हरिद्वार। सावन मास में हरिद्वार में लगने वाला कांवड़ मेला यूं तो शिव भक्तों के नाम ही रहता है । दूर दराज से करोड़ों की तादाद में शिव भक्त हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेने आते हैं ।लेकिन हरिद्वार में भी कुछ साधु संत सावन मास में बाबा भोलेनाथ की आराधना में लीन रहते हैं दक्षिण काली मंदिर के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशा नंद जी महाराज पूरे सावन मास प्रतिदिन 18 घंटे बाबा भोलेनाथ का अभिषेक करते हैं। यह अभिषेक रोजाना कभी गन्ने के रस से कभी अनार के जूस से कभी आम के जूस से कभी गिलोय से कभी बाबा को पसंद भांग की बूटी से व कई अन्य तरल पदार्थ के साथ बाबा का जलाभिषेक यहां प्रतिदिन 18 घंटे तक निरंतर चलता रहता है और शिव भक्ति में लीन यहां के सभी कर्मचारी भी बाबा की पूजा में व्यस्त रहते हैं।


निरंजनी अखाड़े में भी शकुशल कांवर मेले के लिए पूजा।
इस बार निरंजनी अखाड़े के महंत व अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि महाराज भी कांवड़ मेला के सकुशल संपन्न हो जाए इसके लिए पूजा अर्चना कर रहे हैं अब कांवड़ मेले के मात्र 5 दिन शेष रह गए हैं और यह 5 दिन डाक कांवरियों व मोटरसाइकिल वाले कांवरियों के नाम रहने वाले हैं।
घन्टो व मंटो के हिसाब से दूरी तय करते हुए जाते है ,शिव भक्त कांवड़िए।
डांक काँवड़ घन्टो व मिनटों के हिसाब से जल लेकर अपने-अपने नगरों और कस्बो की तरफ रवाना होते हैं ।और घंटा और मिनट के हिसाब से दूरी तय करते हैं। यह कांवड़ियों की टोली काफी संख्या में होती हैं और एक ट्रक में इनका सारा सामान रहता है। और भोले निरंतर भागते रहते हैं। यह दौड मैराथन दौड 42 किलोमीटर से भी कहीं अधिक हो जाती है इसी के साथ मोटरसाइकिल पर आने वाले शिव भक्त कांवरिया अपनी मोटरसाइकिल से साइलेंसर निकाल देते हैं जिसके कारण कई बार दुर्घटनाएं भी हो जाती है मोटरसाइकिल में आग लगने की भी कई बार घटनाएं हो चुकी हैं लेकिन फिर भी भोले के यह भक्त तो अपनी मोटरसाइकिल से साइलेंसर निकाल कर ही यात्रा करते हैं और हरिद्वार से पवित्र गंगा जल लेकर अपने-अपने नगरों और कस्बो के शिवालियों में 23 जुलाई को बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के बाद ही इस कांवर मेले पर विराम लग पाएगा।

सुरक्षा कर्मी चौकन्ने
इस मेले में आने वाले डांक कांवरियों को सुचारू रूप से चलाने की पूरी व्यवस्था पुलिस प्रशासन व मेला अधिष्ठान पर होगी ।अब देखना यह है की डाक काँवड़ को हरिद्वार से निकलने के लिए इस बार प्रशासन ने क्या रूट और क्या रणनीति बनाई है लेकिन 23 तारीख तक
मेला सकुशल निपट जाए इसी की कामना सभी लोग कर रहे हैं ।बाबा भोलेनाथ के दक्ष महादेव ,बिलकेश्वर महादेव, गौरी शंकर, तिल भाण्डेश्वर, दरिद्र भंजन व दुख भंजन में प्रतिदिन बाबा भोलेनाथ की पूजा अर्चना व बाबा का जलाभिषेक ,दुग्धाभिषेक हो रहा है। सावन मास में बाबा भोलेनाथ की पूजा करने से मानव के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और मानव को मोक्ष की प्राप्ति होती है

