13 Feb 2026, Fri

सावन मास के इस मेले में इस बार कांवरिये हो रहे हैं उग्र ,पवित्र काँवड़ में जल ले जाने वाले कांवरिये किसी से टच हो जाने पर या किसी से स्पर्श हो जाने पर काट रहे हैं हंगामा , काँवड़ किसी से टच होने या स्पर्श होने से नहीं होती है खंडित, काँवड़ खंडित होती है नशा करने व उपद्रव के कारण।

हरिद्वार। हरिद्वार में सावन महीने में चलने वाला कांवड़ मेला शुरू हो चुका है कांवड़ मेले का अभी विधिवत रूप से तो तीसरा ही दिन है। लेकिन कांवड़ मेला विगत 15 दिन से शुरू हो चुका है ,इस बार कांवरिया बड़े-बड़े कलशों में भारी तादाद में गंगाजल लेकर जा रहे हैं ।

और यह कांवरिया छोटी-छोटी बातों पर मारपीट तोड़ फोड़ पर उतारू हो जाते हैं ।जो कि किसी भी तरीके से इन शिव भक्त कांवड़ियों के लिए उचित नहीं है। इस बार पहली बार देखने को मिल रहा है की मेले के प्रारंभ से ही कांवरिये जरा जरा सी बात पर उग्र होते दिखाई दे रहे हैं।

इस बार क्यो हो रहे है कांवड़िए उग्र

विगत 20-25 सालों से चल रहे कांवड़ मेले पर दृष्टि डाली जाए तो इक्का-दुक्का घटना डाक कावड़ के दौरान हुआ करती थी या कांवरियों की हाईवे पर आने के लिए पुलिस से झड़प हो जाया करती थी वह भी मेले के अंतिम दिनों में डाक कावड़ के दौरान अन्यथा कावरिया और पुलिस के बीच झगड़ा मुजफ्फरनगर मेरठ में ज्यादा हुआ करती थी ,लेकिन इस बार हरिद्वार में विगत 15 दिन से आ रहे दूर दराज के कांवरिये अकारण पुलिस से और उन लोगों से उलझ रहे हैं जिनकी जरासी भी कोई गाड़ी या कोई चीज कांवरियों से स्पर्श हो जाती है ।

पवित्र गंगा जल लेकर जा रहे कावरियो को यह समझ लेना चाहिए कि कांवड़ किसी से टच या स्पर्श हो जाए तो ऐसी स्थिति में कांवड खंडित नहीं होती है। क्योंकि शिव भक्तों को सोचना चाहिए कि जिस जगह वह सड़क पर चल रहे हैं और कावड़ वहां पर रख देते हैं ।

वहां भी कोई साफ सफाई नहीं होती है उससे पहले वहां किस तरह की गंदगी रही होगी क्या पता, इस बात की जानकारी कांवरियों को भी नही,लेकिन पता नही किस महान विभूति ने बता इन शिव भक्तों को बता दिया है की काँवड़ किसी से टच हो जाने पर खंडित हो जाती है।जबकी ऐसा कोई प्रमाण हमारे धार्मिक ग्रन्थों में भी नही मिलता है।

काँवड़ लेने आये शिव भक्त शान्ति पूर्वक जल लेकर जाय,

शिव भक्त कांवरियों को हम यही सलाह देंगे शांतिपूर्वक जल ले जाकर बाबा भोलेनाथ का अपने-अपने घरों निकट बने शिवालयो में जलाभिषेक करें ,और जो मनोकामनाएं मांगी है उनके पूरा होने की प्रतीक्षा करें। वह तभी पूरी हो पायेंगी जब बाबा भोलेनाथ की आराधना पूर्ण शांति व सच्चे दिल से करेंगे लोगों से लड़ाई झगड़ा करने से कांवड ले जाने से कोई फायदा नहीं होगा ।

और कांवड लेने आये शिव भक्तों को चाहिए कि किसी तरीके का नशा भी ना करें। कहीं भी किसी भी धार्मिक ग्रन्थ में नहीं लिखा है काँवड़ लेने आये शिव भक्त नशा करे । जबकी चरस पीना शराब पीना या अन्य किसी प्रकार का भी नशा करना वर्जित है।

डेली ड्रिंकर भी नही पीते सावन में शराब।

हरिद्वार में तो जो डेली ड्रिंकर होते हैं वह भी सावन मास में शराब और मांस खाना छोड़ देते हैं। यही नहीं और भी अन्य शहरों में इसी तरीके की परंपरा है की सावन मास में और नवदुर्गों में लोग शराब और कबाब का सेवन छोड़ देते हैं ।तो कांवरियों को भी चाहिए कि वे शिव आराधना के महीने में नशा त्याग दे, क्योकी कांवरिये हरिद्वार इतनी मेहनत करके आते हैं इतना पैसा भी खर्च करते हैं और यहां जरा जरा सी बातों में लोगों से लड़ाई झगड़ा करते हैं ।

कांवड़िए सुरक्षा कर्मियों की बात माने।

यहा पुलिस भी आप ही की सुरक्षा के लिए खड़ी है पुलिस आपको अगर कांवड़ पटरी पर या किसी दूसरे रास्ते पर जाने के लिए आपसे अनुरोध कर रही है तो पुलिस की बात मान लेनी चाहिए ।और अकारण किसी भी तरीके से लोगों से उलझना मारपीट करना तोड़फोड़ करना यह किसी भी शास्त्र में नहीं बताया गया है ।

रही बात पुलिस ने कांवड़ियों की जो गिनती करनी शुरू कर दी है कि 10 लाख काँवड़ आए और 12 लाख चले गए । इस विशाल मेले में शिव भक्तों की गिनती नामुमकिन है। हरिद्वार में मेले के दौरान 20 से 30 लाख कावरिया हमेशा 23 जुलाई तक बना रहेगा यह संख्या और ज्यादा भी हो सकती है। इनकी कोई गिनती नहीं है।

इस मेले में कितने लाख आए कितने करोड़ गए यहां यह गिनती करना बेमानी होगी कि इतने लोग आए और इतने चले गए क्या पैमाना है पुलिस के पास इन लोगों की गिनती का। 24 घंटे मेला चलता है और जनपद की हर सीमा से हर रास्ते से केसरिया परिधानों में लिपटे कांवड़िए भोलेनाथ की जयकार करते चले जाते हैं।

सभी कांवड़िए अराजक तत्व नही।

कुछ कांवड़ियों की वजह से इस मेले में आने वाले सारे कांवड़िए बदनाम होते हैं। जिस तरीके से एक मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है ठीक उसी तरीके से कुछ कांवड़ियों की हुड़दंग बाजी और गुंडागर्दी से सारे कांवरिया बदनाम होते हैं जबकि सारे कांवड़िए ऐसे नहीं होते हैं ज्यादा तर कांवरिया पूरी निष्ठा और आस्था के साथ अपनी कांवर लेकर शांतिपूर्वक अपने-अपने नगर और शहरों की ओर जाते हैं।

इस भीषण गर्मी में पुलिस वालों के लिए पीने के पानी का प्रबंध तो करवा दो।

हम मेले में लगे उच्च अधिकारियों से यह प्रार्थना करेंगे की पुलिस के जवान जो इस भीषण गर्मी में सुबह से लेकर शाम तक चौराहो पर गर्मी में धूप की तपिश में ड्यूटी दे रहे हैं उनके लिए कम से कम पीने के पानी की व्यवस्था कर दी जाए ।पीने का पानी तक उनके पास नहीं है वह अपने पैसे से पानी मंगाकर पी रहे हैं। थोड़ा सा अगर मेला प्रशासन इस ओर ध्यान देगा तो कांवरियों की सेवा और अधिक तत्परता से और निष्ठा से यह पुलिस के जवान कर पाएंगे।

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