12 Feb 2026, Thu
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अम्रत कुम्भ 2025 ,किसी का ग्राफ घटा,किसी का बढ़ा।

वर्ष 2025 में प्रयागराज में हुआ अम्रत महाकुंभ ,
कुंभ मेलो के इतिहास में हमेशा याद किया जाता रहेगा ।इस बार के कुंभ में कई विचित्र घटनाएं घटीं जो कुंभ पर्वो के इतिहास में मिशाल बन गई है।

इस कुंभ में करोड़ों श्रद्धालु पवित्र संगम के जल में अमृत स्नान करने के लिए पहुंचे । लेकिन ज्यादातर लोग जैसे तैसे जहां जगह मिली वहीं स्नान करके अपने अपने घरों पर वापस पहुंच गए वे लोग भाग्यशाली थे ।और जो इस अव्यवस्थित मेले में हुई घटना में जहां अनगिनत लोग काल के गाल में समा गए । एक युवा साधु के अनुसार उनकोमोक्ष की प्राप्ति हुई ।उनके परिजन आज भी रोते बिलखते अपने परिजनों की तलाश में भटकते फिर रहे है।

योगी आदित्यनाथ का ग्राफ नीचे

इस कुंभ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक ग्राफ जो पहले जिस तेजी से बढ़ रहा था इस कुंभ के बाद वह ग्राफ उतनी ही तेजी से नीचे आ गया है। इस कुंभ में हुई अव्यवस्थाओ और वीआईपी लोगों को महिमा मंडित करने में योगी आदित्यनाथ की इमेज में फर्क पड़ा है। कितने लोग इस कुंभ में मोक्ष को प्राप्त हुए हैं। इसका कोई आंकड़ा राज्य सरकार ने प्रस्तुत ही नहीं किया है। मात्र 30 लोगों की मौत की घोषणा कर मेला छेत्र में बनाई गई मोर्चरी पर पुलिस का पहरा बैठा दिया गया था । घटना स्थल से फटाफट आनन फानन में भारी मात्रा में जूते चप्पल व कपड़ों को ,सफाई कर्मचारियों द्वारा साफ करा कर मां गंगा को अर्पित कर दिया गया ।कुंभ में लोगों को 15 से 20 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा पानी पीने तक के लिए उनको नसीब नहीं हुआ। रहने की तो इन मिडिल क्लास को कल्पना करना भी स्वपन था। जहां स्थान मिला वही लेट गए ।

 

कैलाशानन्द व चिदानन्द का जलवा

इस अमृत कुम्भ में निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलसानंद जी का ग्राफ तेजी से बड़ा है । पूरे कुंभ मेले का आकर्षण हरिद्वार के कैलाशानन्द गिरि जी ही रहे कैलाशानन्द गिरि जी ने देश के चोटी के उद्योगपति अंबानी परिवार को जिस तरीके से गंगा स्नान करा उन्हें मालाएं भेंट की ऐसा लगता था की अंबानी परिवार स्वामी जी का बहुत पुराना मुरीद है ।दूसरे नंबर पर परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के स्वामी चिदानंद जी महाराज की आध्यात्मिक दुकान भी ठीक-ठाक चलती देखी गई। इन संतों ने कुंभ में हुई घटनाओं को कोई खास घटना न बताते हुए मामूली सी घटना बताया निरंजनी अखाड़े के प्रमुख व अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी जी तो इतनी बड़ी घटना को मामूली घटना बताते हुए इसे कुछ लोगों का षड्यंत्र घोषित करने में लगे रहे। वहीं हमारे देश के मीडिया चैनलों ने भी अपना कर्तव्य पूरी तरीके व पूरी निष्ठा के साथ निभाते हुए जो स्क्रिप्ट उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लिखकर उन्हें दे दी गई वही स्क्रिप्ट पढ़कर देश-विदेश की जनता को खुलकर गुमराह किया । पत्रकारों को चौथा स्तंभ कहा जाता है ।लेकिन इन्हें इतनी लाज नहीं आई की कुंभ की जो घटना हुई है यह घटना कोई मामूली घटना नहीं है संपूर्ण विवरण ना देते हुए छोटी-मोटी ही सही घटना तो कम से कम आम जनमानस को बता दी जाय। लेकिन इन चैनल वालों को किसी के दुख दर्द और मौतों से कोई लेना-देना नहीं। मैने भी 22 वर्ष ज़ी न्यूज़ में कार्य किया है।कई कुम्भ कवर किये है।लेकिन ऐसा मीडिया का रूप कभी नही देखा।राहुल सिन्हा जी के साथ भी काम किया लेकिन कभी इस तरह से खबरों को छुपाया नही गया।लेकिन राहुल सिन्हा जी की अब क्या मजबूरी है ये वही जानते होंगे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुंभ की घटना में 30 श्रद्धालुओं की मौत की घोषणा करते हुए।साधु सन्तो ने जिस स्नान को रोक दिया था। मुख्यमंत्री ने सन्तो को स्नान करवाया और स्नान करने जा रहे साधु संतों के ऊपर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा कराई गई ।

महा कुंभ का मुख्य आकर्षण रहीं रूपवान साध्वी।

यह मेला महिला साध्वियों को लेकर भी जाना जाएगा कुंभ मेले के पहले अमृत स्नान पर निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाश आनंद जी के काफिले में महामंडलेश्वर वाले रथ पर बैठकर उनकी शिष्या हर्षा रिछारिया नामक सुंदरी को संगम स्नान करने जाते हुए देखकर मीडिया कर्मी इस सुंदरी के पीछे दौड़ पड़े और रूपवान साध्वी का इंटरव्यू ही कुंभ स्नान से ज्यादा प्राथमिकता बन गया। और इस कुंभ के पहले शाही स्नान जिसे अमृत स्नान कहा गया था उसमे संतों का स्नान तो फीका पड़ गया और कुंभ की पुरी शोभा हर्षा रिछारिया बन गई ।मात्र एक दिन में ही हर्षा विश्व प्रसिद्ध हो गई। बाकायदा मैडम कुंभ में अपने साथ एक ब्यूटीशियन लेकर गई थी। व उन्होंने अपने साध्वी वाले रूप को बनाने के लिए अपने सिर पर नकली बाल
लगा लिए थे ।हर्षा रिछारिया को लेकर कुंभ नगरी प्रयागराज में साधु संतों में काफी चर्चाएं चलती रही और ज्यादातर साधुओं ने कैलाश आनंद जी के काफिले में महामंडलेश्वर वाले रथ पर बैठकर हर्षा को स्नान कराने ले जाने को लेकर सन्तों ने अमर्यादित बताया व स्वामी जी की काफी आलोचना की गई ।लेकिन स्वामी जी की आलोचना होने के बाद स्वामी जी ने अपनी इस परम शिष्य सुंदरी हर्षा को अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी जी के कैंप में भेज दिया। रवींद्र पुरी जी हर्षा रिछारिया को देख गदगद हो गए और उन्होंने हर्षा को अपनी बेटी बताते हुए घोषणा कर दी की अब अगला अमृत स्नान वे हर्षा को अपने साथ ले जाकर संगम में करायेंगे |

रवींद्र पुरी के इस बयान के बाद प्रयागराज में मौजूद साधु संत उग्र हो गए और उन्होंने भी घोषणा कर दी की हम भी देखते हैं कि रवींद्र पुरी ,हर्षा को कैसे स्नान करानेअपने साथ संगम ले जाते हैं ।उसके बाद हर्षा कुंभ क्षेत्र छोड़कर चली गई ।लेकिन इस कुंभ में जहां हुई दुर्घटना याद की जाती रहेगी वहीं निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाश आनंद जी की इतनी आलोचना के बाद भी उनकी प्रसिद्धि का ग्राफ जिस तेजी से बड़ा है वह किसी अन्य साधु का ग्राफ इतनी तेजी से नहीं बढ़ पाया है। वो भी याद किया जाता रहेगा।

यह कहा जाय की पूरे कुंभ का पूर्ण जलवा स्वामी कैलाशानन्द गिरि जी के हिस्से में ही गया है ।तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी उसके बाद दूसरे नंबर पर परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के प्रमुख स्वामी चिदानंद जी की दुकान भी शानदार तरीके से चली कैलाश आनंद जी के साथ ही अंबानी परिवार चिदानंद जी के कैंप में भी उनका आशीर्वाद लेने पहुंचा था ।इस बार जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी शांत रहे और अवधेशानंद जी ने योग गुरु बाबा रामदेव के साथ पूर्ण वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ गंगा जी की पूजा कर गंगा स्नान किया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने जहां मेले में 65 करोड लोगों के स्नान करने की बात कही है तो 65 करोड़ की बात तो किसी के गले नहीं उतर रही है लेकिन इतना अवश्य है की इस महाकुंभ में अमृत स्नान करने के लिए करोड़ों लोग पहुंचे और इनमें से अधिकांश लोग मेले से रोते-पीटते हुए वापस लौटे और अपने घर पहुंच कर उन्होंने कान पकड़ लिए की अब इतनी भीड़ में वे स्नान करने जाने से अच्छा अपने घर में ही स्नान करना उचित समझेंगे ।

वी वी आईपियों का कुम्भ

यह कुंभ मेला अतिविशिष्ट लोगों के स्नान के लिए जरूर जाना जाएगा जब भी कुंभ मेला या कोई बड़े मेले होते हैं उनमें कोई दुर्घटना होती है ।तो दुर्घटना के बाद बाकायदा एक जांच कमेटी बनाई जाती है। और जांच कमेटियों की रिपोर्टोओ में साफ शब्दों में लिखा होता है की इस तरीके के विशाल मेलों में वीआइपी यो को नहीं आना चाहिए ।और यदि कोई वीआईपी आता भी है तो वह सामान्य रूप से आए आम जनता की तरह स्नान करके वापस चला जाए ।लेकिन इस महाकुंभ में तो मानो पूरे देश के अतिविशिष्ट लोग में अमृत स्नान कर अमरत्व को प्राप्त करने की होड़ लग गई थी। छोटे-छोटे मंत्रियों से लेकर प्रधानमंत्री ,राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, गृहमंत्री, रक्षा मंत्री कई राज्यों के मुख्यमंत्री विदेशी मेहमानो ने भी अमृत स्नान कर अमरत्व को प्राप्त कर लिया है। व सभी अतिविशिष्ट मेहमान मानो अमर हो गए हो । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तो महाकुंभ में अनेक बार अमृत स्नान किया और यह अमृत योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक ग्राफ को अब कहां तक पहुचाता है यह भविष्य के गर्भ में छिपा है । लेकिन आम जनमानस का मानना है की जिस तेजी से इस कुंभ से पहले योगी आदित्यनाथ का ग्राफ बढ़ रहा था। उसी तेजी से इस कुंभ मेले के बाद योगी आदित्यनाथ का ग्राफ नीचे आ गया है। अब योगी आदित्यनाथ इस बात को माने या ना माने।

 

कुंभ मेला साधु संतों का मेला माना जाता है।लेकिन इस अम्रत कुम्भ में जिस तरह से पहले साधु संतों के कैंपों में आध्यात्मिक प्रचार प्रसार सनातन धर्म का प्रचार व धार्मिक कथाओं का आयोजन हुआ करता था ।इस बार के प्रयाग कुंभ मेले में मानो ऐसे आयोजन लुप्त हो गए हो दिखाई जो पड़ा इस बार साधु संतों में केवल इस बात की होड़ थी की उनके कैंप में देश के बड़े उद्योगपति व शीर्ष राजनेताओं के साथ ही फिल्मी हस्तिया कैंप में कैसे पहुंचे । तथा कौन उद्योगपति उनके कैंप में जाकर उनके कैंप की शोभा बढ़ाएं और उनका प्रचार हो और जब देश के चोटी के उद्योगपति कैंप में आएंगे और महाराज जी के दर्शन करेंगे तो दक्षिणा भी महाराज जी को मोटी ही मिलेगी ।तो यहां पर अब कुंभ मेले को उद्योग मानकर साधु संतों ने भी बड़ी-बड़ी दुकानें सजाई जिन्हें कैंप कहा जाता है।

इन कैंपों को सजाने संवारने में करोड़ों रुपए खर्च किए गए लेकिन यह करोड़ों रुपए बेकार नहीं गए । क्योकि उद्योगपतियों व फिल्म स्टारों ने साधु संतों के कुंभ मेला में लगे कैम्पों में पहुंचकर पूरी कर दी । बड़े कैंप कैलाश आनंद जी स्वामी चिदानंद मुनि वअवधेशानंद जी के कैंप देखने लायक थे ।जहाँ 7 स्टार होटल जैसी सुविधा उपलब्ध थी अब 7 स्टार होटल का किराया ही आप समझ ले कितना होता है । कुंभ मेले में 7 स्टार सुविधा के साथ संगम में अमृत स्नान करने का मौका मिले तो उद्योगपतियों व फिल्म स्टारों को अपनी जेब ढीली करने में कोई दिक्कत नहीं हो सकती थी इसलिए दो-तीन संतों की दुकान यहां बहुत ही शानदार तरीके से चली जिसके लिए साधु संत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आशीर्वाद देते हुए नहीं थक रहे हैं।

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