25 May 2026, Mon

आर्य समाजियों ने भव्य शोभायात्रा निकालकर महर्षि दयानंद के सिद्धांतों का दिया संदेश

शोभायात्रा के दौरान केसरिया रंग से रंगी रही हरिद्वार धर्मनगरी, ओइम के उच्चारण के साथ यज्ञ के माध्यम से दी जाती रही आहूतियां

हरिद्वार। आर्य उप प्रतिनिधि सभा हरिद्वार उत्तराखंड की ओर से महर्षि दयानन्द सरस्वती की 200वीं जयंती व आर्य समाज की स्थापना के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भव्य ”आर्य राष्ट्र निर्माण यात्रा” निकाली गई। जिसके माध्यम से निशुल्क, शिक्षा, सुरक्षा, चिकित्सा, न्याय, चरित्र निर्माण, जनसंख्या समाधान के लिए राज्यपाल के नाम से ज्ञापन जारी किया।

हरिद्वार में निकाली गई शोभायात्रा में आर्य समाज की संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ गुरुकुल एवं स्कूली छात्र—छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। योगगुरू स्वामी रामदेव के साथ समस्त आर्य समाजियों ने महर्षि दयानंद सरस्वती के सिद्धांतों के साथ वेदों को पढ़कर उन्हें अमल में लाने को आह्वान किया।

रविवार को पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद के नेतृत्व में स्वामी दर्शानंद गुरुकुल महाविद्यालय ज्वालापुर हरिद्वार के परिसर में आर्य उप प्रतिनिधि सभा की ओर से ”आर्य राष्ट्र निर्माण यात्रा” से पूर्व हवन—यज्ञ हुआ। इसके बाद मंचासीन अतिथियों ने आर्य समाज के सिद्धांतों के बारे में जानकारी दी।

जिसमें योगगुरू स्वामी रामदेव ने कार्यक्रम में पहुंचे भारी संख्या में आर्य समाजियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वेदों के पथ पर चलो, वेद सनातन मूल है, महर्षि दयानंद नहीं होते तो गुरुकुल ना होते, तमाम विद्वान न होते और आडम्बर खत्म नहीं होते। उन्होंने कहा कि महर्षि ने पूरे देश में जागरूकता की क्रांति पैदा की। उन्होंने कार्यक्रम में भक्ति के लिए जोश भरा। इस दौरान स्वामी रामदेव ने गीत भी गया।

कार्यक्रम संयोजक पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद ने कहा कि आज परिवारों में एकरूपता नहीं है। संस्कृति को भुलाकर पाश्चात्य संस्कृति की भटक रहे हैं, जबकि विश्व में सनातन परंपराओं को अपनाने का काम हो रहा है। इसलिए महर्षि दयानंद सरस्वती के सिद्धांतों के प्रचार के साथ इन्हें अपनाने की जरूरत है।

उन्होंने बढ़ती जनसंख्या, समलैंगिता के लिए सख्त कानून की मांग करते हुए कहा कि देश में शिक्षा, चिकित्सा, न्याय पूरी तरह से निशुल्क हो, ताकि हर कोई देशवासी अच्छा जीवन व्यतीत कर सके। उन्होंने पाश्चात्य के बजाय गुरुकुल पद्धति को अपनाने पर जोर दिया।

हरिद्वार शहर में निकाली भव्य शोभायात्रा के दौरान सड़कें केसरिया रंग के रंग में रंगी रही। शोभायात्रा गुरुकुल ज्वालापुर से शुरू होकर सिंहद्वार, आर्यनगर चौक, वेद मंदिर आश्रम, शंकर आश्रम, चंद्राचार्य चौक से होते हुए रेलवे स्टेशन के सामने शिवमूर्ति से होते हुए तुलसी चौक पर समापन हुआ गुरुकुल के छात्रों ने दिखाई प्रतिभा गुरुकुलों के छात्रों ने शोभायात्रा के दौरान अपनी शौर्य एवं प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

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