कब्जे में ट्रस्ट की मूक सहमति दे रही है दिखाई, जमीन कब्जाने के आरोपी ने की है पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग, जमीन कब्जाने के आरोपी की खाईनुमा भूमि में भी अवैध खनन से किये गये भरान का आरोप।
बेशकीमती अमेरिकन आश्रम की संपत्ति को खुर्द बुद्ध करने के पीछे यूँ तो बड़ी साजिश दिखाई पड़ रही है. कब्ज़ा की गई बताई जा रही करीब तीन बीघा भूमि पर की गई बाउंड्री करने वाले अजय कुमार के अनुसार उन्होंने किसी जमीन पर कोई कब्जा नही किया है , इसकी किसी भी स्तर पर जाँच करा ली जाए, अजय कुमार के अनुसार अभी उनकी 3 हजार फुट जमीन कम है यदि जांच में पाया जाता है की हमने जमीन कब्जाई है तो हम वापस करने के लिए तैयार है। उधर छेत्र के काफी लोग जमीन कब्जाने की बात कह रहे हैं।
उधर अमेरिकन आश्रम ट्रस्ट के कर्ता धर्ता भी इस प्रकरण में चुप्पी साधे हुए हैं, यह अपनेआप में हैरानी की बात है. चर्चा यह है कि कब्जे को लेकर मूक सहमति दी गई है, लिहाजा कोई लिखित पढ़त संपत्ति को लेकर नहीं की गई है।

भूपत वाला क्षेत्र में स्वामी देवानंद के नाम से बने इस आश्रम की कुल मलकियत 26 बीघा के आसपास बताई जाती है. 50 के दशक में वजूद में आए इस आश्रम पर फिलहाल कुछ लोगों की गिद्ध दृष्टि गढ़ी हुई है। जिसमें कई गेरुआ वस्त्र धारी भी हैं।
इन गेरुआ वस्त्र धारियों का पूरा सिंडिकेट है जो खाली पड़ी जमीनों पर कब्जे करने में माहिर है, पिछले कई वर्ष से आश्रम के ट्रस्ट की मुख्य कर्ताधर्ता कनेडियन महिला विदेश गई हुई है,तब से उनका कोई अता-पता नहीं है. उसकी अनुपस्थिति में ट्रस्ट का कौन संचालन कर रहा है, यह भी फिलहाल स्पष्ट स्थिति नहीं है। लेकिन संत समाज के कुछ चर्चित चेहरे ट्रस्ट के पदाधिकारी होने का दावा जरूर करते हैं.
ताजा तरीन मामले के अनुसार . कावड़ यात्रा के दौरान ट्रस्ट के पिछले हिस्से में करीब तीन बीघा भूमि पर एकाएक चारदीवारी कर ली गई.जिस अजय कुमार पर जमीन कब्जाने का आरोप है, उसकी जमीन से सटी हुई कब्जाई हुई जमीन है. अजय कुमार जमीन कब्जाने की बात से इनकार कर रहे हैं।

करोड़ों रुपए की अमेरिकन आश्रम की भूमि को खुर्द बुर्द करने को लेकर एक बड़ी डील की चर्चा भी हवा में तैर रही है. हैरानी की बात यह है कि ट्रस्ट के पदाधिकारी होने का दावा करने वाले संत महज शिकायत करने तक ही सीमित है. आखिर दीवार कैसे खड़ी हो गई? यह अपने आप में बड़ा सवाल है.दिनदहाड़े कैसे बेश कीमती भूमि पर कोई ट्रस्ट कब्ज़ा होने दे सकता है. ट्रस्ट के पदाधिकारी आखिर कहां थे और क्या कर रहे थे?
उन्होंने विरोध क्यों नहीं किया? ट्रस्ट के पदाधिकारी होने का दावा करने वाले सभी चेहरे सत्तारूढ़ दल में बेहतर पकड़ रखते हैं. फिर भला इतनी आसानी से कोई कब्जा कैसे कर लेगा.बताया जाता है कि कब्जे को लेकर पूरी तरह से मूक सहमति दी गई है. किसी सोलंकी नाम के व्यक्ति ने यहां दुकानें भी बनानी शुरू कर दी हैं। स्वामी राम विशाल देव ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर मामले की जांच कराने का आग्रह किया है। हम तो यही कहेंगे की इसकी सरकार जांच कराए यदि इस बेशकीमती भूमि का कोई सही मालिक नही है तो ये संपत्ति राज्य सरकार में निहित की जाए।

