हरिद्वार नगर निगम के पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी द्वारा शहर का कचरा डालने के लिए खरीदी गई सराय स्थित 35 बीघा भूमि जिसकी कीमत 56 करोड रुपए अदा की गई है यह प्रकरण शायद कभी खुलता ही नहीं क्योंकि यह प्रकरण भूमि की रजिस्ट्री होने के 5 महीने तक दबा रहा । इस भूमी की दो रजिस्टरी 11 , 11 , 2024 को व एक रजिस्टरी 29 , 11 , 24 को हुई उसके बाद नगर निगम में इस 56 करोड़ के घोटाले को लेकर दबी जुबान में कर्मचारियों में भी चर्चा होने लगी और यह चर्चा धीरे-धीरे नगर निगम के चुनाव से पहले ही चुनाव लड़ रहे भाजपा के कुछ पार्षद प्रत्याशियों तक भी पहुंच गई चुनाव होने के बाद नगर निगम में मेयर भी बीजेपी की बनी और बोर्ड में पार्षद भी सबसे ज्यादा बीजेपी के ही आए इसलिए बोर्ड में पूरा आधिपत्य बीजेपी का हो गया तत्कालीन नगर आयुक्त अपना ट्रांसफर होने पर देहरादून सचिवालय में जाकर आराम से बैठ गए।

लेकिन 21 मार्च को नए युवा I A S नन्दनकुमार ने हरिद्वार नगर निगम के नगर आयुक्त का पदभार ग्रहण कर लिया उसके बाद 2 अप्रैल को बोर्ड की बैठक में इस 56 करोड़ की डील के अनुमोदन के लिए वर्तमान नगर आयुक्त नन्दनकुमार ने जैसे ही यह प्रस्ताव रखा तुरंत ही सारे पार्षद उखड़ गए और उन्होंने इस डील की इस भूमि खरीद की जांच की मांग की क्योंकि नगर निगम में जितने भी पार्षद हैं चाहे वह बीजेपी के हो चाहे वह किसी अन्य दल के हो ज्यादातर प्रॉपर्टी का कारोबार करते हैं और उनको शहर की हर प्रॉपर्टी के बारे में जानकारी है कि किस जमीन की क्या कीमत है । इस जमीन का मालिक जितेंद्र काफी समय से इस भूमी को बेचता घूम रहा था काफी पार्षदों के पास भी गया था कई प्रॉपर्टी डीलरों के पास भी गया था लेकिन जमीन केवल इसलिए नहीं बिक रही थी कि यह नगर का जो कचरा डंप था उसके बराबर में उससे सटी हुई है।

अगर वर्तमान नगर आयुक्त इस प्रकरण को अनुमोदन के लिए बोर्ड की बैठक में न रखते तो शायद यह प्रकरण कभी खुलता ही नहीं और शहर की जनता के सामने भी नहीं आता लेकिन एक आईएएस वरुण चौधरी का खेल युवा I A S नन्दन कुमार ने ही अपना कर्तव्य निभाते हुए खराब कर दिया। अब नगर निगम की मेयर किरण जैसल को इस प्रकरण की जांच के आदेश देने पड़े साथ ही प्रशासन को अवगत कराने व कोर्ट जाने तक की बात उनको कहनी पड़ी उसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए तत्काल इसकी जांच के आदेश दिए और जांच वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रणवीर चौहान जिनको काफी सुलझा हुआ अधिकारी माना जाता है उनको सोपी गई और वह इसकी जांच कर रहे हैं और जांच शीघ्र पूरी होने के बाद मान्य मुख्यमंत्री को जांच रिपोर्ट सौपी जायगी ।
नगर निगम के कई पार्षद मुख्यमंत्री द्वारा इस प्रकरण की जांच कराए जाने को लेकर मुख्यमंत्री की प्रशंसा कर रहे हैं । इस घोटाले की जांच कराने से मुख्यमंत्री का राजनीतिक ग्राफ भी तेजी से बढ़ा है क्योंकि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री उत्तराखंड के विकास के लिए हमेशा चिंतित रहते हैं और कुछ ना कुछ नई-नई योजनाएं उत्तराखंड के लिए दिल्ली से लाकर उत्तराखंड को सौंपते हैं। जिससे उत्तराखंड का और अधिक विकास हो सके।

