हरिद्वार। हरिद्वार की प्रसिद्ध मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रविन्द्र पूरी कि बिना अनुमति के ट्रस्ट के दो अन्य सदस्य, अनिल शर्मा व राजगिरी ने सीमा गिरी को ट्रस्ट का सदस्य मनोनीत कर दिया था।

जब इस बात की जानकारी ट्रस्ट के अध्यक्ष रवींद्र पुरी जी को चली तो उन्होंने इसका विरोध करते हुए अपने वकील के माध्यम से ट्रस्ट की सदस्य बनाई गई सीमा गिरी को नोटिस भिजवा दिया कि वह ट्रस्ट की सदस्य नहीं है और अनिल शर्मा व राजगिरी को किसी को भी ट्रस्ट का सदस्य बनाने का कोई अधिकार नहीं है।

अध्यक्ष जी ने सीमा गिरी को पहले ट्रस्टी न मानते हुए, नोटिस भिजवाया ,जिलाधिकारी के सामने सीमा गिरी को ट्रस्टी के रूप में पेश कर दिया।

अनिल शर्मा, ट्रस्टी, मुख्य कर्ता धर्ता मंशा देवी मंदिर।
लेकिन कहा यह जाता है की जो भी कोई कार्य मंशा देवी पर होता है वह बिना अध्यक्ष जी की अनुमति के नहीं होता है ।और सीमा गिरी वाला पूरा प्रकरण अध्यक्ष जी के संज्ञान में था लेकिन अध्यक्ष जी ने क्यों तो इस प्रकरण की पहले अनुमति दी होगी और क्यों बाद में इस मामले को कोर्ट के माध्यम से सीमा गिरी को ट्रस्टी मानने से इनकार कर दिया।

अध्यक्ष जी मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट
लेकिन अभी 3 दिन पूर्व जिला अधिकारी मयूर दीक्षित व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र डोबाल की पहल पर बुलाई गई ट्रस्ट की बैठक में अध्यक्ष जी ने सीमा गिरी को ही चौथा ट्रस्टी बनाकर दोनों अधिकारियों के सामने पेश कर दिया और यह पेशी सीमा गिरी की, अध्यक्ष जी ने उस समय की जब डीएम साहब ने पूछ लिया की चौथा ट्रस्टी कहां है।

जबकि चौथा ट्रस्टी प्रदीप शर्मा है।प्रदीप शर्मा , मंशा देवी पर चल रही लूट खसोट से दुखी होकर वहाँ से चले आये है। बताया जाता है की सिमा गिरी पहले रामानन्द इंस्टीट्यूट में कार्य करती थी। यह इंस्टीट्यूट भी निरंजनी अखाड़े की सम्पत्ती है। वहाँ से नोकरी छोड कर सीमा गिरी मंशा देवी ट्रस्ट के महत्वपूर्ण पद ट्रस्टी के पद पर आशीन कर दी गई।

जिलाधिकारी को अध्यक्ष जी ने किया गुमराह।
मंशा देवी मंदिर पर प्रतिमाह आने वाले करोड़ों के दान के बारे में भी जिलाधिकारी को अध्यक्ष जी ने गुमराह किया। जिलाधिकारी ने अब दान पात्र पेटी सी सी टी वी कैमरे की निगरानी में खोलने के आदेश दिए है। साथ ही जिलाधिकारी किसी दिन भी बिना बताए आकर मंदिर पर चल रही व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी लिया करेंगे।

