हरिद्वार। साधु संतों की सर्वोच्च संस्था अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष होना अपने आप में बहुत ही गौरव की बात होती है। काफी समय से अखाड़ा परिषद के चुनाव नहीं हुए हैं लेकिन हरिद्वार में ही निरंजनी अखाड़े के महंत रवींद्र पुरी जी अपने आप को अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष बताते हैं ,वही हरिद्वार के ही कनखल में महानिर्माणि अखाड़े के महंत रवींद्र पुरी भी अपने आप को अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष बताते हैं दोनों ही अध्यक्षों का नाम भी एक है लेकिन कनखल वाले रवींद्र पुरी जी सार्वजनिक रूप से कभी अपने को अध्यक्ष नही बताते है।

महंत ज्ञानदास 2010 कुंभ में अध्यक्ष
महानिर्माणि अखाड़े कनखल वाले के मुकाबले निरंजनी अखाड़े के महंत रविन्द्र पुरी ज्यादा तेज हैं ।और पैसे के बल पर वह ज्यादातर चीजों को खरीद लेते हैं ,पैसे की वैसे तो दोनों ही अध्यक्षों के पास कमी नहीं है, लेकिन निरंजनी अखाड़े वाले रवींद्र पुरी पैसा खर्च करने में माहिर है ।और पैसा खर्च कर वे सब कुछ प्राप्त कर लेते हैं।

रविन्द्र पूरी ,निरंजनी अखाड़ा, अध्यक्ष
13 अखाड़ों में किसके साथ ,कितने अखाड़े।हरि गिरी भी 20 वर्षों से चले आ रहे है महामंत्री।
अखाड़ा परिषद में 13 अखाड़े हैं जिनमें से बताया जाता है की 6 अखाड़े निरंजनी अखाडे वाले रवींद्र पुरी जी के साथ हैं। और सात अखाड़े कनखल वाले रवींद्र पुरी जी के साथ हैं ।लेकिन निरंजनी अखाड़े वाले रवींद्र पुरी का कहना है की उनके साथ आठ अखाड़े हैं और कनखल वाले रवींद्र पुरी के पास मात्र पांच अखाड़े हैं। ऐसे में जब अभी तक चुनाव ही नहीं हुए हैं ।

रविन्द्र पुरि ,महानिर्माणि अखाड़ा ,कनखल
तो यह तय कैसे हो सकता है कौन अखाड़ा किसके साथ है ।लेकिन निरंजनी अखाड़े वाले महंत रवींद्र पुरी पैसे के बल पर पिछले प्रयाग कुंभ में भी अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष कहलाए जाते रहे ।और कनखल वाले रवींद्र पुरी जी चुपचाप अपने अखाड़े में बैठे रहे।जूना अखाड़े के सुप्रीमो हरि गिरी जी भी 20 वर्षों से महामंत्री चले आ रहे है।

बाबा हठ योगी
बाबा हठ योगी दे चुके है नोटिस
हरिद्वार के ही बाबा हठ योगी जो अखाडा परिषद के प्रवक्ता भी रह चुके है, ने बाकायदा एक एप्लीकेशन देकर निरंजनी वाले अध्यक्ष जी से अध्यक्ष होने का प्रमाण मांगा था जो आज तक हठ योगी जी को नहीं मिला हैं ।बाबा हठ योगी का कहना है कि जब अखाड़ा परिषद के चुनाव ही नहीं हुए हैं तो अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष लिखने का क्या औचित्य है।कोई कुछ कहे निरंजनी अखाड़े वाले रविन्द्र पूरी तो अपने को अध्यक्ष मानते ही है।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के जलवे।2010 में हरिद्वार कुंभ के दौरान अध्यक्ष रहे महंत ज्ञानदास ने बैरागी कैम्प में करोड़ो रु की जमीन पर कब्जा कर बना दिया है, हनुमान मंदिर।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष का पद , सत्ता के शीर्ष नेताओं के समीप पहुंचने का रास्ता खोल देता है, मुख्यमंत्री हो या केंद्र के तमाम मंत्री हो या प्रधानमंत्री सब अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष की चरण वंदन करते हैं, इसीलिए अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष बने रहने के लिए कुछ साधु एड़ी चोटी का जोर लगा देते हैं। हमारे निरंजनी अखाड़े वाले रवींद्र पुरी जी इस मामले में कामयाब दिखाई देते हैं।

क्योंकि कनखल वाले अध्यक्ष जी पैसे खर्च करने में थोड़े कंजूस है। इसीलिए वे भले ही अलग रहते हैं। लेकिन साधू संत कनखल खेमे के साथ ज्यादा है।2010 के हरिद्वार कुंभ में अध्यक्ष रहे ज्ञानदास ने रातो रात बैरागी कैम्प में करोड़ों की सरकारी भूमि पर कब्जा कर हनुमान मंदिर का निर्माण कर दिया, जिसको आज तक ज्ञानदास के कब्जे से मुक्त नही कराया जा सका है।

मुख्यमंत्री, पुष्कर सिंह धामी
अब कल ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हरिद्वार प्रवास के दौरान कनखल वाले रवींद्र पुरी जी के अखाड़ा परिषद के नेतृत्व में कई दर्जन साधुओं का एक दल हरिद्वार डैम कोठी पर मुख्यमंत्री से मिला और मुख्यमंत्री के कार्यों की प्रशंसा की, मुख्यमंत्री ने भी साधु संतों का खुले दिल से स्वागत किया और उनका आशीर्वाद लिया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इन मामलों में काफी उदार व पूजा पाठी होने के साथ ही साधु संतों का सम्मान करने वाले मुख्यमंत्री माने जाते हैं ।अब पता नही अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष का कब होगा चुनाव, लेकिन जब भी होगा बनेंगे निरंजनी वाले रविन्द्र पुरी ही।क्योकी निरंजनी वाले पैसा खर्च करने से पीछे नही हटते है।

