29 Mar 2026, Sun

पुलिस के लिए ,अग्नि परीक्षा से कम नही होगा ,कांवड़ मेला। संसार का सबसे बड़ा मेला है ये कांवड यात्रा।कुंभ जैसे पर्व तो फीके है इस शिव भक्तों की यात्रा के सामने। बिना बजट के ही संपन्न हो जाता है। ये विशाल मेला।

हरिद्वार । सावन माह में हरिद्वार में लगने वाला कांवड मेला अगले महीने से शुरू होने जा रहा है । इस मेले में पुलिस की अग्नि परीक्षा का समय आ गया है । इस बार भीषण गर्मी होने के कारण कांवरियों की तादाद कई करोड़ में हो सकती है । सावन मास में हरिद्वार में लगने वाला कांवड़ मेला वैसे तो अगले माह 11 जुलाई से सावन शुरू होते ही शुरू हो जाएगा । और 23 जुलाई को भगवान भोलेनाथ के शिवालियों पर जलाभिषेक के बाद ही इस मेल पर विराम लगेगा । सावन भले ही 11 जुलाई से शुरू हो रहा हो लेकिन कांवरियों का 5 जुलाई से हरिद्वार आना शुरू हो जाएंगे । और 11 तारीख को सावन शुरू होने वाले दिन से ही कंवारिया कांवर उठाकर अपने-अपने नगरों और कस्बो की तरफ निकल पड़ेंगे। कई कई सौ किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा करने वाले यह कांवड़िए जिन में बच्चे ,बूढ़े, नौजवान, महिलाएं भी शामिल होते हैं । इनके लिए रास्ते में पड़ने वाले नगरों और कस्बों में सड़क किनारे लोग भंडारे लगाते हैं इनकी मालिश करने के लिए व इनके पैरों में पैदल चलते हुए पड़ जाने वाले छालों पर मरहम पट्टी करने के लिए लोग फ्री सेवा के लिए निकल पड़ते हैं । वहीं इस मेले में सबसे ज्यादा अग्नि परीक्षा होती है पुलिस की और यह भी अग्नि परीक्षा सबसे अधिक होती है हरिद्वार पुलिस की

हरिद्वार एसएसपी परमेन्द्र डोबाल , एसपी सिटी पंकज गैरोला इस कांवड मेले से भली भांति परिचित हैं ।क्योंकि यह दोनों ही अधिकारी पहले भी कांवड़ मेलों में डयूटियां दे चुके हैं और कांवड़ मेलों में आने वाली भीड़ से भी अनभिज्ञ नही है। इसलिए इनको कांवड़ मेले की हर स्थिति का पता है । जो नए अधिकारी या कर्मचारी हरिद्वार में आए हैं उन्हें कांवड़ मेले की स्थिति का बहुत ज्यादा ज्ञान या आभास नहीं होगा । इस मेले को विश्व का सबसे बड़ा मेला कहा जा सकता है। कावड़ मेले की 15 दिन तक लगातार निरंतर 24 घंटे दिन रात चलने वाली इस यात्रा को ही शिव भक्ति में लीन कांवड़ियों की यात्रा कहते हैं। गंगा और शिव का अटूट बंधन है हरिद्वार से तो सभी शिव भक्त गंगा जल लेकर अपने-अपने नगरों कस्बों के शिवालयों में शिवरात्रि को 23 जुलाई को भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे। लेकिन कुछ कांवरिये गोमुख तक से गंगाजल लेकर आते हैं और अपने आराध्य शिव को यह जल अर्पित करते हैं सड़क किनारे जहां स्थान मिलता है वही लेट जाते हैं वही खाना बनाते हैं ।

डाक कांवड़ यह अपने साथ जो ट्रक लेकर आते हैं उन ट्रैकों में पूरा सामान अपना खाना बनाने का और हलवाई लेकर आते हैं और जहां स्थान मिलता है वही अपना डेरा जमा लेते हैं और वही अपना भोजन बनाते है।ये डांक कांवड़ घण्टो के हिसाब से चलती है।इसमें आने वाले कावड़ये दौड कर अपनी यात्रा पूरी करते है।हालांकि डांक कांवड़ का कोई विधान नही है।लेकिन भोले के दीवाने जो चलन निकाल ले वो कम ही है। इस मेले को समझने के लिए कई बार ट्रेनिं आईएएस आईपीएस भी भेजे जाते हैं। जो इस मेले को देखकर दंग रह जाते हैं मेले में आने वाले शिव भक्त तरह-तरह के करतब दिखाते हैं युवा शिव भक्त भोले की बूटी भांग की जगह चरस की चिलम लगाने में अपने आप को गौरवान्वित महसूस करते हैं। जबकि किसी भी तरीके का नशा करना इस यात्रा में वर्जित रहता है ।और कहीं भी यही यह नहीं लिखा है कि भगवान भोलेनाथ नशा करने से प्रसन्न होते हैं इसलिए जो भी शिव भक्त यहां आए वह किसी तरीके का नशा न करें और शांतिपूर्वक यहां से गंगाजल ले जाकर अपने-अपने नगरों और कस्बों के शिवालियों में जाकर शिव मंदिर भोलेनाथ का जलाभिषेक करे। तभी भगवान भोलेनाथ प्रसन्न होंगे पुलिस के लिए यह मेल एक तरीके से बहुत ही कठिन परिश्रम का मेला होता है ।

खासकर महिला पुलिसकर्मियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है क्योंकि उनके साथ बहुत सारी निजी परेशानिय भी होती है लेकिन चिलचिलाती गर्मी तपती धूप में दिन रात ड्यूटी करना इनके लिए शिव आराधना से कम नहीं है। शांतिपूर्वक ड्यूटी निभाते हुए इन शिव भक्तों को अपने-अपने गंतव्य स्थान को भेजना ही उनकी ड्यूटी को सार्थक बनाता है । जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक परमेंद्र सिंह डबराल व एसपी सिटी पंकज गैरोला बखूबी समझते हैं और हम मानते हैं कि यह दोनों ही अधिकारी अपने स्टाफ को इसी तरीके की सीख देंगे कि वह कावरियों के साथ शांतिपूर्वक व सौहार्द पूर्ण तरीके से पेश आए और उनको पवित्र गंगाजल हरिद्वार से ले जाने में उनकी मदद करें ।किसी तरीके का भी आक्रोश ना करें और ना ही कांवरिये के साथ किसी प्रकार का बल प्रयोग करें। जो कांवरिये नशा करते हैं उनको भी नशे से दूर रहने की सलाह दें ।क्योंकि भगवान भोलेनाथ किसी तरीके का नशा करने से प्रसन्न नहीं होते हैं ।वे केवल गंगाजल और बेलपत्र चढ़ाने मात्र से ही प्रसन्न हो जाते हैं। इसलिए नशा करना उचित नहीं है।

इस मेले के दौरान भोजन दुकानदारों को चाहिए कि वह अपने होटल के बाहर बड़े-बड़े अक्षरों में रेट लिस्ट लगाएऔर अपने भोजनालयों के रेट इस तरह रख के कांवरियों को यह ना लगे के हरिद्वार में उनको भोजन खिलाने के नाम पर लूटा जा रहा है यह कार्य भी इन हरिद्वार के होटल व्यवसाईयों के लिए पुनीत कार्य होगा । शिव भक्त कांवरियों के प्रति अपनी लागत का मुनाफा जरूर कमाए लेकिन ऐसा मुनाफा भी न कमाए जो कांवरियों को या आम जनमानस को लगे कि यह खाल उतारने वाले रेट लगा दिए है। जिस तरह से आम रेट लिस्ट होती है कि ₹200 की दाल और ₹200 की सब्जी और ₹20 की रोटी यह सब न करते हुए कावड़ियों को सस्ता भोजन कराएं । और भगवान भोलेनाथ के साथ-साथ इन शिव भक्तों का भी आशीर्वाद प्राप्त करें। कमाई के बहुत अन्य रास्ते भी होते हैं और पूरा साल कमाई के लिए पड़ा रहता है । लेकिन यह मौका शिव भक्तों की सेवा का है । उनकी सेवा करें जिससे आपको भी भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त हो।

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