29 Mar 2026, Sun

उत्तराखंड कांग्रेस को लेकर राहुल गांधी क्या गंभीर हो सकेंगे। राहुल गांधी के अनुसार अब लंगड़े घोडो को बर्दाश्त नहीं किया जा सकेगा। उत्तराखंड के किन-किन लोगों को वह लंगड़ा घोड़ा मानते हैं यह तो राहुल गांधी को ही तय करना होगा।

kamakhyanews

देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस की हालत इस समय यह है कि अगर राहुल गांधी की बात मानी जाए तो उत्तराखंड के कांग्रेसी नेताओं में सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत हरिद्वार में राजनीति करने वाले रामयश सिंह मुरली मनोहर ,संतोष चौहान जैसे कई अन्य नेता जिनसे न तो सही तरीके से खड़ा हुआ जाता है ना ही यह लोग सही तरीके से चल फिर सकते हैं लेकिन इनका मोहपद प्राप्त करना व सत्ता की सर्वोच्च कुर्सियां प्राप्त करने में ही लगा रहता है ।क्या इस तरीके के लोगों को राहुल गांधी लंगड़ा घोड़ा मानते हैं या नहीं हम तो इनको लंगड़ा घोड़ा नहीं कह पाएंगे।

लेकिन यह लोग अब कांग्रेस के लिए केवल संरक्षक के रूप में ही उत्तराखंड में काम करें तो ज्यादा अच्छा रहेगा है । उत्तराखंड ने यदि कॉंग्रेस को जिंदा रखना है तो अब युवाओं को ही आगे लाना कांग्रेस के हित में होगा ।वैसे तो कांग्रेस का अब यह हाल हो गया है कि उत्तराखंड में जल्दी से कांग्रेस आने की स्थिति में नहीं है क्योंकि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी धीरे-धीरे राज्य की जनता को आकर्षित करने के लिए कुछ अच्छे कार्य कर रहे हैं ।और रही बात कांग्रेसियों की तो यह कांग्रेसी आपस में ही लड़ने एक दूसरे की छीछालेदर करने व एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाने से ज्यादा और कुछ नहीं करते हैं ।जब कांग्रेस की सरकार राज्य में रही तब सभी मंत्रियों ने जमकर मलाई चाटने में कोई कसर नही छोड़ी। यह भी किसी से छुपा हुआ नहीं है। इसको लेकर भी राज्य की जनता गंभीरता से कांग्रेस के ऊपर फिलहाल तो विचार करती हुई दिखाई नहीं दे रही है सबसे ज्यादा नुकसान अगर उत्तराखंड में कांग्रेस को किसी ने पहुंचाया है तो वह है पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ,हरीश रावत एक ऐसे नेता हैं जिन्हें इस राज्य में केवल अपने अलावा अपनी पत्नी अपनी पुत्री और अपने पुत्र के अलावा अन्य कोई नेता दिखाई नहीं देता है वर्तमान में हरीश रावत की पुत्री हरिद्वार ग्रामीण से विधायक हैं लेकिन 2027 में होने वाले चुनाव में उनका भी पत्ता साफ हो जाएगा यह बिल्कुल सत्य माना जा रहा है क्योंकि जिस तरह की कार्यशैली हरीश रावत की विधायक पुत्री की है उस तरह की कार्यशैली को आम जनता स्वीकार नहीं करती है ।

राहुल गांधी को चाहिए की उत्तराखंड की समीक्षा कायदे से करवा कर यहां अगर कांग्रेस को जिंदा रखना है ।तो किसी असरदार युवा को ही यहां का प्रभार सौंपा जाए क्योंकि वर्तमान में कांग्रेस के अध्यक्ष भी अपने हिसाब से उत्तराखंड में राजनीति करते हैं और इस राजनीति में वह अपना नफ़ा नुकसान भी देखते हैं हम यही कह सकते हैं कि 2027 के चुनाव में यदि कांग्रेस को बीजेपी का मुकाबला करना है तो अभी से कुछ कड़े कदम राहुल गांधी को उठाने होंगे अन्यथा । भाजपा के वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तो कांग्रेस को 2027 में चुनाव में धूल चटाने की रणनीति तय करनी शुरू कर दी है।

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