कब्जे से बरामद मोबाइल फोन की जाँच में टेलीग्राम एप पर बैंक खातों व पैसों के लेन-देन से संबंधित संदिग्ध चैट, अंतर्राष्ट्रीय कम्बोडिया व थाइलैण्ड आदि गिरोह से जुडे हैं तार
अभियुक्त श्री शिव श्याम सेवा ट्रस्ट नाम से बैंक खाता संचालित कर रहा था, जिसका उपयोग विभिन्न साइबर अपराधों एवं धोखाधड़ी में किया गया है
ठगी के लिये फर्जी फ्लैक्सी, स्टैम्प व दस्तावेज बनाकर वैधता का झूठा आभास दिया जाता है
आरोपी 59 लाख की धोखाधड़ी में एफआईआर साइबर अपराध पुलिस स्टेशन हैदराबाद से भी जुड़ा हुआ है
अभियुक्त के खाते का उपयोग साइबर क्राइम थाना हैदराबाद एवं थाना कोखरज, जनपद कौशाम्बी (उ0प्र0) में दर्ज मामलों में भी होना पाया गया
गिरफ्तारी से बचने के लिये अभियुक्त द्वारा अलग-अलग पते दर्शाकर फर्जी आधार कार्ड तैयार किये हुये थे व लगातार अपने ठिकाने बदले जाते थे
गिरफ्तारी के दौरान अभियुक्त के कब्जे से 05 चैक बुक, 03 स्टैम्प,03 पैन कार्ड, 02 आधार कार्ड (अलग-अलग पते दर्शाते हुए), डेबिट कार्ड, 03 ट्रस्ट/कम्पनियों की फ्लैक्सी, 01 मोबाइल फोन (मय सिम) व 02 अतिरिक्त सिम कार्ड, 03 ट्रस्ट डीड बरामद

देहरादून। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ, नवनीत सिंह द्वारा जानकारी देते हुये बताया कि कुछ समय पूर्व एक प्रकरण साइबर क्राईम पुलिस स्टेशन को प्राप्त हुआ जिसमें कैनाल रोड देहरादून निवासी एक वरिष्ठ नागरिक द्वारा साइबर थाने पर दी गयी तहरीर के अनुसार अज्ञात साइबर ठगों द्वारा वादी को फेसबुक लिंक के माध्यम से अभिनन्दन स्टॉक ब्रोकिंग Pvt. लिमिटेड/ एएसबी इन्वेस्ट एंड ग्रो से संबंधित व्हाट्सएप ग्रुप “11- स्टार्ट अप मल्टीपल ग्रोथ वीआईपी ग्रुप” में जोडकर शेयर ट्रेडिंग, आईपीओ/एफपीओ आदि में मोटा लाभ दिलाने का लालच दिया गया, जिस पर वादी के द्वारा उनके कहने पर गूगल प्ले स्टोर से एक एएसबीपीएल नामक मोबाइल एप डाउनलोड किया गया व दिनांक 10.06.2025 से 05.08.2025 के बीच विभिन्न खातों में कुल लगभग ₹44,50,000/- (चवालीस लाख पचास हजार रुपए) स्थानांतरित किए वादी का आरोप है कि उपरोक्त व्यक्तियों/संस्थाओं ने षड्यंत्रपूर्वक झूठे आश्वासन व फर्जी मोबाइल एप के माध्यम से भारी-भरकम राशि हड़प ली, जिससे वादी को ₹44.50 लाख का आर्थिक नुकसान हुआ। इस शिकायत के आधार पर साइबर क्राईम पुलिस स्टेशन देहरादून पर मुकदमा पंजीकृत किया गया।

सीनियर सिटीजन के साथ हुये साइबर ठगी के इस प्रकरण को गम्भीरता से लेते हुये वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ उत्तराखण्ड के दिशा निर्देशन में पर्यवेक्षण अपर पुलिस अधीक्षक, स्वप्न किशोर, पुलिस उपाधीक्षक अंकुश मिश्रा के निकट पर्यवेक्षण में अभियोग की विवेचना निरीक्षक अनिल कुमार साईबर क्राईम पुलिस स्टेशन, देहरादून के सुपुर्द कर एक विशेष टीम का गठन कर अभियोग के शीघ्र अनावरण हेतु आवश्यक दिशा निर्देश दिये गये ।

टीम द्वारा तत्परता से कार्यवाही करते हुये घटना में प्रयुक्त मोबाइल नंबरों, बैंक खातों, व्हाट्सएप व मैसेंजर चैट्स एवं संबंधित बैंकों, टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स, एवं मेटा कंपनी से पत्राचार कर डेटा प्राप्त किया गया एवं घटना में संलिप्त अभियुक्तों को चिन्हित कर दबिशें दी गयी तथा अनावरण हेतु ठोस प्रयास के उपरान्त घटना का खुलासा करते हुये अभियोग के मुख्य अभियुक्त अजय त्रिपाठी को जनपद गाजियाबाद उ0प्र0 से गिरफ्तार किया गया जिसके कब्जे से 05 चैक बुक (भिन्न-भिन्न बैंक खातों से सम्बंधित), 03 स्टैम्प (सरस्वती फाउंडेशन, एक्सएमपीएस एस्टेट इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड. आदि के), 03 पैन कार्ड (फर्जी विवरण सहित), 02 आधार कार्ड (अलग-अलग पते दर्शाते हुए), 01 डेबिट कार्ड (यस बैंक), 03 ट्रस्ट/कम्पनियों की फ्लैक्सी (श्री शिव श्याम सेवा ट्रस्ट, सरस्वती फाउंडेशन, एक्सएमपीएस एस्टेट इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड.), 01 मोबाइल फोन (मय सिम) व अतिरिक्त 02 सिम कार्ड, 03 ट्रस्ट डीड (श्री शिव श्याम सेवा ट्रस्ट, सरस्वती फाउंडेशन एवं एक्सएमपीएस एस्टेट इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड.) बरामद हुये।
अभियुक्त से पूछताछ व बरामद मोबाइल फोन चैक करने पर उक्त मुख्य आरोपी की टेलीग्राम चैट पर बैंक खातों व पैसों के लेन-देन से संबंधित संदिग्ध चैट पायी गयी हैं तथा अभियुक्त के कम्बोडिया व थाइलैण्ड के अन्तर्राष्ट्रीय गिरोह से सम्पर्क प्रकाश में आया।
गिरफ्तार अभियुक्त श्री शिव श्याम सेवा ट्रस्ट नाम से बैंक खाता संचालित कर रहा था, जिसका उपयोग विभिन्न साइबर अपराधों एवं धोखाधड़ी में किया गया है। पूछताछ में अभियुक्त ने स्वीकार किया कि उसने लालच में आकर फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड एवं ट्रस्ट/कम्पनियाँ बनाकर उनके नाम से बैंक खाते खोलकर साइबर ठगी में प्रयोग करता रहा। अभियुक्त द्वारा अपने सहयोगी अपराधियों के साथ मिलकर वादी को फेसबुक लिंक के माध्यम से व्हाट्सएप ग्रुप में जोडा गया जहां शेयर ट्रेडिंग, आईपीओ/एफपीओ आदि में मोटा लाभ दिलाने का लालच देकर एक एएसबीपीएल नामक मोबाइल एप डाउनलोड कराया गया जिसके माध्यम से पैसा इन्वेस्ट कराने के नाम पर षडयंत्र के तहत मोटा मुनाफा कमाने हेत पूर्ण विश्वास में लेकर विभिन्न खातों में कुल लगभग ₹44,50,000/- (चवालीस लाख पचास हजार रुपए) स्थानांतरित करा लिये गये।

