हरिद्वार।हरिद्वार में नील पर्वत पर स्थित मां मनसा देवी के मंदिर के ट्रस्टी दान की संपत्ति से उड़ा रहे हैं मौज, जबकि ईमानदार अधिकारी ट्रस्ट की हकीकत पर ही उठा चुके हैं उंगली।
इस ट्रस्ट के ट्रस्टियों की गतिविधियों पर जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने लगाना शुरू किया है अंकुश।
तीर्थ नगरी हरिद्वार की प्रसिद्ध मां मनसा देवी मंदिर के ट्रस्ट के अब तक तीन ट्रस्टियों की बात सामने आया करती थी। अब ट्रस्टियों की संख्या 5 हो गई है ।व कोर्ट के आदेश पर जिलाधिकारी व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ट्र्स्ट का पदेन सदस्य बनाया गया है। इस लिए अब ट्र्स्ट के सात ट्रस्टी हो गए हैं। इस ट्रस्ट के अध्यक्ष रविन्द्र पुरी जी हैं जो निरंजनी अखाड़े के भी सर्वे सर्वा है और निरंजनी अखाड़े की हरिद्वार स्थित तमाम संपत्तियों के भी रवींद्र पुरी जी प्रबंधक है ।दूसरे ट्रस्टी हैं अनिल शर्मा यह अनिल शर्मा प्रसाद में आने वाले नारियल चुन्नी का पूरा कारोबार देखते हैं ।और मंदिर पर आने वाली दान की धनराशि सोना, चांदी ,हीरे, जवारत भी इनकी निगरानी में ही रहते हैं।

अध्यक्ष जी को हर सप्ताह अनिल शर्मा ही पहुचाते है, दान में आई धनराशि व सोना,चांदी।
ट्रस्टी अनिल शर्मा ही सप्ताह में एक बार अखाड़े में जाकर दान की धनराशि व बेश कीमती वस्तुएं अध्यक्ष जी के सुपुर्द करते हैं। बाकी कितना पैसा यह अपनी जेब में रखते हैं और कितना पैसा मनसा देवी मंदिर के तथा कतिथ मैनेजर साहब की जेब में जाता है, यह बता पाना मुश्किल है ,इन्हीं सब बातों से दुखी होकर एक ट्रस्टी प्रदीप शर्मा ने मनसा देवी मंदिर के ट्रस्ट से लगभग किनारा कर लिया है,लेकिन स्तीफा नही दिया है।

जिलाधिकारी, हरिद्वार
ट्रस्टी राजगिरि व नाबालिग कन्या
तीसरे ट्रस्टी हैं राजगिरी महाराज, राजगिरी जी उस समय चर्चाओं में आए जब एक नाबालिक कन्या और राजगिरी जी का संपर्क उजागर हुआ। राज गिरी जी के पास यह नाबालिक कन्या उनके विकास नगर स्थित आश्रम तक रात में ही पहुंच गई थी। रात को विकास नगर में अकेली नाबालिग लड़की को घूमती देख उस समय विकास नगर की तत्कालीन पुलिस इंस्पेक्टर ने उसको थाने लाकर पूछताछ की तो उसने राजगिरी के आश्रम में जाने की बात बताई ।और राजगिरी से अपने संपर्क होने की बात बताई थी ।जब हरिद्वार में निरंजनी अखाड़े के बड़े महाराज को पता चला कि कन्या को विकास नगर पुलिस ने पकड़ रखा है। तो महाराज जी ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया की किसी तरीके से कन्या को छोड़ दिया जाए, साथ ही महाराज जी ने अपने राजनीतिक आका और उस समय के कैबिनेट मंत्री रहे नेताजी से भी संपर्क साधा और नेताजी से भी महिला इंस्पेक्टर को फोन किया की नाबालिक कन्या को छोड़ दिया जाए।
कुछ प्रलोभन भी महाराज जी की तरफ से महिला इंस्पेक्टर को दिए गए, लेकिन महिला इंस्पेक्टर टस से मस नहीं हुई, और उसने नाबालिक कन्या को नहीं छोड़ा । नाबालिक कन्या को देहरादून के महिला संरक्षण ग्रह में भेज दिया गया। उसके बाद अखाड़े के स्वामी जी व राजगिरी ने महिला संरक्षण गृह देहरादून से उक्त नाबालिग कन्या को हरिद्वार की ही एक महिला के संरक्षण में सुपुर्द करा दिया गया।कहा है , उस समय की नाबालिग कन्या किसी को नही पता ,उस नाबालिग कन्या के बयानों पर काजल कई साल से जिला कारागार हरिद्वार में है बन्द।इस नाबालिक की सुपुर्दगी जिस महिला को मिली थी , करीब एक हफ्ता यह नाबालिग कन्या उस महिला के साथ रही लेकिन उसके बाद से आज तक वह नाबालिग कहां है कहां नहीं है इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है ।लेकिन कुछ लोगों का कहना है की उसके बारे में राजगिरी जी महाराज को ही मालूम है कि वह कहां है ।

महंत रविंद्र पूरी जी
नाबालिग कन्या के भाई व नाबालिग को सुपुर्दगी में लेने वाली महिला के रिश्तेदार को रामानन्द इंस्टिट्यूट में नोकरी।
नाबालिग के एक भाई को रामानंद इंस्टिट्यूट में बाकायदा नौकरी दे दी गई है ।जिस महिला ने नाबालिग की सुपुर्द ली थी ,उस महिला के भी एक रिश्तेदार को रामानंद इंस्टिट्यूट में नौकरी दी गई है। इन दोनों को ही नौकरी निरंजनी अखाड़े के प्रबंधक रवींद्र पुरी जी महाराज की स्वीकृति पर ही दी गई होगी।

अनिल शर्मा ट्रस्टी
चौथी ट्रस्टी सिमा गिरी को बता कर जिलाधिकारी व एस एस पी को किया गुमराह।
एक चौथी ट्रस्टी सामने आई है ,यह ट्रस्टी हैं सीमा गिरी जी सीमा गिरी जी को इस तरीके से ट्रस्टी बनाया गया कि यदि इसका विरोध हो तो यह मामला न्यायालय के बीच झूलता रहे और सीमा गिरी जी ट्रस्टी बनी रहे, हालाकि सीमा गिरी जी को ट्रस्टी बनाने के पीछे अध्यक्ष जी का कहना है की अनिल शर्मा व राजगिरी ने सीमा गिरी को ट्रस्टी बनाया है, जबकि अनिल शर्मा और राजगिरी को किसी को भी ट्रस्टी बनाने का कोई अधिकारी नहीं है। इस बात को लेकर ट्रस्ट के अध्यक्ष रवींद्र पुरी जी ने विरोध कर एक वकील के माध्यम से सीमा गिरी को नोटिस भिजवा दिया ,की वे ट्रस्ट की ट्रस्टी नहीं है ।
क्योकी अनिल शर्मा व राजगिरी को ट्रस्टी बनाने का कोई अधिकार नहीं है ,लेकिन मजे की बात देखिए कोर्ट के आदेश पर ट्रस्टी बने डीएम और एसपी के नेतृत्व में मनसा देवी मंदिर पर ट्रस्ट की जो पहली बार बैठक हुई थी, और उस बैठक में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने चौथे ट्रस्टी के बारे में पूछा तो बड़े ही आराम से ट्रस्ट के अध्यक्ष रवींद्र पुरी जी ने प्रदीप शर्मा का नाम छुपाते हुए सीमा गिरी को ही ट्रस्टी के रूप में पेश कर दिया। कल तक सीमा गिरी को वे ट्रस्टी न होने और वकीलों से नोटिस भिजवा रहे थे कि यह ट्रस्टी नहीं है। इन्ही सीमा गिरी को डीएम और एसपी को गुमराह करते हुए उनके सामने ट्रस्टी के रूप में सीमा गिरी को ही पेश कर दिया।

ताकतवर दुबे जी, छोटे कर्मचारी से छलाँग लगाकर बन गए मैनेजर।
रही बात सबसे ताकतवर माने जाने वाले दुबे जी की यह 7 हजार 500 रुपए प्रति माह की सैलरी पर मनसा देवी में काम करते हैं लेकिन इनके ठाट बाट आप देखेंगे तो देखते रह जाएंगे इतने रुपए में आजकल प्रतिमा आदमी ढंग से रोटी भी नहीं खा पाता है, लेकिन दुबे जी हेलीकॉप्टर में यात्रा करते हैं और महाराजाओं वाली कुर्सी पर विराजमान रहते हैं और कमर की अंटी में रिवाल्वर लगाकर रखते हैं पता नहीं कब कहां इस रिवाल्वर की जरूरत पड़ जाए, इन दुबे जी ने रवींद्र पुरी जी पर पता नहीं क्या जादू किया हुआ है ,की रवींद्र पुरी जी इस दुबे की सारी हरकतें जानते हुए भी इस दुबे को कुछ भी कह पाने की स्थिति में नहीं है। जबकि मनसा देवी का तमाम स्टाफ इन दुबे जी और अनिल शर्मा से एक तरीके से खुंदक खाता है, इसके पीछे कारण है कि अनिल शर्मा और इन दुबे जी की हरकतें है।
अनिल शर्मा भी वहां से माल बटोरने में लगे हुए हैं ,और दुबे जी भी अपने काम में लगे हुए हैं, दुबे जी ने रवींद्र पुरी जी को और मंशा देवी मंदिर पर काम करने वाले कर्मचारियों पर यह कहकर रोब जमा रखा है ,की उसके जनपद ही नहीं पूरे उत्तराखंड के अधिकारियों से निकट के संबंध है। और जब चाहे वह जिससे कोई भी काम करा सकत हैं ,और शायद करा भी लेता हो क्योंकि दुबे जी ही तो प्रतिमाह अधिकारियों के यहां मनसा देवी से प्रसाद का टोकरा लेकर अधिकारियों के यहां पहचाने जाते हैं, अब इस टोकरी में कितने प्रकार के फल और कितने प्रकार की मिठाइयां और कितने प्रकार की और क्या-क्या चीज होती हैं यह तो दुबे जी जानते होंगे या रवींद्र पुरी जी जानते होंगे। लेकिन अधिकारियों के घर प्रसाद पहुंच जाने के बाद अधिकारी भी निहाल हो जाते हैं और ट्रस्ट का काम निर्विघ्न रूप से चलता रहता है ।

सिमा गिरी,ट्रस्टी
जिलाधिकारी व एस एस पी के तेवरों से है परेशान।
जिला अधिकारी मयूर दीक्षित इस प्रसिद्ध मंदिर व मन्दिर के कर्णधारों की ओर ध्यान देना शुरू किया है। जब से यह ट्रस्ट बना है तब से लेकर आज तक पहली बार ट्रस्ट की कोई बैठक जिलाधिकारी वह वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के द्वारा बुलाई गई है ।और इस बैठक में ट्रस्ट की करगुजारियों पर जिलाधिकारी ने बेहद नाराजगी व्यक्त करते हुए ट्रस्ट पर रिसीवर नियुक्त करा देने की बात तक कह डाली थी ,जिसके बाद ट्रस्ट के अध्यक्ष रवींद्र पुरी जी के माथे पर पसीना आना स्वाभाविक था।

मंशा देवी हादसे की जांच में प्रबंधक होंगे प्रभावित।
मनसा देवी मंदिर पर पिछले माह हुई दुर्घटना में मरे नौ लोगों की जांच जिस दिन पूरी हो गई और इस जांच को सही से अंजाम दे दिया गया तो इस जांच कीआंच मनसा देवी मंदिर के प्रबंधक दुबे जी पर तो आना निश्चित है, यह बात मनसा देवी मंदिर के भी सभी कर्मचारी दबी जुबान में बताते हैं। इन कर्मचारियों का कहना है कि यह दुबे ही है जो इस मंदिर पर हुई उस दिन की घटना के लिए जिम्मेदार है। लेकिन इस बात की पुष्टि हम इसलिए नहीं कर सकते हैं क्योंकि हमारे पास इस बात का कोई प्रमाण नहीं है ।प्रमाण अगर किसी के पास होगा तो वह होगा जांच अधिकारी, एसडीएम हरिद्वार जो इसकी जांच कर रहे है। वैसे तो यह जांच 15 दिन में पूरी की जानी थी, लेकिन लगता नहीं कि यह जांच 15 दिन की तो बात छोड़िए 15 महीने तक भी पूरी हो जाएगी, क्योंकि इस जांच को लगभग ठंडे बस्ते के हवाले कर दिया गया है।
जैसे कि पहले भी मेलो में हुई दुर्घटनाओं की जांच होती रही है। दुर्घटनाओं में लोगों की मौत के दौरान जांच अधिकारी की रिपोर्ट धूल फांकती रहती है जांच अधिकारी की रिपोर्ट में जो भी लिखा होता है उन रिपोर्टर पर कोई अमल कभी नहीं किया जाता है ।तो यही स्थिति इस जांच की भी होने वाली है ।और रही बात मनसा देवी मंदिर की तो मनसा देवी मंदिर पर जिलाधिकारी मयूर दीक्षित अब कुछ सुधार करने का बीड़ा उठा चुके हैं जिससे अध्यक्ष जी और ट्रस्टी परेशान है ।लेकिन अनिल शर्मा व दुबे जी का कार्य बदस्तूर जारी है अनिल शर्मा का नारियल का कारोबार नीचे से चल रहा है और दूबे जी भी मंदिर के कई राजो के राजदार होने का फायदा उठा रहे है। इस बात की जानकारी मंदिर के सभी कर्मचारीयो को हैं, लेकिन मुंह खोलने वाला कोई नहीं है ,क्योंकि मनसा देवी के कर्मचारियों को डर लगा रहता है कि कब पता नहीं दुबे, रवींद्र पुरी जी के कान भरकर किसको नौकरी से निकलवा दे

दूबे आया कहा से है, कहा का रहने वाला है, घर की माली हालत क्या है।इसकी जांच कौन करेगा।
यह भी जांच का विषय है की यह दुबे जी उत्तर प्रदेश के कौन से जिले के रहने वाले हैं मनसा देवी मंदिर पर कैसे पहुंचे मनसा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष रवींद्र पुरी जी के खास कैसे बन गए। खासम खास की तो बात छोड़िए बताया जाता है, की पहले दूबे जी छोटे कर्मचारी हुआ करते थे। लेकिन चापलूसी में माहिर दूबे जी चापलूसी की बदौलत ही मैनेजर बन गए हैं। और मैनेजर राजाओं की तरह तो होता ही है। जहां लाखों रुपए रोज का चढ़ावा आता है उस संस्था का मैनेजर हेलीकॉप्टर में नहीं घूमेगा तो और क्या पैदल चलेगा,और राजाओं वाली कुर्सियों पर विराजमान नहीं होगा तो कहा बैठेगा। रिवॉल्वर लेकर तो चलना तो उसका अधिकार भी बनता है क्योंकि इतनी बड़ी संस्था का मैनेजर बिना रिवाल्वर के चले तो थोड़ा अटपटा सा लगता है ।

दूबे ,प्रबंधक
एक सन्त ने की है जिलाधिकारी से मांग , मंशा देवी मंदिर को बचा लो साहब।
2017 में तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट जय भारत सिंह ने जब इस ट्रस्ट की पूरी छानबीन की थी तब उन्होंने इस ट्रस्ट के कारिंदों की कारगुजारियों पर ही संदेह व्यक्त किया था ।अब इस ट्रस्ट की जांच कराने व इस मंदिर को कुछ तथा कथित लोगों से मुक्त कराने की गुहार एक संत ने जिला अधिकारी से की है । संत ने तो जिलाधिकारी को दो पेज का पत्र लिखकर इस ट्रस्ट की संपूर्ण जानकारी उसमें व्यक्त करते हुए इस मंदिर को मंदिर के वर्तमान कर्णधारों से मुक्ति दिलाने की गुहार लगाई है। देखना है की इन संत महोदय की यह गुहार कितना रंग लाती है


अध्यक्ष जी मे शिकायत करने वालो का मुंह बंद करने के है गुण ।
आज तक जितने भी लोगों ने इस ट्रस्ट के या अध्यक्ष जी के विरुद्ध आवाज उठाई है, उन सभी का मुंह अध्यक्ष जी ने किसी न किसी तरीके से प्रसाद खिलाकर या दूध पिलाकर बंद कर दिया है ।और अध्यक्ष जी अपना कार्य निर्विघ्न रूप से चला रहे हैं लेकिन अध्यक्ष जी अपने आप को बहुत बड़ा ज्ञानी भी बताते हैं ।और उनका कहना है कि वे विद्वान है। श ।लेकिन इतने बड़े ज्ञानी होने के बावजूद अध्यक्ष जी यह नहीं जानते कि अहंकार किसी का नहीं रहता है। और शायद अहंकार तो आदमी को कभी ना कभी पतन की ओर ले ही जाता है ,उस दिन से अध्यक्ष जी और उनकी मंडली अनभिज्ञ है।

जिलाधिकारी से मंशा देवी को बचाने की गुहार लगाने वाले सन्त
कामाख्या न्यूज के पास सारे दस्तावेज है मौजूद।
कामाख्या न्यूज के पास इतने दस्तावेज है की लोग पढेंगे तो दांतो तले अंगुली दबा लेंगे।कामाख्या न्यूज के पास उस नाबालिग बताई जाने वाली लड़की का पूरा बायोडाटा चित्र सहित मौजूद है।और उसके मुकदमे की पूरी फाइल का अध्ययन करने के बाद तसवीर निकल कर आती है।की जिन लोगो ने काजल नाम की महिला को जेल भिजवाया है।यदि इसकी पुनः जांच हो जाये तो सभी बड़ी हवेली की शोभा बढायँगे।

