
हरिद्वार ।
धर्म के नाम को बेच कर किस तरीके से दौलत कमाई जा रही है इसका जीता जागता उदाहरण है हरिद्वार की विश्व प्रसिद्ध हर की पौड़ी जहां विश्व भर से पूरे वर्ष सनातन धर्म हो या अन्य कोई धर्म हो उसमें आस्था रखने वाले लोग हर की पैड़ी पर आकर गंगा स्नान करते हैं पूजा पाठ करते हैं और अपने पितरों को मोक्ष दिलाने के लिए हर की पैड़ी के विभिन्न घाटों पर अपने पूर्वजों की अस्थियां विसर्जित करते हैं ।12 वर्ष व 6 वर्ष में हरिद्वार में लगने वाले कुंभ मेला में भी शाही स्नान हर की पौड़ी पर होते हैं ।शाही स्नान कुंभ मेले में होते हैं 6 वर्ष में लगने वाले अर्ध कुंभ मेले में कोई साही सन्न नहीं होता है ।उसके बावजूद सनातन धर्म में आस्था रखने वाले हिंदू लोग प्रति माह हर की पैड़ी पर गंगा स्नान करने के लिए अमावस ,एकादशी, पूर्णिमा, बैसाखी वह अन्य कई त्योहारों पर आते रहते हैं और यहां भीड़ लगी रहती है । ये कहा जाय कि हरिद्वार में रहने वाले हर व्यक्ति की रोटी का प्रबंध माँ गंगा ही करती है तो ये अतिश्योक्ति नही होगा ।तीर्थ नगरी हरिद्वार की हर की पैड़ी के रखरखाव की जिम्मेदारी यूं तो तीर्थ पुरोहितों की संस्था गंगा सभा की है लेकिन गंगा सभा का कहना है कि वह केवल हर की पौड़ी के उस क्षेत्र का ही रखरखाव कर सकते हैं जहां पर मां गंगा की आरती होती है व गंगा सभा का कार्यालय है। गंगा सभा के कार्यालय के ठीक सामने मालवीय दीप है ।मालवीय दीप पर होने वाले कर्यो का कार्य क्षेत्र नगर निगम के पास है।


मालवीय दीप से सी सी आर तक मीना बाजार ।
इस तीर्थ नगरी हरिद्वार की हर की पौड़ी पर मालवीय दीप का नजारा आपको बम्बई के जूह की तरह लगेगा।यहाँ पर मीना बाजार देखने के लिए आपको मिलेगा इस मीना बाजार पर असख्य स्थान पर फूल बिकते हुए मिलेंगे प्लास्टिक की केन बिकती मिलेगी नमकीन ,तरबूज ,भेलपुरी यह सब चीज बिकने के साथ-साथ हर की पौड़ी पर स्नान करने वाले यात्रियों को अपने सामान की भी खुद ही सुरक्षा करने की जिम्मेदारी रहती है क्योंकि यदि यात्री ने अपने कपड़े उतार कर गंगा में डुबकी लगाई तो आप समझ लीजिए की उस व्यक्ति को उसके कपड़े पैसे अन्य महत्वपूर्ण कागजातों से वंचित भी होना पड़ सकता है यहां पर चोर उठाई गिरे जेब कतरो का तांडव है रोजाना चौकी हर की पैड़ी पर इस तरह की की शिकायतें आती है लेकिन होता कुछ नहीं । यहां स्नान करने आने वाले अपनी जेब कटा कर अपने कपड़े कागज सब गवां कर रोते-पीटते अपने घरों को लौटते हैं यह हाल है हर की पैड़ी पर स्थित मालवीय दीप का।
सुभाष घाट बन चुका है चरस,स्मेक, अफीम, टिंचरी व शराब की मंडी ।

हर की पौड़ी पर नाई घाट ,सुभाष घाट पर आपको टिंचरी से लेकर शराब ,चरस ,अफीम ,स्मेक सब चीज उपलब्ध है छोटे-छोटे बच्चे व महिलाएं भी इस काम में लगी हुई है आपको किसी भी प्रकार का कोई नशा की आवश्यकता हो तुरंत उपलब्ध है इसके बारे में भी पुलिस को कोई लेना-देना नहीं है सुभाष घाट पर ही तमाम लंगर लगा दिए गए हैं इन लंगरों से खाना लेने वाले भिखारियों को खाना नहीं चाहिए उनको चाहिए केवल और केवल पैसे हरिद्वार में आने वाले तीर्थ यात्री गरीबों को बड़ी श्रद्धा से भोजन कराते हैं और यह गरीब उस भोजन को लेकर तुरंत आधे पैसों में दुकानदार को ही वापस कर देते हैं और यदि दुकानदार ना ले तो यह उस भोजन को डस्टबिन में डाल देते हैं जिनमें आवारा पशु मुंह मारते रहते हैं इनको केवल चाहिए पैसे ।इन भिखायो को जो लोग कंबल बांटते हैं उन कंबलों को भी तुरन्त आधे दाम पर दुकान पर ही बेच दिया जाता है।इन्हें केवल चाहिए पैसे व पैसे चाहिए शाम को इन भिखायो को टिंचरी, शराब ,सुल्फा के लिए पैसो की आवश्यकता होती है। भिखारी के रूप में जो लोग घूमते हैं । ये लोगों का सामान भी उठाकर रफू चक्कर हो जाते । हरपैडी पुलिस चौकी इन सब चीजों से अनभिज्ञ है।जबकि अन्य सबको इन कृत्यों का पता है ।लेकिन कोई कुछ नहीं करता सबने आँखे मूंद रखी है। इसलिए कप्तान साहब आप इस पूरे जिले को सुधार रहे हैं तमाम अतिक्रमण हटा रहे हैं बहुत सारी चीज सुधारने के लिए रोजाना आप पुलिस को सड़कों पर उतार रहे हैं खुद भी आप समय समय पर सड़कों पर उतरकर सारी चीजों का मोका मुआयना करते हैं ।तो एक बार हर की पौड़ी का भी मुआयना कर लीजिएगा । लेकिन करना बिना अपने मातहतों को इत्तला किए हुए। जब आप वहां पहुचेंगे तो वहां की पूरी सूरत आपके सामने आ जाएगी ।और आप पूजा पाठी धर्म को मानने वाले अधिकारी है आपको लगेगा कि वास्तव में हर की पैड़ी का उद्धार करने की आवश्यकता है। आपने हर की पैड़ी का उद्धार कर दिया तो लोग आपको भी भागीरथ तो नहीं कहता लेकिन उनके समक्ष जरूर मानने लगेंगे क्योंकि तीर्थ नगरी हरिद्वार पर देश-विदेश से लोग आते हैं। लेकिन यहां का दृश्य देख भौचक्के रह जाते है।

