29 Mar 2026, Sun
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कुर्वे साहब आप इन लेडी सिंघम मैडम के प्रकरण की जांच करवा दीजिए ,यह अपने को ईमानदार बताती हैं, और फार्मा कंपनी से जुड़े कुछ लोग इनको भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा बताते हैं, इनकी आमदनी भी बहुत मोटी बताई जाती है, तो इसको तो दूध का दूध और पानी का पानी आप ही कर सकते हैं।

हरिद्वार । एक नेता जी की माने तो करोड़ से अधिक का सुविधा शुल्क मिलता है, लेडी सिंघम को ,लेडी सिंघम काफी लंबे समय से हरिद्वार में ही जमी हुईं है ,बिना पैसा लिए कोई कार्य नहीं करती हैं ।

हरिद्वार को पूरे राज्य की फार्मा कंपनियों की हब कहा जाता है। फार्मा कंपनियां की तादाद यूं तो कोई बताने वाला नहीं है लेकिन फिर भी एक अनुमान के अनुसार हरिद्वार के सिडकुल व भगवानपुर को मिलाकर करीब 100 से अधिक फार्मा कंपनिया यहां मौजूद है, इन कंपनियों पर यदा-कदा कभी ड्रग विभाग का कोई अधिकारी या कर्मचारी निरीक्षण करने के लिए चला जाता हो तो पता नहीं अन्यथा किसी को वहां जाने की आवश्यकता ही नहीं है ।क्योंकि फार्मा कंपनी के लोग खुद ही लेडि सिंघम के दरबार में हाजरी लगाने चले आते हैं ।

एक फार्मा कंपनी से यदि 50 हजार रुपए का सुविधा शुल्क भी प्रति माह के हिसाब से जोड़ा जाए तो आप आसानी से इसकी गुणा भाग करके आराम से जोड़ सकते है, साथ ही जनपद में करीब 3 हजार मेडिकल स्टोर है। साथ ही फार्मा कम्पनियों के लाइसेंस का काम भी होता है।आप इन सबका हीसाब जोड़ने पर करोड़ से ऊपर पहुंच जाएंगे। जिन फार्मा कंपनियों में दवा का निर्माण हो रहा है।उसकी गुणवत्ता क्या है क्या नही है। इसका भी कोई लेखा जोखा हरिद्वार में ड्रग विभाग के पास शायद ही हो।

नशीले कैप्सूल, इंजेक्शन भी बनते है जनपद की कुछ फार्मा कम्पनियों में,

हरिद्वार की कुछ फार्म कंपनियों में से ज्यादातर कंपनियों में नशीले कैप्सूल , नशीले इंजेक्शन व डुप्लीकेट दवाइयां भी बनती है। और रही भगवानपुर की बात वहां तो आप कुछ फार्मा कम्पनियों में कोई भी दवाई खुद जाकर बनवा सकते हैं। और चाहे जितनी दवा बनवा कर मार्केट में सप्लाई कर सकते है,

लेडी सिंघम के पास इन सबको देखने का समय ही नहीं है। अब आप सोच रहे होंगे की यह लेडी सिंघम कौन है ।भाई यह लेडी सिंघम कोई और नहीं ड्रग इंस्पेक्टर है ।और इन मैडम को यह उपाधि हमारे हरिद्वार के कुछ पत्रकारों द्वारा ही दी गई है। पत्रकारों से लेडी सिंघम का काफी प्रेम है । जो उन्हें लेडी सिंघम के नाम से और जाने किस किस नाम की उपाधियो से अलंकृत करते रहते है। सुबह से लेकर शाम तक मैडम के कार्यालय में बैठकर उनके गुणगान करना और उनकी शान में कसीदे गणना शुरू करते हैं। तो फिर रुकते ही नहीं ।मैडम को भी अपनी तारीफ सुनने का और अखबारों में छपने का काफी शौक है।

मैडम की फैक्ट्रियों में बन रही दवाओं की गुणवत्ता जांचने में कोई रुचि नही है।

मैडम फैक्ट्री में छापे मारने में विश्वास नहीं रखती यह छापेमारी अगर होती भी है तो ग्रामीण क्षेत्र के कुछ ऐसे मेडिकल स्टोर पर होती है जहां पुलिस छापा मारती है। की यहां पर नशीली दवाइयां बिकती हैं और यह माल मेडिकल स्टोर से पुलिस बरामद करती है ।और मैडम को बुलवाकर उसकी तहकीकात कराई जाती है। तो मैडम का भी बोल वाला हो जाता है ।मैडम भी अपना नाम उस छापेमारी में सबसे पहले अंकित करवाती हैं। की उनके नेतृत्व में छापा पड़ा। अब पुलिस वाले भी बेचारे चुप हो जाते हैं। क्या करें उनका भी तो मैडम ही ख्याल रखती होगी ।अन्यथा पुलिस वाले चुप क्यों रहेंगे।

मैडम अनिता भारती अपने को निर्दोश व ईमानदार बताती है।

मैडम का कहना है की वह बिल्कुल निर्दोष है। किसी तरीके का भी वे कोई सुविधा शुल्क या किसी तरीके की भी कोई रिश्वत किसी से नहीं लेती हैं। जो लोग भी उनके ऊपर आरोप लगाते हैं वे सब निराधार हैं। और वह एक ईमानदार अधिकारी हैं ,इस बात में उनकी दम भी हो सकता है। यह कोई जरूरी नहीं की जो लोग उनके ऊपर आरोप लगा रहे हो उन आरोपों में कोई दम ही हो, लेकिन अभी जो एक फार्मा कंपनी के प्रतिनिधि ने और एक युवक कांग्रेस के नेताजी ने प्रेस क्लब में प्रेस कर उनके ऊपर स प्रमाण आरोप लगाए हैं उनको भी वे नकार रही हैं ,मैडम का कहना है यह प्रकरण रिश्वतखोरी का नहीं है।

यह प्रकरण एक स्टेशनरी वाले से जुड़ा प्रकरण है । हो सकता है मैडम की बात में भी वजन हो लेकिन एक चीज समझ में नहीं आती है, अगर मैडम रिश्वत नहीं लेती हैं ,और मैडम ईमानदार हैं तो फिर इन फैक्ट्रियों की कभी जांच क्यों नहीं की जाती है। क्या यहाँ सारा काम सारी दवाइयां बिल्कुल शुद्ध रूप से बन रही है।

पिछले दिनों सिडकुल में बड़ी फार्मा कम्पनी पर बाहर से आई टीम ने चार दिन तक छान बीन की थी, लेकिन कुछ पता नही चला की छापा क्यों पड़ा था। सीटी अस्पताल के बाहर एक मेडिकल स्टोर वाले के घर व फैक्टरी पर बाहर से आईं टीम ने सुबह से लेकर शाम तक कागज खंगाले थे,उसका भी कुछ पता नही टीम क्यों आई थी और क्या करके गईं है।शायद मैडम अनिता भारती भी इसी लिए पचड़े में नही पड़ती होंगी की होना तो कुछ है नही इस लिये चुप चाप शान्ति से बैठे रहो, और जो आ रहा है उसको क्यो छोड़ा जाए।

हरिद्वार पुलिस ने एक फार्मा फैक्ट्री पर छापा मारा था, तो कई हजार नशीले कैप्सूल बरामद किए गए थे ,लेकिन शायद अपनी मैडम लेडी सिंघम उस फैक्ट्री पर छापा मारने से चूक गई थी, लेडी सिंघम ने भी दो एक बार फार्मा कंपनी में छापे मारे वहां भी तमाम अनियमितताएं मिली , मैडम ने उन फैक्ट्री वालों को हिदायत दी की इस तरीके से काम नहीं चलेगा।

अब लोगों ने उन सभी मेडिकल स्टोर वालों को और फार्मा कंपनी वालों को तलाशना शुरू कर दिया है ,जो मैडम के शिकार हो चुके हैं। धीरे-धीरे मैडम की संपत्ति की भी जांच करने की बातें उठने लगी है। लोगों का तो यह भी कहना है कि इतनी मोटी रकम प्रतिमाह मैडम अकेले तो नहीं डकार सकती ,इसमें से आधे से ज्यादा हिस्सा तो ऊपर भी देना पड़ता होगा ,अब ऊपर कौन है यह तो पता नहीं यह तो मैडम जानती होगी या वह नीली छतरी वाला ही जानता होगा ।

क्योंकि नीली छतरी वाला ही ऊपर रहता है, देहरादून में बैठे आला अफसर मैडम की तरफ बिल्कुल नहीं देखते हैं ।उन्हें तो बस अगर दिखाई देता होगा तो मैडम के द्वारा भिजवाया गया प्रसाद ही दिखाई देता होगा ।और प्रसाद ग्रहण करना कोई बुरी बात नहीं है प्रसाद तो कोई भी ग्रहण कर सकता है और कोई भी किसी को दे सकता है ।

अब सचिन कुर्वे है विभाग के सचिव, बहुत सुलझे हुए अधिकारी है, देखे मैडम की फाइल पर कब गौर करते है।

भाई अब विभाग के सचिव पद पर सचिन कुर्वे आ गए है, सचिन कुर्वे बड़े सख्त आईएएस अफसर है। एक-एक चीज को बारीकी से जानते हैं। इस लिए मैडम अब आपको सतर्क रहना होगा, नहीं तो मेरे हिसाब से तो जिस तरीके से मैं सचिन कुर्वे जी को जानता हूं, उस हिसाब से तो सचिन कुर्वे जी आपकी फ़ाइल देखने में देर नहीं लगाएंगे । क्योंकि सचिन कुर्वे जी का नाम बहुत ही सम्मान के साथ ब्यूरोक्रेसी में लिया जाता है।
मैडम के कुछ चहेते देहरादून के चक्कर भी लगा रहे, जो देहरादून जाकर मैडम को सत्यवादी हरिश्चंद्र की वंशज घोषित करने में लगे हुए है,

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