हरिद्वार ।
नरेश गुप्ता
हरिद्वार में 20 दिन पूर्व 22 करोड़ की लागत से बनाये गए चार घाट गंग नहर के जल में विसर्जित हो गए है , उत्तराखंड सिचाई विभाग द्वारा इन घाटों का निर्माण कराया गया था। ,हरिद्वार में प्रतिवर्ष उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग दशहरा के दिन हरिद्वार से लेकर कानपुर तक जाने वाली गंग नहर को मरम्मत व सफाई के नाम पर बन्द करता है।और दीपावली के दिन गंग नहर में जल छोड़ा जाता है। इस अवधि में नहर के अंदर व किनारे जो कार्य होने होते है किये जाते है।
अर्ध कुंभ अपर मेला अधिकारी दयानन्द सरस्वती के अनुसार सिचाई विभाग के अधिकारियों से बात हो गई है, मात्र 10 मीटर का टुकड़ा छतिग्रस्त हुआ है, वो तीन दिन में ठीक हो जायेगा।

गंग नहर बन्दी के दौरान 22 करोड़ की लागत से बनाये गए चार घाटों के टूटने, या बह जाने की जानकारी उत्तराखंड सिचाई विभाग के कारिंदों पता नही चली।जब सोशल मीडिया पर तस्वीरे वायरल होने लगीं तब मेला अधिकारी सोनिका जी ने सिचाई विभाग की इस करतूत का संज्ञान लिया, और घाटों का निरीक्षण कर घाट ठीक करने के आदेश सिचाई विभाग को दिए,
जो घाट गंग नहर की भेंट चढ़ गए है, वो कैसे ठीक होंगे ये सिचाई विभाग के काबिल इंजीनियर ही जानते होंगे।

हरिद्वार में आने वाले श्रद्धालुओं के स्नान के लिये बनाये गए चार घाट जो 22 करोड़ की लागत से बनाये गए थे , श्रद्धालुओं के स्नान से पूर्व ही गंगा स्नान कर गए। अब इन घाटों के ठीक हो जाने की बात दयानन्द सरस्वती जी कह रहे है। लेकिन घाट कैसे ठीक होंगे इसका जवाब भी उनके पास यही है, की सिचाई विभाग ने बताया है।वे यह भी कहते है की इसकी जांच थर्ड पार्टी जांच समिति से भी कराई जा सकती है।
थर्ड पार्टी जांच समिति की रिपोर्ट पर क्या कभी कोई कार्यवाही हुई है।

हरिद्वार ,कुंभ मेला अधिकारी 2027, घाटों का निरीक्षण करते हुए।ये टूटे घाट मात्र 10 मीटर छतिग्रस्त बताए जा रहे है।
विगत 40 वर्षों में 3 कुंभ व 3 अर्ध कुंभ हरिद्वार में मैने भी देखे है।हर कुम्भ में अनियमितताओं को लेकर थर्ड पार्टी जांच समिति से जांच कराए जाने की बात कही जाती है, लेकिन पछले किसी भी कुंभ व अर्ध कुंभ में हुई अनियमितताओं की किसी भी जांच पर आज तक किसी के विरुद्ध कोई कार्यवाही नही हुई है।
2027 में हरिद्वार में अर्ध कुंभ लगना है, इसलिए बनाये गये घाटों की गुणवत्ता पर लोगों की नजर पड़ गई है, और यह जो करोड़ों रुपए की लागत से घाट बनाए गए थे वह पानी में बहते हुए साफ-साफ दिखाई दे गए हैं।
अब इन घाटों के नाम पर जो धनराशी डकारी गई है ,उसका हिसाब किसको और कौन देगा कहा नही जा सकता।अभी तो ये मेला कार्यों का श्री गणेश है, आगे आगे देखिये होता है क्या क्योंकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मेले के लिए केंद्र सरकार से भारी भरकम धनराशी मांगी है, अधिकारी उस पर निगाह लगाए बैठे है, कब माल आये और हम ठिकाने लगाए।

