12 Feb 2026, Thu
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीसीआर में ली कावड़ मेला को लेकर बैठक, चीफ सेक्रेटरी व डीजीपी के अलावा सभी अधिकारी रहे बैठक में मौजूद, मुख्यमंत्री ने शिव भक्त कांवड़ियों के साथ शालीनता से पेश आने की दी हिदायत।

हरिद्वार। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज हरिद्वार पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीसीआर में कांवड़ मेले को लेकर एक बैठक की इस बैठक में उत्तराखंड के चीफ सेक्रेटरी आनंद वर्धन व डीजीपी भी मौजूद थे साथ ही जनपद के तमाम आला अधिकारी, हरिद्वार के जिला अधिकारी ,वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक व गंगा सभा के अध्यक्ष भी इस बैठक में मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कांवड़ मेले की अब तक की तैयारीयो के बारे में सभी अधिकारियों से बात की और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए की कांवड़ मेले में आने वाले शिव भक्तों के साथ बहुत ही सोहार्द पूर्ण व्यवहार किया जाए। किसी कांवरिये को कोई तकलीफ ना हो।

इस बार काँवड़ मेले के लिए 10 करोड़।

कांवड़ मेले के लिए इस बार राज्य सरकार में 10 करोड़ रूपया प्रदान किया है। इन 10 करोड रुपए को वैसे तो इतने विशाल मेले के लिए ऊंट के मुंह में जरा ही कहा जा सकता है। लेकिन इससे पहले कांवड़ मेले के लिए जिला प्रशासन खुद ही अपने संसाधनों से या शहर के समाजसेवियों के माध्यम से कांवड़ मेला संपन्न कर लिया करता था। लेकिन इस बार राज्य सरकार ने मेहरबानी कर 10 करोड रुपए इस काँवड़ मेला के लिए दे दिए हैं। जिससे मेले में आने वाले कांवरियों के लिए किए जा रहे इंतजारों में कुछ सहयोग मिल सकेगा । मेले में सबसे ज्यादा शौचालय ,सफाई कर्मचारी ,व पीने के पानी की आवश्यकता होती है ।

जिला प्रशासन सतर्क,बिजली ,पानी ,सफाई के अलावा शौचालयों की व्यवस्था पर विशेष ध्यान रहेगा।

इस बार जिला प्रशासन प्राथमिकता के आधार पर जो व्यवस्था करने जा रहा है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के अनुसार सफाई व्यवस्था सुचारू रूप से चलने के साथ ही शौचायलयों व पीने के पानी की भी व्यवस्था पूरे मेला क्षेत्र में की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने की सफाई, लगाया पौधा ।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज हर की पैड़ी जाकर खुद घाटों की सफाई की व वृक्ष भी लगाया। गंगा घाट पर जाकर मुख्यमंत्री ने हरिद्वार आए श्रद्धालुओं के साथ चित्र भी खिंचवाए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जो की पूजा पाठ व धार्मिक आयोजनों में बढ़- चढ़ कर हिस्सा लेते हैं और इन आयोजनों के लिए बढ़ चढ़कर ही दिल खोलकर ही धन की व्यवस्था भी करते हैं मुख्यमंत्री द्वारा की गई आज की बैठक के बाद अधिकारी और सजग और सतर्क हो गए हैं । कांवड़ मेला वैसे तो गुरु पूर्णिमा के बाद 11 तारीख को सावन लगते ही शुरू हो जाएगा लेकिन शिव भक्त कांवड़िए हरिद्वार आना शुरू हो गया है और अपने-अपने नगरों और कस्बो की तरफ जल लेकर लौटने भी लगे है ।

कांवड मेला के पीक टाइम में कांवड़ मेले में प्रकाश व्यवस्था को भी सुचारू रूप से चालू रखा जाएगा। कांवड़ मेला क्षेत्र में भंडारे लगाने वाले लोगों को अपने परिचय पत्र देकर मेला छेत्र में भंडारे चलाने की अनुमति इस मेला प्रशासन से लेनी होगी । राज्य सरकार करीब 7 करोड़ शिव भक्त कांवरियों के हरिद्वार आने की उम्मीद कर रही है ।इन 7 करोड शिव भक्तों के लिए जो प्रबंध किए जा रहे हैं उन्हें तो नाकाफी ही कहा जा सकेगा । अभी तक नहर पटरी व टूटी पड़ी सड़को की मरम्मत भी नहीं हुई है। बड़े बुजुर्गों की कहावत है के जब चूल्हे पर तवा रख दिया जाता है तभी कुछ लोग आटा लेने बाजार जाते हैं यह कहावत हरिद्वार जिला प्रशासन के ऊपर खरी उतरती है ।

विगत 4 महीने से कांवड़ मेले के लिए निरंतर बैठकें अखबारों में बयान बाजी चल रही है कि हम सारी सुविधाएं उपलब्ध करा देंगे ।सड़के ठीक कर देंगे नहर पटरी के दौरे किए जा रहे हैं लेकिन अभी तक धरातल पर देखा जाए तो कुछ नहीं है केवल और केवल कुछ है तो अभी शून्य में ही हम घूम रहे हैं। इतना जरूर कह सकेंगे की जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने मेला क्षेत्र का दौरा कर मेला क्षेत्र में लोगों ने जो अतिक्रमण किया था उसको जरूर हटवा दिया है। जिसको हटवाने के लिए कोई अधिकारी तैयार नहीं था।

क्योंकि इन अतिक्रमण कारीयो से नगर निगम व पुलिस को भारी भरकम दैनिक सुविधा शुल्क प्राप्त होता है और इस भारी भरकम दैनिक सुविधा शुल्क को नगर निगम और पुलिस कर्मचारी किसी भी कीमत पर गवाना नहीं चाहते हैं। जिलाधिकारी ने सारे अतिक्रमण तो नहीं कहे जा सकेंगे लेकिन जो जो अतिक्रमण उनके सामने उनको दिखाई दिए वह उन्होंने हटवा कर नगर निगम व पुलिस के कर्मचारियों के मंसूबो पर पानी फेरी दिया है। अब देखना है यह जो अतिक्रमण हटाया गया है यह कितने दिन हटा रहेगा और कितने दिन के बाद यह अतिक्रमण पुनः स्थापित हो जाएगा क्योंकि इन अतिक्रमण कारियो में ज्यादातर हरिद्वार के नेताओं के व पुलिस वालों और नगर निगम के कर्मचारियों के चहते अतिक्रमण करें बैठे हैं इसलिए कोई बोलता नहीं।

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