12 Feb 2026, Thu

सावन मास में हरिद्वार में लगने वाला कांवड़ मेला इस समय अपने पूरे यौवन पर है अब तक एक करोड़ से अधिक शिव भक्ति कांवरिया पिछले 15 दिनों में पवित्र गंगाजल लेकर अपने-अपने नगरों और कस्बो की ओर निकल चुके हैं मेले के लिए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं।

हरिद्वार । हरिद्वार में चल रहे काँवड़ मेले में विभिन्न रूप देखने को मिल रहे हैं हरिद्वार के ज्यादा तर लोग इन कांवड़ियों को गुंडे और उपद्रवी जैसे नाम से संबोधित करते हैं। जबकि सच्चाई ये है के करीब 2% लोग ऐसे होते हैं जो अवांछनीय तत्व कहे जा सकते हैं ।जो अराजकता फैलाकर मेले का मजा खराब कर देते हैं, ऐसे लोगों से पुलिस सख्ती से निपट रही है ,उनके खिलाफ मुकदमे कायम किये जा रहे हैं, और उन्हें जेल भेजा जा रहा है, ऐसे लोगों के साथ किसी भी तरह की कोई सहानुभूति नही बरती जा रही है

15 दिन में दस करोड़ का होता है, व्यापार।

मेले में आने वाले करोड़ो शिव भक्त यहाँ से जो खरीदारी करते है उससे कमसे कम दस करोड़ का व्यापार 15 दिनों में हो जाता है।
इस बार देखने को मिल रहा है की कांवरिये कांवड़ कम और गंगाजल क्लशो में लेकर ज्यादा निकल रहे हैं ।यह एक दूसरे की देखा देखी हो सकता है।

51 किलो से लेकर 101 किलो तक जल लेकर जा रहे है।यही कारण है पुलिस से उलझनें का।

इस बार ये कांवरिये 51 किलो 61 किलो व 101 किलो जल कलसो में लेकर कई कई सौ किलोमीटर दूर जाने का हौसला दिखा रहे हैं। जबकि सच्चाई यह है की यह हर की पैड़ी से गंगाजल भरकर तीन-चार किलोमीटर सिंह द्वारा तक पहुंचने तक कई स्थानों पर इन्हें रुकना पड़ता है और अपनी कलश रूपी भारी भरकम कांवरो को नीचे रखना पड़ता है ।जब यह चेक पोस्टों तक पहुंचाते हैं ।तो पुलिस इनको इधर से उधर करती है कि इधर से चले जाओ और उधर से चले जाओ तो यह अपना आपा खो देते है। इसी में पुलिस के साथ इनकी कहा सुनी हो जाती है और कहां सुनी में काफी सारे अन्य कांवरिया जय भोले बम भोले हर हर महादेव के नारों से शोर मचाना शुरू कर देते हैं इसी में बदमजगी पैदा हो जाती है।

कुछ कांवरिये वास्तव में उपद्रवी होते है।जिनसे पुलिस बेमन से सख्ती से निपटी है।

लेकिन कुछ स्थान ऐसे हैं जैसे बहादराबाद में टोल प्लाजा , हरिद्वार में ही एक महिला के साथ जो बदतमीजी कांवरियों ने की है वह किसी भी कीमत पर बर्दाश्त के काबिल नहीं है , अपर रोड पर एक दुकान में तोड़फोड़ करना ,नारसन में कई स्थानों पर तोड़फोड़ व उपद्रव करना इसीलिए इन सभी उपद्रवियों को जिन्होंने यह हरकतें की हैं पुलिस ने उनके खिलाफ मुकदमे कायम करके बड़ी हवेली रवाना कर दिया है, हालांकि पुलिस नहीं चाहती होगी की गंगा जल लेने आये इन लोगो को जेल भेजा जाय। लेकिन अपराध करने वाले अपराधी को जेल ना भेजा जाए तो फिर क्या किया जाए ।

एक करोड़ से अधिक लेकर जा चुके है, पवित्र गंगा जल

रही बात मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की वैसे तो 11 जुलाई से मेला शुरू हुआ है। लेकिन मेला इससे तो बहुत पहले से 15 दिन पूर्व से ही शुरू हो गया था और दूर दराज के कांवरिये जल लेकर वापस भी जाने लगे थे।

अब होगी पुलिस की अग्नि परीक्षा

कल से मुजफ्फरनगर ,मेरठ और हरियाणा के नजदीक के कांवरियों का आना शुरू हो जाएगा ।और यह कांवरिये थोड़े ज्यादा उपद्रवी कहलाए जाते हैं ।तो इनसे निपटने के लिए पुलिस को अपने तरीके से रणनीति बनानी होगी।ये बात-बात में लड़ाई झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं ।तो इसलिए इनके ऊपर गुप्तचर एजेंसी को निगरानी रखनी होगी इस मेले में सुरक्षा के नाम पर देश की तमाम सुरक्षा एजेंसी मेले की निगरानी कर रही है। मेले में डॉग स्क्वाड व सुरक्षा के उपकरण के साथ अधिकारी मेला क्षेत्र में भ्रमण कर रहे हैं ।

अब तक अगर गिनती की जाए तो इस मेले में एक करोड़ से भी अधिक शिव भक्त कावरिये पवित्र गंगा जल लेकर अपने-अपने नगरों और शहरों की ओर निकल पड़े है ।साथ ही यह कहा जाए की कांवरियों को लूटने के लिए खुलेआम प्रशासन ने यहां नगर के कुछ ठेकेदारों को और कुछ अराजक तत्वों को दे रखी है तो यह अतिश्योक्ति नही होगा ,बैरागी कैंप में एक दुकान या एक ठेला खड़ा करने के 20-20 हजार रुपए लिए जा रहे हैं यही हाल अन्य स्थानों पर भी है कि जरा सी जगह पर कोई चावल और कड़ी या चावल , छोले की दुकान लगाकर खड़ा होना चाहता है तो उससे भी दो हजार से लेकर ₹5000 तक वसूले जा रहे हैं ।

लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं सबको यह है की किसी तरीके से 23 तारीख आए और मेला कुशलता से संपन्न हो। और गंगा जल लेकर जाने वालों की भगवान मनोकामनाएं पूर्ण करें ।और पुलिस और जिला प्रशासन के लोग भी मेले के शकुसल संपन्न करा कर गंगा स्नान करें। जबकि मेले का सबसे कठिन दौर 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है इस दौर में डाक काँवड़ आ जाएगी और बिना साइलेंसर की मोटरसाइकिल और साइकिल इस तीर्थ नगरी में इनको खड़े करने की जगह भी नहीं होगी। लेकिन हर बार की तरह मेला तो सम्पन्न होगा ही लेकिन कुछ ना कुछ सुझाव या कुछ ना कुछ यादें छोड़ जाएगा , जिनको लेकर अगले साल कवायत की जाती है ।

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