हरिद्वार । नगर निगम घोटाले का यूं तो लगभग पर्दाफाश हो ही चुका है लेकिन अभी इस घोटाले की कुछ कड़ियां विजिलेंस टीम को जोड़नी है 58 करोड़ के इस घोटाले के मुख्य आरोपी आईएस वरुण चौधरी के साथ ही कई अन्य अधिकारी भी सस्पेंड हो चुके हैं अब विजिलेंस टीम इस घोटाले की जो बची हुई कड़िया है उनको जोड़ने का प्रयास कर रही है।
विजिलेंस टीम के लिए इस घोटाले की कड़ियां जोड़ना कोई मुश्किल काम नहीं होगा। सीधा-साधा गेम इसमें एक पटवारी के द्वारा कराया गया है इस पटवारी ने ही भूमि विक्रेता तीनों लोगों को उनके खातों में जो 52 करोड़ रूपया गया है और जिसमें से मात्र 7 करोड़ रूपया इन भूमि विक्रेताओं को मिलना था।

बाकी 45 करोड़ रूपया लौटकर वरुण चौधरी एंड कंपनी को मिलना था इन तीनों लोगों के खाते में से 15 करोड़ रूपया निकल भी चुका है और बैंक में 37 करोड़ रूपया अभी सेफ बचा हुआ है। 45 करोड़ रूपया जैसी भारी भरकम राशि इन तीनों किसानों से वापस लेने के लिए वरुण चौधरी एंड कंपनी कुछ हिचक रही थी । क्योकि वरुण चौधरी सोच रहा था किसानों से इतनी भारी भरकम राशि 45 करोड़ कैसे वापस ली जाएगी।
इसका सेलुशन पटवारी साहब ने निकाल दिया और पटवारी साहब ने जिम्मेदारी ली की इस पैसे की वापसी की जिम्मेदारी मेरी है क्योंकि पटवारी साहब यह कार्य आज से नहीं पिछले 10 साल से करते चले आ रहे हैं कई अधिकारियों के यह चहेते हैं । अधिकांश अधिकारियों का लेनदेन का काम यह पटवारी साहब देखते हैं जिसकी वजह से ही पटवारी साहब आजकल करोड़ों में खेल रहे हैं।

वरुण चौधरी, निलंबित आईएएस घोटाले का मुख्य आरोपी।
उनके साथी एक नायक तहसीलदार और एक अन्य पटवारी भी है जिनसे भी विजिलेंस टीम 143 के मैटर में पूछताछ कर सकती है। क्योंकि 143 करते समय इन दोनों ने भी काफी जल्दबाजी दिखाई थी ।लेकिन जांच अधिकारी की निगाह इन पर नहीं पड़ी इसलिए यह मौज में थे। लेकिन विजिलेंस टीम तो एक-एक चीज बहुत बारीकी से देखनी है और सारी कड़ियों को जोड़ना है।
विजिलेंस टीम के सामने यह खेल या यह घोटाला कोई बहुत पेचीदा घोटाला नहीं है सीधे-सीधे जिस पटवारी ने 45 करोड़ रूपया वापस कराने की जिम्मेदारी ली थी वह पटवारी सब कुछ अगला पिछला उगल देगा की खेल हुआ कैसे है। साथ ही वह तीन किसान जिनमे से एक का निधन हो चुका है बाकी बचे दो जोगेंद्र व सुमन इनमें करता धर्ता जोगिंदर ही है वो भी सब कुछ बता देगा क़ी खेल के खिलाड़ी कौन कौन है।

एस एसपी विजिलेंस
जो 15 करोड रुपए खाते में से निकले हैं वह पैसा कहां गया किसके खाते में गया और किसने यह खेल कराया क्योंकि यह डील भी तो पटवारी साहब ने ही कराई थी इस डील के मुख्य कर्ताधर्ता पटवारी साहब है लेकिन पटवारी साहब, जांच अधिकारी रहे रणवीर चौहान साहब की पैनी
निगाह तक नहीं पहुंच पाए है जिससे पटवारी साहब ने थोड़ी राहत की सांस ली थी लेकिन विजिलेंस टीम की जांच के बाद पटवारी साहब का ब्लड प्रेशर ऊपर नीचे हो रहा है कब विजिलेंस के हाथ उनके गिरेबान तक पहुंच जाएं और कब उनको इस पूरे प्रकरण की उल्टी करनी पड़ जाए।

