हरिद्वार। हरिद्वार के प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट की आज साय 4 बजे बैठक हो सकती है। यह बैठक जिला अधिकारी मयूर दीक्षित व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रेमेंद्र डोबाल के प्रयासों से पहली बार होने जा रही है। कोर्ट ने जब से इन दोनों अधिकारियों को ट्रस्ट का पदेन सदस्य बनाया है तब से लेकर आज तक कोई बैठक इस ट्रस्ट की नहीं हुई है ।

अगर कोई बैठक हुई भी होगी तो इस ट्रस्ट के अध्यक्ष रविंद्रपुरी व ट्रस्ट के सदस्य अनिल शर्मा व राजगिरी कर लिया करते होंगे। और एजेंट में क्या क्या प्रस्ताव पास किए जाते होंगे यह भी इन तीनों को ही पता होगा। लेकिन काफी शोर शराबा मचने और भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने इस ओर संज्ञान लेते हुए, आज बैठक बुलाई है ।

कई सालों में हुई मंदिर की सफाई, थालियों के स्थान पर रखे गये दान पात्र।
इस बैठक को बुलाने के बाद विगत कई वर्ष में मनसा देवी मंदिर की बहुत ही कायदे से साफ सफाई कल की गई है । थालियों में दान की धनराशि एकत्र करने की जगह दान पात्र पेटियां रख दी गई है। साफ सफाई के साथ ही वहां अब प्रसाद के रूप में जो श्रद्धालु नारियल लेकर आया करते थे उसमें से पानी का नारियल चार दिन से अब श्रद्धालुओं को वापस किया जाने लगा है। इससे पूर्व यह सारे नारियल चाहे वह सूखा नारियल हो या पानी वाला नारियल सब अनिल शर्मा जी के खाते में पहुंच जाया करते थे ।

जय भारत सिंह तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट हरिद्वार
अनिल शर्मा ही मंशा देवी ट्रस्ट के कर्ता धर्ता है।
अनिल शर्मा जी इस ट्रस्ट के ट्रस्टी हैं और सारा कार्य मनसा देवी ट्रस्ट का अनिल शर्मा ही देखते हैं अनिल शर्मा के बारे में बताया जाता है कि पहले यह छोटा-मोटा काम किया करते थे कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि यह पहले थ्री व्हीलर चलाया करते थे लेकिन हमारे पास इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि यह थ्री व्हीलर चलाते थे, लेकिन इतना जरूर लोग बताते हैं की अनिल शर्मा पहले बहुत छोटे-छोटे काम किया करते थे। लेकिन जब से मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी बने हैं तब से इनके दिन फिर गए हैं। और यह धीरे-धीरे करोड़पति बनते चले गए हैं यह सारा माल मां मनसा देवी मंदिर के दरबार में चढ़ने वाले प्रसाद से ही प्राप्त हुआ है।अनिल शर्मा ने अध्यक्ष जी को अपनी गिरफ्त में ले रखा है अध्यक्ष जी कभी मनसा देवी मंदिर नहीं जाते हैं, हफ्ते में एक बार अनिल शर्मा जी ही वहां चढ़ने वाली धनराशि व अन्य सोना चांदी जो भी हो व अध्यक्ष जी के पास अखाड़े में ही पहुंचा आते हैं। इस पैसे की व सोने चांदी की किसी भी तरीके की कोई लिखा पड़ी होती हो तो यह अध्यक्ष जी को पता होगा या अनिल शर्मा जी को पता होगा।

जय भारत सिंह ने सी सी टी वी कैमरे की निगरानी में दान पेटियां खोलने को कहा था।लेकिन ऐसा नही हुआ।
वर्ष 2015 दिसंबर में हरिद्वार सिटी मजिस्ट्रेट के रूप में आए जय भारत सिंह ने इस मनसा देवी मंदिर की कारगुजारियों की परते खोलनी शुरू की थी। जय भारत सिंह ने इस ट्रस्ट की श्रवणनाथ नगर हरिद्वार की धर्मशाला में लड़कियों के रहने पर भी रोक लगाई थी। इस धर्मशाला को लड़कियों का हॉस्टिल बना दिया गया था। साथ ही जय भारत सिंह ने यह कहा था कि जो भी दान की धनराशि की पेटी खुलेगी, या दान पात्र खुलेगा चाहे वह सोना चांदी आभूषण किसी भी तरीके की गिनती हो इन सब चीजों की गिनती सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में होगी ।लेकिन आज तक वह भी नहीं हुआ है। इसके पीछे कारण यह रहा की 2017 में जय भारत सिंह का स्थानांतरण हो गया और जय भारत सिंह के स्थानांतरण हो जाने के बाद,मंशा देवी पर खिलाड़ियों का खेल बदस्तूर जारी हो गया। जय भारत सिंह ने तो यहां तक पाया था की यह ट्रस्ट एक महिला के नाम था जो ट्रस्ट 1971 में बना था। उसके बाद इस ट्रस्ट में कुछ लोग अकारण कहां से चले आए कैसे चले आए कैसे उन्होंने इस ट्रस्ट को अपने कब्जे में ले लिया और ना ही कोई इसका आज तक नवीनीकरण हुआ है। तो उन्होंने तो अपनी चार पेज की रिपोर्ट में वर्तमान ट्रस्ट को सन्देहप्रद पाया था।

जय भारत सिंह ने जांच में वर्तमान ट्रस्ट को सन्देहप्रद पाया था।
वर्ष 2017 के तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट जय भारत सिंह ने अपनी चार पेज की रिपोर्ट में वर्तमान ट्रस्ट को सन्देहप्रद पाया था । ये है चार पेज की जय भारत सिंह की रिपोर्ट ।
सन्देहप्रद बताओ या सही बताओ कोई फर्क नही पड़ता।
हाई कोर्ट भी कुछ कहले चाहे सुप्रीम कोर्ट कुछ कह ले इन तीन ट्रस्टियों की सेहत पर कोई फर्क नही पड़ता ना ही किसी अधिकारी की कोई रिपोर्ट मायने रखती है। निचले स्तर पर ज्यादा दबाव पड़ने पर पैसा फेंको और तमाशा देखो हर चीज को पैसे से खरीद लिया जाता है। क्योंकि पैसा इनका अपना नहीं है ।मां मनसा देवी के दरबार में जो चढ़ावा आता है यह करोड़ों रुपए महीना का चढ़ावा है ।और इस चढ़ावे को ही ठिकाने लगाया जाता है ।चाहे जितना बांट दो चाहे जितना खर्च कर लो चाहे जो कर लो कोई ना पूछने वाला है ना कोई बताने वाला है।

बताया जाता है कि अनिल शर्मा जी नारियल और चुन्नी का कारोबार करने की एवज में ट्रस्ट को 15 से 20 लख रुपए देते हैं जबकि यह कारोबार करोड़ों रुपए महीने का कारोबार है क्योंकि कम से कम 10 हजार श्रद्धालु तो यहां रोज आ ही जाते हैं। जो की नारियल चढ़ाते हैं। और एक नारियल सभी जानते हैं 40 से ₹50 का है और यही नारियल नीचे से ऊपर तक घूमते रहते है। एक ही नारियल चार-चार महीने तक माता रानी के दरबार में आता रहता है चढ़ता रहता है ,आता रहता है चढ़ता रहता है, यह कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है इनको ना देवी माँ का डर है ना इन्हें किसी चीज का डर है ।

अध्यक्ष जी मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट
इन्हें तो केवल चाहिए तो दौलत चाहिए । अगर आज की बैठक में जिलाधिकारी और एसएसपी ने मामले को गहराइयों तक कुरेद लिया और जय भारत सिंह की उस समय की रिपोर्ट को संज्ञान में ले लिया और उस रिपोर्ट पर जांच कराई गई तो , चाहे वह ट्रस्ट के अध्यक्ष जी हो चाहे अन्य दो सदस्य हो इन तीनो का तो पसीने पसीने हो जाना लगभग तय है , कहते है भगवान के घर देर है अंधेर नही। शायद माता रानी ने जिलाधिकारी मयूर दीक्षित व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र डोबाल को इस पुनीत कार्य के लिए भेज दिया है। लेकिन इतना तय है ,तिकडमी अपनी तिकड़मों से बाज नही आयेंगे।

