा जमीन सराय के पीछे खरीद कर नगर निगम को भारी चूना लगा दिया है ।जिसकी जांच के आदेश वर्तमान नगर निगम की मेयर किरण जैसल की तरफ से दिए गए हैं

।शासन को भी अवगत कराने के साथ ही कोर्ट जाने की भी नगर निगम तैयारी कर रहा है।लेकिन चाहे कोर्ट जाओ या जांच कराओ होना कुछ नही क्योंकि इतनी चालाकी से इस खेल को अंजाम दिया गया है ।की साहब का कुछ बिगड़ने वाला नही। वरुण चौधरी ने रजिस्टरी के सर्किल रेट का लाभ उठा कर खेल कर दिया।सराय के पीछे जिस 35 बीघा कबाड़ जमीन को 58 करोड में खरीदा गया वास्तव में इस जमीन की कीमत दस करोड़ भी नही है।क्योंकि इस जमीन के समीप ही नगर निगम शहर से एकत्र कूड़े को डलवाता है।प्रस्ताव बनाया गया कि कूड़ा डालने के लिये ज्यादा जमीन की आवश्यकता है।बस आनन फानन में इस बेकार पड़ी 35 बीघा जमीन को 58 करोड़ में खरीद लिया गया।पूरा शहर जानता है।की पूरे जनपद में ज्यादातर जमीन ऐसी है जिसके सर्किल रेट अधिक है और मार्केट वेल्यू कम है ।यही कारण है ।की जमीनों की रजिस्ट्री होने में कमी आई है।

इसी सर्किल रेट का फायदा यहाँ उठाते हुए खेल कर दिया गया आज भी यदि इस 35 बीघा जमीन को बेचा जाय तो कोई इसके दस करोड़ भी नही देगा। इस खेल में और भी किसी खिलाड़ी के दिमाग ने अवश्य काम किया होगा । इसको कहते है आई ए एस का दिमाग , खेल कितना बड़ा कर दो लेकिन कागजी कार्यवाही में कभी मत फँसो। नवम्बर 2024 में सुमन देवी ,जितेंद्र कुमार व धनपाल निवासी सराय से ये भूमी खरीदी गई।सुमन देवी को 18 करोड़ 16 लाख , जितेंद्र को 26 करोड़ व धनपाल को 6 करोड़ 27 लाख रु की पेमेंट नगर निगम की तरफ से की गई।लेकिन ऐसा भी नही की यदि न्यायालय इस प्रकरण को गम्भीरता से लेते हुए जमीन मालिको जिनको जमीन की एवज में 58 करोड़ का भुगतान किया गया यदि उसके खाते की जाँच हो जाये तो पूरा खेल खुल सकता है लेकिन इसके लिये नगर निगम के अधिवक्ता को बहुत ही गम्भीरता से मामले के हर पहलू से न्यायालय को अवगत कराना होगा। आश्चर्य की बात ये है की इतना बड़ा खेल हो गया और किसी को पता ही नही चला । नगर निगम के कुछ कर्मचारियों को तो तो इस खेल के बारे में निश्चित पता होगा।लेकिन बड़े बुजुर्गों की कहावत है।अब पछताए क्या होत है जब चिड़िया चुग गई खेत।

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