हरिद्वार । तीर्थ नगरी हरिद्वार में सबसे प्रसिद्ध मां मनसा देवी का मंदिर काफी समय से सुर्खियों में है, इसके पीछे कारण यह है कि यहां के ट्रस्टियों की कारगुजारियां।यहाँ दान में आने वाली करोड़ों की धनराशी, व ट्रस्ट के अध्यक्ष रवींद्र पुरी के अजीब तरह के निर्णय लेना ।
ट्रस्टी अनिल शर्मा के द्वारा मनसा देवी से मन माफीक दान में आने वाली धनराशि को हड़पना मुख्य मुद्दे हैं ,कल मनसा देवी मंदिर पर साधु संतों का एक आयोजन किया गया ,इस आयोजन में मुख्य रूप से जूना अखाड़े के सर्वे सर्वा जो लगभग 30 40 साल से चले आ रहे हैं ।

और जब तक जीवित रहेंगे आजीवन वही सर्वे सर्वा रहेंगे ऐसे हरी गिरी जी महाराज मौजूद थे ।इसके अलावा कई अन्य साधु संत मौजूद थे, इन सभी की मौजूदगी में पिछले दिनों मनसा देवी पर भगदड़ के दौरान हुई नौ लोगों की मृत्यु की आत्मा की शांति के लिए शांति पाठ किया गया।

रविन्द्र पुरी की घोषणा,
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी जी महाराज ने घोषणा की के महेश दुबे ट्रस्ट के मैनेजर हैं ।व सीमा गिरी को नया ट्रस्टी बनाया गया है ।साधु संतों के सामने की गई इस घोषणा के बाद बताया जाता है की सभी साधु संतों को भोजन प्रसाद ग्रहण कराया गया ।

सीमा गिरी के ट्रस्टी होने की घोषणा।
अब तक अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी जी बाकायदा यह कहते घूम रहे थे की सीमा गिरी का मनसा देवी ट्रस्ट से कोई लेना देना ही नहीं है ।और वह मनसा देवी ट्रस्टी की ट्रस्टी नहीं है, इस बात का एक नोटिस भी उन्होंने अपने वकील के माध्यम से सीमा गिरी को भेज दिया था ।लेकिन फिर पता नहीं क्या हुआ की सीमा गिरी को बाकायदा कल सभी संतो के सामने ट्रस्टी घोषित कर दिया गया।
इससे पहले भी जब डीएम एसएसपी ने पहली बार बैठक ली थी तब भी सीमा गिरी को ही ट्रस्टी के रूप में पेश कर दिया गया था। जबकि अपने वकील के जरिए रवींद्र पुरी जी पहले सीमा गिरी को ट्रस्टी मानने से इनकार कर चुके हैं अब यह समझ में नहीं आता है, की अध्यक्ष जी किसके कहने से क़भी हाँ क़भी ना करते है।

अनिल शर्मा
साधू संतो का भंडारा, गृहस्थ लोगों को खाना चाहिए या नही।
साधु संतों की माने तो जो भी संत बनता है उसे अपना पिंडदान करना होता है, और पिंड दान कर चुके सन्त एक तरीके जिंदा प्रेत ही माने जाते है। इस तरीके के साधु संतों को जो अपना पिंड दान कर देते हैं ।उन्हें प्रेत की संज्ञा ही दी जाती है ।उनको अपने घर पर ग्रस्त लोगों द्वारा शुभ कार्य में बुलाया जाना भी वर्जित बताया गया है ।
लेकिन आजकल शुभ कार्य में सन्तो का आशीर्वाद लेने के लिए बुलाने का फैशन हो गया है ।एक बहुत बड़े व ज्ञानी महाराज का कहना है, की अब समय परिवर्तन हो रहा है।इस लिए साधू सन्तो के यहाँ भंडारे में ग्रहस्थ लोगो को प्रसाद ग्रहण भी करना पड़ जाता है, उस स्तिथि में विष्णु भगवान का स्मरण कर प्रसाद ग्रहण किया जा सकता है।

महेश दूबे, मैनेजर
अम्बानी ने भी पुत्र के विवाह में बुलाये थे,साधू सन्त ।
देश के जाने-माने उद्योगपति अंबानी जी ने भी अपने पुत्र की शादी में चोटी के संतों को आमंत्रित कर रखा था ,उसमें हरिद्वार के भी कुछ साधु संत थे। अम्बानी के पुत्र के विवाह में शामिल होने के बाद हरिद्वार के एक संत की तो दुकान बहुत बढ़िया चलने लगी है ।जब से वह अंबानी जी के यहां भोजन का स्वाद चखकर आए , तब से तो उनकी दुकान बहुत बढ़िया चल रही है।
अब रही बात अनिल शर्मा की अनिल शर्मा ने अपने पुत्र नमन शर्मा को एक तरीके से मनसा देवी पर स्थापित कर ही दिया है। क्योंकि नमन शर्मा अब वहां कार्यालय में ही बैठते हैं ।मनसा देवी पर सारा लेन-देन सब उन्हीं के हाथों से होता है । नमन शर्मा को ट्रस्टी बनाये जाने की घोषणा कभी भी हो सकती है।क्योकी अनिल शर्मा के किसी भी कार्य को मना करने की स्थिति में प्रधान जी नही है।

भविष्य के ट्रस्टी , नमन शर्मा
गेरूआ वस्त्र अभी से कर लिए है, धारण
मनसा देवी ट्रस्ट की अगर सही से जांच हो जाए ,और इसको वैष्णो देवी की तर्ज पर शुरू कर दिया जाए। या यहां रिसीवर नियुक्त किया जाए तभी जाकर यहां का सुधार हो सकता है। अन्यथा यहां का सुधार होना बहुत मुश्किल है ।क्योंकि उच्च अधिकारी जो यहां का सुधार करना चाहते हैं वह जीवन पर्यंत तो यहां रहते नहीं है। साल 2 साल में उनका स्थानांतरण हो जाता है ।
और फिर वही स्थिति शुरू हो जाती है ।लेकिन मनसा देवी मंदिर पर हुई घटना के बाद से ट्रस्ट के अध्यक्ष जी काफी परेशान दिखाई दे रहे हैं देहरादून के भी काफी चक्कर लगा रहे हैं। मुख्यमंत्री को भी गुलदस्ते भेंट किए जा रहे हैं ।और अधिकारियों से भी ज्यादा से ज्यादा संपर्क करने के प्रयास किये जा रहे हैं ।लेकिन शायद कोई रास्ता अध्यक्ष जी को दिखाई नहीं दे रहा है। की इस मामले को किस तरीके से निपटाया जाए।

