
मोबाइल/लैपटॉप में एंटीवायरस एप को बेचने के नाम पर विदेशियों से ठगी करने वाले गिरोह आया दून पुलिस की गिरफ्त में
किराये के फ्लैट में अवैध रूप से कॉल एजेंसी/सेन्टर संचालित कर रहे 05 अभियुक्तो को पुलिस ने किया गिरफ्तार
*अभियुक्तों द्वारा अपने फर्जी नाम अंग्रेजी में रखकर विदेशी नागरिकों से की जा रही थी ठगी*
*मोबाइल/लैपटॉप में एंटीवायरस ऐप लेने के एवज में विदेशी नागरिकों से 100 डालर कीमत का गिफ्ट कार्ड खरीदवाकर मांगा जाता था उसका नम्बर अथवा फ़ोटो*
*गिफ्ट कार्ड मिलने के बाद विदेशी नागरिकों को एण्टी वायरस एप उपलब्ध न कराकर की जाती थी धोखाधडी*
*मौके से पुलिस टीम को 14 मोबाइल फोन, 04 लैपटॉप, 04 चार्जर, 01 आईपैड, 03 लग्जरी वाहन व अन्य उपकरण हुए बरामद*
देहरादून। राजपुर थाना पुलिस को राजपुर क्षेत्र में एक फ्लैट में कुछ लोगो द्वारा अवैध कॉल एजेंसी/सेंटर संचालित किये जाने तथा कॉल सेन्टर के माध्यम से विदेशी नागरिकों व अन्य लोगों के साथ धोखाधडी किये जाने के सम्बन्ध में सूचना प्राप्त हुई। सूचना पर राजपुर पुलिस द्वारा टीमों का गठन किया गया, गठित टीमों द्वारा रात्रि में राजपुर क्षेत्रान्तर्गत आर्चिड पार्क, तरला नागल रोड पर स्थित एक फ्लैट पर फर्जी कॉल एजेंसी/ सेन्टर संचालित करने वाले 05 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया, जिनके कब्जे से 14 मोबाइल फोन, 04 लैपटाप, 01 आईपैड व ठगी हेतु इस्तेमाल किये जा रहे अन्य उपकरण बरामद हुए। पुलिस द्वारा बरामद उपकरणों को कब्जे में लेते हुए मौके से 03 वाहनो को सीज किया गया।

अभियुक्तों से सख्ती से पूछताछ करने पर उनके द्वारा अपना नाम आशीष नागर, अक्षत शर्मा, अंश, राज सिंह, अभिनव सिंह तथा उक्त कॉल एजेंसी/सेन्टर के माध्यम से विदेशी ग्राहकों को उनके फोन/लैपटॉप में एंटी वायरस डालने के नाम से धोखाधड़ी करना बताया गया। गिरफ्तार पांचों अभियुक्तों के विरुद्ध थाना राजपुर पर अभियोग पंजीकृत किया गया।
पूछताछ में मुख्य अभियुक्त आशीष द्वारा बताया गया कि वह पहले नोएडा स्थित एक कॉल सेन्टर में काम करता था, जहां उनके द्वारा विदेशी नागरिको को कॉल कर इसी प्रकार धोखाधडी की जाती थी। 03 माह पूर्व वह उक्त नौकरी को छोडकर देहरादून आ गया तथा देहरादून में अलग-अलग जगहों पर काम करने लगा। काम के दौरान उसके द्वारा एक वर्चुअल मोबाइल नंबर लिया गया था, जिसे उसने बीटीसी बॉस नाम से सेव किया गया था। देहरादून में उसके द्वारा राजपुर क्षेत्र में एक फ्लैट किराये पर लेकर उसमें अपने साथियों के साथ फर्जी कॉल एजेंसी/ सेंटर संचालित किया जा रहा था, जिसके लिए उसके द्वारा विदेशी नागरिकों के करीब 5000 मोबाइल नंबर खरीदे गये थे, जिन्हें वह स्वयं व अपने साथियों के माध्यम से गूगल वॉइस एप के द्वारा कॉल कर उनके फोन मे खराबी होने तथा उसे ठीक करने के एवज में उनके मोबाइल पर एण्टीवायरस एप डाउनलोड करने की जानकारी देते थे तथा एप को उन्हें देने के एवज में उनसे 100 डालर कीमत का गिफ्ट कार्ड खरीदवाकर उसका नम्बर बताने अथवा फोटो मंगाया जाता था, जिसे उनके द्वारा बीटीसी बॉस के नाम से सेव किए गए वर्चुअल नंबर पर भेजा जाता था तथा उसके एवज में उनके खातों में अलग-अलग नंबरों से पैसे आते थे। गिफ्ट कार्ड मिलने के बाद उनके द्वारा केवल कुछ ग्राहकों को ही एंटीवायरस ऐप उपलब्ध कराया जाता था।
उक्त गिफ्ट कार्ड को वे सस्ते दामों में विदेशी नागरिकों को बेच देते थे, जिसके एवज में उनके द्वारा भी उनके खातों में पैसा डाला जाता था। उनके द्वारा जितने भी विदेशी नागरिकों से धोखाधड़ी की गई है, उनमे से अधिकतर अमेरिका तथा कनाडा के है। अपनी कॉल एजेंसी/सेन्टर को उनके द्वारा एक स्थान पर कुछ समय के लिये ही संचालित किया जाता था, जिसके उपरान्त वो जगह बदल देते थे, ताकि पुलिस या किसी अन्य एंजेसी को उनके विषय में कोई जानकारी न हो सके।

