देहरादून ।उत्तराखंड की धामी सरकार 4 साल से मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं कर पाई है ।अब जब 2027 में विधानसभा के चुनाव होने हैं और एक वर्ष इन चुनाव में रह गया है तब जाकर मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा शुरू हो गई है। लेकिन यह चर्चा तभी शुरू होती है जब मुख्यमंत्री की कुर्सी हिलने की चर्चा राजनीतिक गलियारों में दौड़ना शुरू करती है मुख्यमंत्री अपनी कुर्सी हिलने की चर्चा सुन कर दिल्ली रवाना होते हैं और वहां से लौटकर मंत्रिमंडल के विस्तार की बात कह देते हैं यह बात भी दबी जुबान में ही कही जाती है ,खुलकर कोई बात नहीं की जाती, लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अब 1 साल के लिए कोई मंत्रिमंडल में शामिल होकर क्या करेगा।

मंत्री मंडल का विस्तार हुआ तो
इतना जरूर है जो कार्य बाखूबी अन्य मंत्री कर रहे हैं, वही कार्य वह मंत्री भी करेगा, जिसको एक साल के लिए मौका मिलेगा ,जिससे अगर मंत्रिमंडल का विस्तार होता है तो मंत्रिमंडल में जिसको भी शामिल किया जाएगया वो जनता की सेवा करने की बजाय लक्ष्मी जी की आराधना में लीन रहेगा। क्योंकि चुनाव 2027 में होने वाले है। चुनावों में जन बल के साथ साथ धन बल की भी आवश्यकता पड़ती है।
और यह धनबल मंत्रिमंडल में शामिल होकर आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। और 2027 में चुनाव में इस धनबल की बेहद आवश्यकता पड़ेगी, लेकिन देखने में लगता नहीं की 1 साल के लिए मंत्रिमंडल का विस्तार करने की आवश्यकता धामी जी को है, लेकिन धमीजी भी हर बार चुटकुला छोड़ देते हैं कि मंत्रिमंडल का विस्तार कभी भी हो सकता है, अब यदि मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ तो राजनीतिक गलियारों की चर्चा के अनुसार कुमाऊं और गढ़वाल के नेताओं को मौका देकर संतुलन बनाया जाएगा।

बिना जनाधार के कई दर्जा धारी धामी जी की कृपा प्राप्त कर चुके है।
यूं तो राज्य में , दर्जा प्राप्त मंत्री भी अपने आप को कैबिनेट मंत्री से काम नहीं समझ रहे हैं, उनकी चाल ढाल सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों को आदेश देना ,उठने बैठने की स्थिति बिल्कुल कैबिनेट मंत्री से कम दिखाई नहीं पड़ती है ,एक साहब हरिद्वार जनपद से हैं, इनका कोई जनाधार नही है ।लेकिन पता नही इनको किस खुशी में राज्य मंत्री का दर्जा दे दिया गया है।
ये नेताजी कम उद्योगपति ज्यादा है ,उनकी दुकान राज्य मंत्री के नाम पर भी चलनी शुरू हो गई है ,यदा-कदा वे अपने फोटो खींचवा कर छपवा भी देते हैं और बड़े ही गोपनीय तरीके से दर्जा धारी राज्य मंत्री की चिट्ठी देहरादून से ले कर आ गए हैं ,और किसी को पता भी नहीं चला , राज्य में इस तरीके के कई दर्जाधारी राज्य मंत्री बनाए गए हैं जिनका अपने क्षेत्र में ही कोई वजूद नहीं है ।लेकिन पता नहीं किस जुगाड़ से यह लोग राज्य मंत्री की चिट्ठी लेकर आ जाते हैं और फिर जनता पर और सरकारी कर्मचारियों पर रोब झाड़ते है ।

