हरिद्वार। नगर निगम के पूर्व एम एन ए वरुण चौधरी द्वारा नगर निगम को एम एन ए रहते हुए सराय स्थित 33 बीघा जमीन खरीदने के नाम पर लगाए गए 58 करोड़ के चपत की जांच कि आच एमएनए के अलावा आधा दर्जन से अधिक नगर निगम के अन्य कर्मचारियों पर भी पड़ी है यह प्रकरण प्रमुखता से चिंगारी ने उठाया था चिंगारी के साथ ही रामेश्वर गौर नामक एक पत्रकार ने भी इस प्रकरण को प्राथमिकता से उठाया था।
उसके बाद वरुण चौधरी ने इन दोनों ही पत्रकारों को खंडन छापने और खण्डन न छापने की एवज में एफआईआर दर्ज करने तक की धमकी दी थी।


लेकिन इस प्रकरण के काफी उछल जाने के बाद क्योंकि यह मामला नगर निगम की मेयर किरण जैसल व पार्षदों की पहल पर ही चिंगारी ने उठाया था और नगर निगम की मेयर ने साफ शब्दों में कहा था कि या तो इस प्रकरण की जांच मुख्यमंत्री से कराएंगे और जरूरत पड़ी तो कोर्ट भी जा सकतके हैं मुख्यमंत्री ने तुरंत इस प्रकरण की जांच के आदेश दे दिए। और जांच वरिष्ठ I A S अधिकारी रणवीर सिंह चौहान को सौंप दी गई रणवीर सिंह चौहान को जांच सोपने के बाद उम्मीद बंधी थी कि अब इस जांच में दूध का दूध और पानी का पानी होगा वही हुआ।

जांच रिपोर्ट रणवीर सिंह चौहान ने जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट सचिव नगर विकास को सौप दी उसके बाद मुख़्य सचिव से होते हुए जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री के पास पहुँची और उसके बाद वरुण चौधरी हरिद्वार के जिला अधिकारी कमरेंद्र सिंह व एसडीएम अजय वीर सिंह की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर इन तीनों के साथ ही नगर निगम के आधा दर्जन से अधिक कर्मचारियों को भी निलंबित किया गया है| इस निलंबन के बाद अब चर्चा यह है क्या यह प्रकरण केवल निलंबिन तक ही सीमित रहेगा या वरुण चौधरी से 58 करोड रुपए की रिकवरी भी कराई जाएगी तथा वरुण चौधरी के विरुद्ध F I R भी दर्ज होगी। इसकी भी प्रतीक्षा राज्य की जनता को है। इस निलंबन के बाद जहां मुख्यमंत्री का राजनीतिक ग्राफ ऊपर गया है ।वही चिंगारी को भी तमाम I A S व आईपीएस अधिकारियों के साथ-साथ शुभचिंतक पत्रकारों की शुभकामनाएं प्राप्त हो रही हैं।

