

हरिद्वार।
हरिद्वार में राजनीतिक गठजोड़ व भूमि माफिया की जोड़ी अब कुंभ मेला लैंड को भी ठिकाने लगाने पर आमादा हो गई है। हरिद्वार के दूधाधारी चौराहे के निकट विशाल भूखंड जो नगर के पूर्व पालिका अध्यक्ष व कांग्रेसी नेता पारस कुमार जैन का हुआ करता था उस लैंड को मेला लैंड से निकलवाने के लिए पारस कुमार जैन ने अपने जीते जी एड़ी चोटी के जोर लगाए थे लेकिन करोड़ों के इस भूखंड को वह मेला लैंड से मुक्त नहीं करा पाए थे। अब पारस कुमार जैन की मृत्यु के बाद यह भूखण्ड उनके पुत्र तोश कुमार जैन के नाम पर है । चर्चा है की गेरुआ वस्त्र धारी नेताजी ने जिनके नाम से ही जिले के अधिकारी काँपने लगते हैं उन्होंने इस खेल को करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और यह करोडो का भूखण्ड करीब 200 करोड रुपए में गाजियाबाद की एक पार्टी को बेच भी दिया गया है इस भूखंड पर बाकायदा चारदीवारी की जा रही है जो की किसी भी नियम के हिसाब से वहां चार दिवारी नहीं की जा सकती क्योंकि वह भूमी मेला लैंड है और मेला लैंड पर किसी भी प्रकार का कोई भी निर्माण नहीं हो सकता है वर्तमान में मेला अधिकारी कमरेंद्र सिंह के अनुसार भी मेला लैंड पर किसी तरीके का भी कोई निर्माण नहीं हो सकता है और यदि कोई इस तरह के निर्माण कर रहा है तो वह इसको दिखाएंगे।

कमरेंद सिंह के अनुसार एस डी एम को जांच के लिए भेजेंगे। अब हालात यह है की गाजियाबाद की पार्टी से ऐसी चर्चा है कि भूखंड बेचने की एवज में मोटी रकम भी एडवांस में ले ली गई है जो करोड़ों में बताई जा रही है


। भूखंड स्वामी जो कि स्वर्गीय पारस कुमार जैन जी के पुत्र हैं तोष कुमार जैन उनके पल्ले भी क्या कुछ पड़ने वाला है इस भारी भरकम धन्नाशी में से यह तो पता नहीं लेकिन यह ज्यादातर माल गेरुआ वस्त्र धारी नेताजी पी जाएंगे और गेरुआ वस्त्र धारी नेताजी इसी काम में हरिद्वार में लगे हुए हैं क्योंकि जिले के आला अफसर हो या छोटे अफसर हो किसी की हिम्मत नहीं है की जो इन गेरुआ वस्त्र धारी नेताजी के हुकुम को टालने का साहस कर सके अब देखना यह है कि यह भूखण्ड मेला भूखंड ही रहता है या यहां पर कोई बहु मंजली इमारत बनकर तैयार हो जाएगी। उधर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त राज्य बनाने की दुहाई देते हैं। ऐसे में यह राज्य किस तरह से भ्रष्टाचार मुक्त राज्य बन सकेगा।कह पाना कठिन है।

