हरिद्वार। राशन माफिया कमल के फूल को हाथ में लेकर अब कर रहा है राशन की कालाबाजारी, एक पूर्ति निरीक्षक के लिए करता है, यह राशन माफिया राशन विक्रेताओं से उगाई,
हरिद्वार में राशन माफियाओं के मुंह कालाबाजारी के जरिए होने वाली मोटी आमदनी का खून इस कदर लग गया है। की ये माफिया किसी भी क़ीमत पर इस धंदे को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। इस समय वर्तमान में हरिद्वार नगर में तीन राशन माफिया काम कर रहे हैं। जबकि एक राशन माफिया जिसको डॉन कहा जाता है जिसका नाम योगी है। वह इन तीनों को पीछे से सपोर्ट करता है ज्यादातर पैसा इस कारोबार में योगी का ही लगा हुआ है। और योगी को राशन की कालाबाजारी के मुनाफे का आधा हिस्सा मिलता है ।जबकिआधे में तीन राशन माफिया शामिल है। एक ज्वालापुर का एक भेल का और एक कनखल का राशन माफिया शामिल है। जबकी लालढांग में योगी का एक छत्र राज है।

दुकान पर छापा ,दुकान बंद मिली और दुकानदार बराबर की दुकान पर बैठा परचून का सामान बेच रहा था।रस्म अदायगी हुई और काम खत्म।
अभी हाल ही में कनखल वाले राशन माफिया ने कमल का फूल पकड़ कर राशन की कालाबाजारी करनी शुरू की है इसको किसी ने बता दिया था ।की कालाबाजारी करनी है तो कमल का फूल पकड़ लो, और इस राशन माफिया ने आनन फानन में कमल का फूल पकड़ कर काम चालू कर दिया है
इस राशन माफिया की कभी दुकान खुलती हुए किसी ने नहीं देखी , सुनने में आया है की अभी पिछले 15 दिन पहले इसकी दुकान बन्द रहने की किसी ने उच्च अधिकारियों को शिकायत की थी ।जांच के लिए एक छोटे स्तर का अधिकारी इसकी दुकान पर पहुंचा था। उस समय भी इसकी दुकान बंद थी, और दुकान के मालिक साहब बाकायदा अपनी पड़ोस की दुकान पर विराजमान थे, जैसे ही उनको पता चला की दुकान की कोई जांच करने के लिए आया है । उन्होंने उक्त जांच करने आए कर्मचारी को बताया की दुकान की चाबी नहीं है, चाबी मेरे बेटे के पास रहती है। हम तो शाम को दुकान खोलते हैं जबकि ना तो कभी सुबह दुकान खोली न कभी शाम को दुकान खुली ।

दुकान उससे अगले दिन से खुलनी शुरू हुई है, जिस दिन वह अधिकारी इन महोदय की दुकान की चेकिंग के लिए पहुंचा था।
अधिकारी का आदर सत्कार कर उसको विदा कर दिया गया।
चेकिंग करने गए साहब के सामने दो राशन खरीदार भी पेश कर दिए गए की हमें दुकानदार से कोई शिकायत नही है हमे समय पर राशन मिलता है।मानो इन दोनों उपभोक्ताओं को पहले से ही पता हो की हमे गवाही देने जाना है। उपभोक्ताओं के बयान भी करा दिए गए। अब इन दोनों राशन उपभोक्ताओं को कौन ढूंढता फिरेगा की यह कौन थे कहां के थे। क्योंकि दुकान तो कभी खुली मिली ही नहीं, लेकिन जाते-जाते सरकारी कर्मचारियों को जिस तरीके से विदा करने की हमारे यहां परंपरा है ,उसकी विदाई भी ठीक उसी तरह की गई, और उक्त साहब भी प्रसन्न और राशन विक्रेता भी प्रसन्न।

सतेंद्र ,राशन माफिया योगी के कारण हुआ था शिकार, कोई राशन दुकानदारों का नेता नही बोलता योगी के खिलाफ
बेटा गगन करता है पूर्ति निरीक्षक के लिए राशन विक्रेताओं से उगाही , ये हम नही कह रहे है,ये कहना है, राशन विक्रेताओं के ही दो नेताओ व एक राशन दुकानदार का।
इन जनाब का पुत्र गगन एक पूर्ति निरीक्षक के लिए राशन विक्रेताओं से प्रतिमा उगाई भी करके उस पूर्ति निरीक्षक को सौंपता हैं, जिसकी एवज में पूर्ति निरीक्षक भी इसके सभी कारनामों को नजर अंदाज करता है।यह हम नही कह रहे है, ये बात राशन विक्रेताओं के 30 वर्षों से अध्यक्ष चले आ रहे एक नेता जी व एक नेता जी जो बहदराबाद ब्लॉक के अध्यक्ष है दिनेश कश्यप व एक राशन दुकानदार सतेन्द्र ने प्रेस कल्ब में आकर पत्रकारों के सामने कही थी।जबकि इन तीनो पर भी राशन की कालाबाजारी करने व राशन विक्रेताओं का शोषण करने के आरोप है ,लेकिन ये तीनो अपने ऊपर लगे सभी अरोपों से इनकार करते हुए,अपने को ईमानदारी में राजा हरिश्चंद्र का वंशज बताते है।
सतेंद्र नामक दुकानदार की दुकान पर मिला अतिरिक्त चावल राशन माफियाओं ने रखवाया था।छापे के दौरान फंस गया बेचारा सतेंद्र।
सतेंद्र नामक दुकानदार की दुकान पर छापे के दौरान मिले 200 अतिरिक्त चावल के कट्टे योगी व भेल के राशन माफिया ने रखवाए थे।और फंस गया था सतेंद्र।उस समय तत्कालीन जिलाधिकारी कमरेन्द्र सिंह को मिली शिकायत पर जिलाधिकारी ने ही सतेंद्र की दुकान पर छापा डलवाया था और अतिरिक्त चावल के 200 कट्टे मिले थे।लेकिन उस समय भी राशन माफिया के खिलाफ किसी नेता ने मुँह नही खोला था ,और सतेंद्र की दुकान सस्पेंड हो गई थी,जिसके बाद सतेंद्र काफी परेशान रहा था।

स्वयंभू नेताजी एक जमाने मे जिला पूर्ति अधिकारी के खास हुआ करते थे ,आजकल वे जिला पूर्ति अधिकारी व दो पूर्ति निरीक्षकों के बड़े दुश्मन बन गए हैं ,
इसके पीछे का कारण तो समझ नहीं आ रहा है लेकिन इतना जरूर है , जो सीधे-सीधे समझ आ रहा है की पूर्व जिला अधिकारी कमरेंद्र सिंह ने जिस तरीके से राशन माफियाओं और कुछ राशन दुकानदारों के साथ-साथ राशन का ही कारोबार करने वाले नेता जी की दुकान पर भी शिकायत मिलने पर एसडीएम से छापा लगवाया था। लेकिन एसडीएम साहब द्वारा नेताजी को यह कहकर की मैं कल तुम्हारी दुकान को चेक करने आऊंगा उसके बाद अगले दी नेताजी की दुकान पर तो कुछ नहीं मिला था , क्योंकि नेताजी ने पहले दिन एसडीएम को कह दिया था की वह शहर में नहीं है उस दिन एस डी एम को नेताजी की दुकान बंद मिली थी,अगले दिन तक नेता जी ने दुकान की कमियों को दुरुस्त कर लिया था।
कई राशन विक्रेताओं ,व राशन माफियाओं पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने कसा था शिकंजा।नेता जी की दुकान की शिकायत मिलने पर नेता जी की दुकान की भी हुई थी जांच।
नेताजी के अलावा कई राशन माफियाओ योगी, जैन व कई दुकानदारों के खिलाफ कार्यवाही तत्कालीन जिला अधिकारी ने करवाई थी ,योगी को तो कह दिया गया था, कि वह गोदाम पर दिखाई ना दे क्योंकि राशन माफिया योगी न तो राशन दुकानदार है ,और ना ही कोई गोदाम का या सप्लाई दफ्तर का सरकारी कर्मचारी है, लेकिन योगी बाकायदा खाद्य गोदाम ज्वालापुर पर एस एम आई व एम आई कि कुर्सी पर बैठकर राशन विक्रेताओं को राशन अपनी मर्जी से दिया करत था ।और धडल्ले से गरीबों के पेट के चावल को ब्लैक मार्केट में बेचा करता था ।
उस पर भी कमरेन्द्र सिंह ने रोक लगाई थी जिसको नेताजी यह समझते हैं। की सख्ती जिला पूर्ति अधिकारी और दो पूर्ति निरीक्षक के कहने पर लगाई गई थी। जबकि ऐसा नहीं था ।ये सूचनाएं सीधे जिलाधिकारी को मिलती थी और उनपर जिलाधिकारी कमरेन्द्र सिंह कार्यवाही करवाते थे।

