हरिद्वार।
फोन के जरिये काम चालू है।
अब ज्वालापुर के राशन गोदाम पर फ़ोन के जरिये काम शुरू हो गया है। राशन गोदाम पर कालाबाजारी करने वाले राशन माफियाओ ने नया फार्मूला निकाल लिया है। पहले तो B H E L का चरनु डॉन सुबह ही राशन गोदाम पर पहुंच जाता था।और राशन विक्रेताओ से राशन खरीद लिया करता था।लेकिन अब ज्यादा सख्ती होने पर राशन माफिया चरनु व ज्वालापुर के स्वामी कपिल जी ने नया रास्ता निकाल लिया है। इस रास्ते के अनुसार अब राशन दुकानदारों को फोन पर कह दिया जाता है । की इतना माल गोदाम पर ही छोड़ दो और माल का सारा एडजस्टमेंट लखन करेगा लखन भी पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ इन राशन माफियाओं के इशारे पर कार्य कर रहा है जिसकी एवज में लखन को भी कुछ ना कुछ तो सुविधा शुल्क मिलता ही होगा ।

गरीबों के पेट का राशन डकार रहे राशन माफिया।योगी के चेले है दोनो राशन माफिया।
राशन माफिया किसी भी कीमत पर गरीबों के पेट में जाने वाले राशन को गरीबों तक पहुंचने नहीं देना चाहते हैं ।हरिद्वार जनपद में जितनी भी राशन की दुकानें हैं उनमें से काफी दुकान तो खुलती ही नहीं है ।और ना यह लोग राशन बांटते हैं ।जिन लोगों को राशन लेना होता है वह धक्के खाते फिरते रहते हैं और वह जब भी दुकान पर जाते हैं, उन्हें दुकान बंद मिलती है। कहने सुनने वाला कोई है नहीं ,सारे इंस्पेक्टर इन राशन दुकानदारों से मिले हुए हैं। सबको अच्छी खासी मोटी आमदनी है, यह सारा का सारा माल वे राशन दुकानदार जो कभी दुकान नहीं खोलते वह ब्लैक मार्केट में इन राशन माफियाओं के हवाले कर देते हैं और इस राशन के कारोबार से यह राशन का ब्लैक का धंधा करने वाले चंद दिनों में ही करोड़पति बनते चले जा रहे हैं।

अधिकारी कितनी भी कोशिश करे इस धंधे को रोकने की लेकिन राशन माफिया हर सख्ती की काट निकाल लेते है।
जिलाधिकारी हो या और कोई अधिकारी कितने भी प्रतिबंध कर ले लेकिन यह हर प्रतिबंध का कोई ना कोई फार्मूला निकाल लेते हैं। और इनका कारोबार बदस्तूर जारी रहता है, चर्चा यह है की गोदाम के कर्णधार हर राशन विक्रेता से ₹10 कुंतल के हिसाब से वसूल करते हैं यह ₹10 कुंतल जिसमें चावल भी है गेहूं भी है और भी जो चीज मिलती होगी उन सभी में ₹10 कुंतल गोदाम वालों का होता है।हालांकि ₹10 कुंतल कोई बहुत बड़ी रकम नहीं है, मामूली सी रकम है इतना तो बेचारे गोदाम वालों का बनता भी है, लेकिन यह ₹10 कुंतल अगर जनपद के सारे राशन विक्रेताओं का राशन मिलाकर जोड़ा जाए तो लाखों रुपए महीना में बैठता है। ₹10 कुंतल का दुकानदारों को भी फर्क नहीं पड़ता और गोदाम के करिंदों की जेबे निरंतर मोटी होती चली जा रही।

