हरिद्वार ।
नरेश गुप्ता
डांक काँवड़ समाप्ति की ओर,डांक काँवड़ का कोई विधान नही,लेकिन शिव भक्तों की अपनी आस्था।
सावन मास में हरिद्वार में लगने वाला काँवड़ मेला आज साय 6 बजे तक समाप्ति की ओर पहुंच जाएगा। डाक कांवड़ अपने अपने नगरों और कस्बों की तरफ निकल जाएगी। हालांकि डाक कांवर का कोई प्रावधान नहीं है ।लेकिन भोले के भक्त जो नियम बनाकर बाबा भोलेनाथ की आराधना करें वह कम है ।डाक काँवड़ ले जाना कोई हंसी मजाक नहीं है।एक डांक काँवड़ का खर्चा लाखों रु में आता जिसको कांवड़ियों की टोली आपस मे बांट लेती है। डाक कांवरिये जो बाकायदा एक ट्रक में जनरेटर, डीजे के अलावा तमाम खाने की चीज लेकर चलते हैं इन डाक कांवरियों की टोली में 20 से लेकर 30 युवा लड़के होते हैं इन युवा लड़कों को काँवड़ लेकर आने से पूर्व एक महीने तक ट्रेनिंग दी जाती है। और इनकी मजबूती के बारे में परख की जाती है । यह कांवड़िए रास्ते में किसी भी लंगर या किसी भी जगह भोजन नहीं करते हैं । और न ही उपद्रव व लड़ाई झगड़ा करते है।

खाना बनाने के लिए हलवाई भी लाते है, सभी कांवड़िए एक जैसी नई ड्रेस गंगा सनान कर धारण करते है।
डांक कांवड़िए अपना भोजन बनाने के लिए हलवाई साथ लेकर आते है। खाने का सामान बनाने के लिए सभी बर्तन होते हैं कुछ चीज जैसे दूध हो या सब्जी हो या और कोई और चीज हो तो वह बाजार से खरीद लेते हैं कभी-कभी इनको गैस का सिलेंडर भी खरीदना पड़ता है ।उसके बाद यह लोग हर की पैड़ी पर गंगा स्नान करते हैं और सभी लोग एक जैसे वस्त्र धारण कर भगवान भोलेनाथ की जयकार करते हुए अपने-अपने नगरों की ओर निकल पड़ते हैं ।
मोटरसाइकिल व साइकिल दौड
मोटरसाइकिल और साइकिल वाले शिव भक्तों को भी देखकर लगता है कि यह भी कोई विचित्र परंपरा है।लेकिन यह परंपरा भी करीब दो दशक से चली आ रही है। साइकिल से जल लेकर जाने की बात तो समझ में आती है लेकिन मोटरसाइकिल के साइलेंसर निकाल कर और बाकायदा रिले रेस की तरह दौड़ना यह एक नया ट्रेंड शिव भक्तों की खोज है। ।
आज साय तक निकल जाएंगे डांक कावड़िये।
आज शाम तक डाक काँवड़ हरिद्वार से निकल जाएगी। लेकिन मोटरसाइकिल और साइकिल वाले कांवरिये सारी रात और कल सुबह तक चलते रहेंगे कल बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक व रुद्राभिषेक होगा देश भर के सभी शिवालयो में सुबह से ही भीड़ लगनी शुरू हो जाएगी और सभी लोग बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे ।

हरिद्वार से पवित्र गंगा जल ले जाकर बाबा का जलाभिषेक करने का विशेष महत्व।
गंगा व शिव का अटूट बन्धन है।
हरिद्वार से जल लेकर जाने की और अपने-अपने शिवालियों में बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक करने की परंपरा काफी पुरानी है। लेकिन अब इस परंपरा में नई ,नई खोज डवलप हो रही है। जैसे इस बार कांवड़ यात्रा न होकर इसे कलश यात्रा कहा जा सकता है। इस बार अधिकांश कांवरिये 51 से लेकर 101किलो जल तक लेकर जा रहे थे ,यह अजीब परंपरा शिव भक्त कांवरियों ने निकाली है। जो देखने में विचित्र लगी, हर बार मेले में आने वाले शिव भक्त कांवरिये कुछ ना कुछ नया कर दिखाते हैं ।जिससे अगली बार कांवड़ियों की सेवा की तैयारीया जिला प्रशासन करता है।
बाबा भोलेनाथ सावन में रहते है, अपनी ससुराल हरिद्वार की उप नगरी कनखल।
सावन मास में कहा जाता है की बाबा भोलेनाथ कनखल स्थित अपनी ससुराल में विराजमान रहते हैं ससुराल में बाबा भोलेनाथ दक्ष मंदिर में दकेश्वर महादेव के रूप में दर्शन देते हैं यहां आने वाले शिव भक्त कांवरिया गंगाजल लेने हरिद्वार से तो आते ही हैं ।लेकिन कनखल में भी बाबा भोलेनाथ की ससुराल दक्ष मंदिर पर दर्शन करने दकछेश्वर महादेव पर जल चढ़ाने के लिए अवश्य आते हैं इसलिए कनखल के दकछेश्वर महादेव का भी काफी महत्व है।

रातो रात पत्थर के बन जाते है इंसान।
कहा जाता है कि हरिद्वार में पत्थर के इंसान बन जाते हैं यह बात सही है कि वास्तव में रातों-रात यहां लाखों की तादाद में श्रद्धालु पहुंच जाते हैं ।इस समय आप हर की पैड़ी या पूरे शहर में कहीं भी निगाह दौड़ाएंगे तो आपको तिल रखने की जगह नहीं मिलेगी हालत यह है ।की चारों तरफ केसरिया परिधानों में लिपटे केवल और केवल कांवरिये ही नजर आ रहे हैं। और यह जल्दी से जल्दी हरकी पैड़ी पर या कहीं अन्य घाटों पर स्नान कर और बाबा भोलेनाथ के जयकारों के साथ अपनी-अपने नगरों की तरफ जल लेकर निकलने की जल्दी में है।
क्योंकि इनको अपने दूर-दराज शहरों में जाकर बाबा भोलेनाथ का कल23 जुलाई को बाबा का जलाभिषेक भी करना है। आज रात भर मोटरसाइकिल वाले कांवरिये और साइकिल वाले कांवड़िए चलेंगे। इन कांवरियों के लिए जो सामान यह काँवड़ के लिए यहां से खरीदते हैं उनके लिए सारी रात हरिद्वार के बाजार खुलते हैं ।जिला प्रशासन भी कांवरियों की सुरक्षा के लिए निगाह बनाए रहता है ।और कांवरियों को किसी प्रकार की दिक्कत ना हो व शांतिपूर्ण , व सोहार्द पूर्ण तरीके से अपने-अपने नगरों और कस्बो की तरफ गंगाजल लेकर हरिद्वार से प्रस्थान करें ।और बाबा भोलेनाथ से जो मनोकामनाएं मांगी है बाबा उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करें।

