हरिद्वार।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी के उत्कृष्ट व भ्रष्टाचार मुक्त राज्य के सपने को राज्य के कुछ अधिकारी व कर्मचारी पूरा नहीं होने देंगे, मुख्यमंत्री इस राज्य को पर्यटन राज्य व उत्कृष्ट राज्य बनाना चाहते हैं ।लेकिन अधिकारी राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त नहीं भ्रष्टाचार युक्त राज्य बनाने पर तुले हुए हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर धामी द्वारा कुंभ मेला 2027 की दिव्य, भव्य व्यवस्थाओं के दावों की हवा को भ्रष्ट ,निकम्मे अधिकारियों व ठेकेदारों की चौकड़ी निकालने पर उतर गई है।

उत्तराखंड सिंचाई विभाग द्वारा 22 करोड़ की लागत से बनाए गए घाट अधिकारियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार की भेट चढ़ गए है। कई स्थानों पर टूटे, दरारें पड़े घाटों की बदहाली उजागर होने के बाद मेला अधिष्ठान हरकत में आया । मेलाधिकारी सोनिका जी के निर्देश पर अधीक्षण अभियंता सुरेश तोमर ने अधिकारियों के दल के साथ टूटे हुए घाटों का निरीक्षण किया।
तोमर साहब के अनुसार 53 मीटर घाट की मरम्मत की जानी है, घाट उत्तर प्रदेश सिचाई विभाग द्वारा छोड़े गए पानी के कारण टूटे है।

तोमर साहब ने स्वीकार किया की कई स्थानों पर गंगा घाटों में आई दरार, उत्तर प्रदेश सिचाई विभाग द्वारा छोड़े गए पानी के तेज प्रवाह के कारण आई हैं। और उन्हे ठीक किया जायेगा। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग पर ठीकरा फोड़ते हुए अधिकारी अपने भ्रष्टाचार को छुपाने का प्रयास कर रहे हैं।
हकीकत में उत्तराखंड सिंचाई विभाग ने घाटों के डिजाइन के लिए आई आई टी रुड़की से संपर्क किया था, लेकिन विभाग द्वारा डाटा उपलब्ध न कराने पर आई आई टी रुड़की ने हाथ खींच लिए थे।मेला अधिष्ठान व उत्तराखंड सिंचाई विभाग को पता था कि छोटी दीपावली की रात को गंग नहर में जल प्रवाह छोड़ा जाएगा, लेकिन इस दौरान घाटों की निगरानी व बड़े अधिकारियों ने घाटों का निरीक्षण नहीं किया। जिसका खामियाजा सामने है।

तोमर साहब भी तो अपने ही है वह कोई अमेरिका से नहीं आए हैं, मेला अधिष्ठान कि हां में हां तो मिलानी ही पड़ेगी।
बहुत ही सुंदर तरीके से पूरा का पूरा ठीकरा इन भ्रष्टाचारियों को बचाते हुए उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के सर फोड़ दिया गया है। तोमर साहब का कहना था की घाट बनने के तुरंत बाद ही उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने पानी छोड़ दिया, जिसकी वजह से घाटों में क्रैक आया है ।लेकिन इन क्रैक को ठीक कर लिया जाएगा ।

तोमर साहब आपको पता न हो तो पूरा हरिद्वार बता देगा की दशहरे के दिन गंग नहर बन्द कर दीपावली के दिन खोली जाती है।
अब यह घाट कैसे ठीक होंगे यह तो सिंचाई विभाग उत्तराखंड व तोमर साहब ही जानते होंगे,जब सभी अधिकारियों को मालूम था की गंग नहर में दीपावली को जल प्रवाह होगा तो समय से काम क्यो नही पूरा हुआ इस पर शायद तोमर साहब ने गौर नही किया।

मुख्यमंत्री की योजनाओं को पलीता लगाने में लगे है अधिकारी,मेला अधिष्ठान में शामिल होने के लिए एडी चोटी का जोर लगा रहे है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी काफी प्रयास कर रहे हैं के 2027 में लगने वाला कुंभ भव्य एवम यादगार कुंभ साबित हो लेकिन अधिकारियों ने अपना खेल दिखाना शुरू कर दिया है और दूसरे राज्य पर आरोप प्रत्यारोप के दौर शुरू हो गए हैं। उधर कुछ अधिकारी मेला अधिष्ठान में स्थानांतरण कराने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए हैं।
तोमर साहब की भी सुनिए।
क्योंकि इन अधिकारियों को मालूम है की मेले के लिए भारी भरकम बजट आएगा और बजट को ठिकाने लगाने का काम केवल एक आदमी को तो नहीं दिया जा सकता, इसलिए उनकी हथेली में भी खुजली हो रही है , अब देखना है कौन-कौन कलाकार अधिकारी मेले को संपन्न कराने के लिए हरिद्वार में स्थानांतरण कराने में कामयाब हो पाता है,अभी तो एक कलाकार को ही कामयाबी मिली है।

