

हरिद्वार ।
हरिद्वार में रहने वाला शायद कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो स्वर्गीय पारस कुमार जैन के नाम को न जानता हो। उत्तराखंड बनने से पूर्व भी जब पारस कुमार जैन लखनऊ सचिवालय में जाया करते थे तो सचिवालय के सारे निचले स्तर के कर्मचारी जो फोर्थ क्लॉस कर्मचारी हुआ करते थे । खुश हो जाया करते थे। तुरंत पूरे सचिवालय में यह बात फैल जाया करती थी कि पारस कुमार जैन साहब आए हुए हैं। क्योंकि जैन साहब जब जाते थे तो अपने सफारी सूट की जेब मे नोटों की एक गाड़ी रखते थे और गरीब कर्मचारियों को वह वहां पर रुपये वितरित किया करते थे। लोग उनका बड़ा सम्मान करते थे । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पारस कुमार जैन के घर , पर केवल स्वर्गीय इंदिरा गांधी व राजीव गांधी को छोड़कर शायद ही कोई ऐसा नेता होगा या वर्तमान में सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी ,व राहुल गाँधी को छोड दिया तो कोई ऐसा नेता होगा जो पारस कुमार जैन के देश रक्षक औषधि स्थित निवास पर ना पहुंचा हो और वहां पर उसका बाकायदा सम्मान खातिरदारी ना हुई हो खातिरदारी में जैन साहब का पूरा परिवार लगा रहता था । भोजन कराने से लेकर नाश्ता कराने तक की व्यवस्था जैन साहब की पत्नी स्वर्गीय मीना जैन स्वयं देखती थी और मीना जैन स्वयं अपने हाथो से और अपनी पुत्रवधुओं के हाथ से आने वाले मेहमान को भोजन कराया करती थी ऐसे देवता स्वरूप इंसान जो गरीबों के मशीहा थे। उनके दरवाजे से कोई खाली हाथ नही जाता था ।जब एक बार जैन साहब हरिद्वार नगर पालिका के अध्यक्ष बने। नगर पालिका कर्मचारियों की तनख्वाह बांटने के समय संकट आने पर अपनी जेब से नगर पालिका के कर्मचारियों को तनख्वाह दी थी। ऐसे पारस कुमार जैन जिनकी दूदा धारी
चौक के पास जमीन काफी समय से पड़ी हुई है थी ।उन्होंने इस जमीन को मेला लैंड से छुड़ाने के लिए काफी प्रयास किए थे पारस कुमार जैन नेतागिरी के बल पर या राजनीति के बल पर यह प्रयास या अपने काम नहीं कराया करते थे। वह चाहे कोई कैसा भी अधिकारी हो उसका हक कभी नहीं मारते थे यही कारण था कि पारस कुमार जैन जी का कभी कोई काम नहीं रूकता था उनका काम निर्विघ्न रूप से हो जाया करता था। क्योंकि वह एक बहुत ही व्यवहारिक व्यक्ति थे उनके थोड़े बहुत गुण उनके पुत्र तोष कुमार जैन में तो जरूर हैं बाकी अन्य दोनों एक पुत्र मनोज जैन इस समय स्वर्गवासी हो गए हैं व ललित जैन भी अपना कोई कार्य करते है। पारस कुमार जैन जी भी इस जमीन को मेला लैंड से मुक्त नहीं करा सके थे मेला लैंड से जमीन मुक्त कराने के लिए बहुत लंबी प्रक्रिया होती है। मेला लैंड को छुड़ाने के लिए जिस व्यक्ति के नाम जमीन होती है उस व्यक्ति को हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण को एक प्रार्थना पत्र देना होता है और वह इस प्रार्थना पत्र को हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण को अपनी भूमि के प्रति आवश्यकता बताते हुए उसे प्रार्थना पत्र को वहां देता है ।यह प्रार्थनापत्र पूरे हरिद्वार विकास प्राधिकरण बोर्ड के सामने रखना होता है और बोर्ड से इसका प्रस्ताव पास होकर नगर विकास मंत्रालय को भेजा जाता है और नगर विकास मंत्रालय से भी अगर प्रस्ताव पास हो जाता है तब उसके बाद शासन को उस प्रस्ताव को भेजा जाता है जिसमें कैबिनेट बैठक उस प्रस्ताव को पास करती है । यह एक बहुत लंबी प्रक्रिया है। यह फाइल कहीं ना कहीं अटक जाती है ।यही कारण शायद पारस कुमार जैन जी के साथ भी रहा होगा अन्यथा पारस कुमार जैन जी ने कोई कमी नहीं छोड़ी थी की यह जमीन उनकी मेल लैंड से मुक्त हो जाए ।अब इस जमीन की बिक्री की बात आई है । उनके पुत्र तोष कुमार जैन ने यह जमीन बेची है तो किस आधार पर बेच दी है और खरीदने वाले ने किस आधार पर खरीद ली है क्योंकि मेला लैंड से भूमि को छुड़ाना कोई आसान कार्य नहीं है।तोष कुमार जैन से इस प्रकरण पर बात करने के लिए कई बार उनके नम्बर पर फोन किया गया।लेकिन उनसे बात नही हो सकी।

उधर जिला अधिकारी कमरेंद्र सिंह ने भूखण्ड पर किये गए निर्माण को ध्वस्त करने के आदेश दे दिये है।भूखण्ड से निर्माण को एस डी एम के नेतृत्व में कुछ झोपड़ियों को ध्वस्त कर दिया गया है।बाउंड्री को हटाने के लिए दो दिन का समय दिया गया है।

