15 Feb 2026, Sun
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द्वितीय हरितालिका तीज महोत्सव पर महिलाओं ने लोकगीतों पर किया नृत्य

हरिद्वार। गोरखाली माहिला कल्याण समिति एवं हाम्रो स्वाभिमान ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में बैरागी कैंप स्थित बड़े उमा महेश्वर परमार्थ आश्रम में हरितालिका तीज के उपलक्ष्य में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। हरिद्वार के अलावा देहरादून, रायवाला, ऋषिकेश, डोईवाला, रुड़की, छिदरवाला, मोतीचूर और गाजीवाला से भी सैकड़ों गोरखाली महिलाएं और पुरुष कार्यक्रम में शामिल हुए।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि शालू जैन और अजय जैन तथा विशिष्ट अतिथि सोनिया राठौर और अरविन्द राठौर द्वारा दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना एवं गणेश वंदना के साथ किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं ने पारंपरिक लोकगीतों आयो तीज को रहर आयो बरिलई, चींटीका भाछुरे, मत ढले ढले, यो तीज को महीना, साल को पात टपरी और कुटुम कुटुम सुपारी दाना भन्नु भो स्वामी ले म त मसककै पर सामूहिक नृत्य प्रस्तुत कर वातावरण को उल्लासमय बनाया। गोरखाली महिला कल्याण समिति की अध्यक्ष पदमा पाण्डेय और महामंत्री शारदा सुवेदी ने भी मंच साझा किया।

इस दौरान गिरवर नाथ जनकल्याण धर्मार्थ ट्रस्ट के अध्यक्ष कमल खड़का और लोकनाथ सुवेदी ने कहा कि गोरखाली समाज में तीज से पहले बेटियों, बहनों और भाभियों को मायके बुलाने की सदियों पुरानी परंपरा है। तीज के दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। इस पर्व में पारंपरिक पकवान, वेशभूषा और लोकनृत्य विशेष आकर्षण का केंद्र होते हैं। मुख्य अतिथि शालू जैन और अजय जैन ने कहा कि गोरखाली समाज अपनी संस्कृति और परंपराओं को बड़े गौरव से संजोए हुए है।

 

ऐसे आयोजन समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करते हैं। विशिष्ट अतिथि सोनिया राठौर और अरविन्द राठौर ने कहा कि हरितालिका तीज केवल त्योहार नहीं बल्कि महिलाओं के आस्था, श्रद्धा और परिवारिक एकता का प्रतीक है। आने वाली पीढ़ियों को इस संस्कृति से जोड़ना समय की जरूरत है। अध्यक्ष पदमा पाण्डेय और शारदा सुबेदी ने कहा कि हरिद्वार में लगातार बढ़ते गोरखाली समाज के बीच तीज जैसे पर्व आपसी मेल जोल और अपनी पहचान को सहेजने का अवसर देते हैं।

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