12 Feb 2026, Thu

एक जमाने में हरिद्वार के परमार्थ निकेतन के स्वामी चिन्मयानंद जो भारत के गृह राज्य मंत्री हुआ करते थे, आज एकांतवास में पड़े दिखाई देते हैं ।स्वामी जी की बेहद सुंदर एक शिस्या ने स्वामी जी का रुतबा मिट्टी में मिला दिया ।

हरिद्वार। इसके पीछे महिला शिष्या ही थी, जिससे स्वामी जी शराब से मालिश कराया करते थे। और न जाने क्या क्या किया करते थे।

स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई जी की सरकार में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री रह चुके स्वामी चिन्मयानंद का एक जमाने में जलवा हुआ करता था।

स्वामी चिन्मयानंद के चरणों में अशोक सिंघल हो या संघ के आला पदाधिकारी हो या फिर भाजपा के शीर्ष नेता हो सभी स्वामी जी को दंडवत प्रणाम किया करते थे। और अधिकारियों की तो बात ही छोड़ दें, अधिकारी तो स्वामी चिन्मयानंद के चरण स्पर्श कर अपने को धन्य समझ लिया करते थे ।

शौकीन मिजाज स्वामी जी को उनकी अय्याशी ले डूबी।

स्वामी चिन्मयानंद ठाकुर होने के कारण उनमें बहुत ही खास किस्म के शौक थे ।उनकी एक महिला शिष्या थी इस महिला शिष्या से स्वामी जी शराब से मालिश कराया करते थे साथ-साथ और क्या-क्या किया करते थे यह तो स्वामी जी और वह महिला ही जानती होगी लेकिन स्वामी जी को इस महिला के साथ रंगरलियां मनाने के आरोप में जेल जाना पड़ा था। और जेल जाने के बाद से स्वामी चिन्मयानंद जी का कोई नाम लेवा भी इस समय मौजूद नहीं है।

स्वामी चिन्मयानंद जी ने अपने गृह राज्य मंत्री रहते अपने रुतबे के चलते अपने आश्रम के सामने गंगा किनारे करोडों रुपए की संपत्ति कब्जा कर वहां घाट भी बना लिया था। जहाँ बाकायदा एक रूम बनाया था और एक शिव मंदिर की स्थापना की थी। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की इस जमीन पर स्वामी जी ने बाकायदा गंगा किनारे पक्का निर्माण कर जमीन को कब्जा लिया था।

उस समय किसकी हिम्मत थी जो स्वामी चिन्मयानंद जी के सामने बोल सके। लेकिन आज हालात बदल गए हैं ।आज स्वामी जी की तरफ देखने वाला भी कोई नहीं है ।अब ना तो स्वामी जी को संघ के लोग जाते हैं ,न विश्व हिंदू परिषद के लोग जाते हैं, और बीजेपी के लोगों ने तो बिल्कुल ही किनारा कर लिया है ।स्वामी जी को काफी समझाया गया था। की इस महिला से आप किनारा कर ले और जो कुछ लेना देना हो इस महिला को ले देकर इससे पिंड छुड़ा लें।

लेकिन स्वामी जी तो स्वामी जी थे ।वह चमड़ी चली जाए दमड़ी ना जाए वाली कहावत को चरितार्थ किया करते थे ।और इस कहावत के चलते स्वामी जी चक्कर में फंस गए। जेल तो जाना ही पड़ा समाज के अंदर फजीता और हुआ। तो महिलाओं संग संपर्क रखने वाले नेता हो या अधिकारी हो या हो साधु संत सबके कभी ना कभी दुर्दिन आते ही है।

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