
हरिद्वार।
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में सात लोगों की परमानेंट नियुक्ति का मामला तूल पकड़ता जा रहा है ।यह प्रकरण पूर्व कुलपति रूप किशोर शास्त्री के समय से ही चल रहा है लेकिन रूप किशोर शास्त्री ने नियमों अनुसार नियुक्ति करने का प्रयास किया था व विज्ञापन भी निकलवाया था । लेकिन उनके कार्य में गुरुकुल के ही कुछ कारिंदों ने अड़ंगा डालकर यह नियुक्तियां नियमानुसार नहीं होने दी ।उसके बाद संविदा पर कार्य कर रहे कर्मचारी परमानेंट होने के लिए हाई कोर्ट तक गए लेकिन हाईकोर्ट
से भी इनको कोई राहत नहीं मिली तो अब इन्होंने कुलपति महोदया से मिलकर एक कमेटी का गठन कराया है यह कमेटी 12 तारीख को इन लोगों की नियुक्ति को परमानेंट करने की सिफारिश कर सकती है। क्योंकि संविदा कर्मचारियों का कहना है कि उनकी नियुक्ति को परमानेंट होने से कोई नहीं रोक पाएगा क्योंकि उनकी ऊपर तक सेटिंग है। हो सकता है उनकी ऊपर तक सेटिंग हो और उनकी परमानेंट नियुक्ति हो भी जाए ।लेकिन यदि उनकी परमानेंट नियुक्ति हो जाती है तो कुलपति महोदय जो कि खुद अभी परमानेंट नहीं है।और उनको ना ही यह नियुक्तियां करने का अधिकार है। साथ ही हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना करने के कारण कहीं ऐसा ना हो की कुलपति महोदया को हाई कोर्ट के ही चक्कर न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करने के आरोप में काटने पड़ जाए हमारी तो कुलपति महोदया से यही दरख्वास्त है की वे जो कार्य करें नियम अनुसार करें किसी के दबाव में आकर अगर कार्य करेंगी तो कोई उनको बाद में बचाने नहीं आएगा सब कुछ झेलना उनको अपने ऊपर ही पड़ेगा ।हालांकि कुलपति महोदया ने यह कह दिया है । की इस तरीके की ना तो कोई नियुक्ति हो रही है और ना होंगी,अब देखना यह है की 12 तारीख को जो बैठक बुलाई गई है इस बैठक में क्या एजेंडा है किस लिए बैठक बुलाई गई है और यदि यह बैठक केवल इन सात लोगों को ही परमानेंट करने के लिए बुलाई गई है तो बैठक में शामिल जो लोग हैं उनसे भी कहीं हाई कोर्ट सवाल जवाब करने शुरू न कर दे क्योंकि हाई कोर्ट ने इन सातों लोगों की परमानेंट नियुक्ति करने से इनकार कर दिया है।
कुलपति को करना होगा नियमानुसार कार्य

2021 में विश्वविद्यालय द्वारा निकाली गई वैकेंसी में सैकड़ो लोगों ने आवेदन किए थे और 800 रु आवेदन फीस दी थी, उन बेरोजगारों के भविष्य को अंधकार में डालने के लिए इन ही लोगों ने हाई कोर्ट का सहारा लिया था, अब जब कोर्ट ने इनकी रीट खारिज कर दी है।तो कुलपति मैडम फिर से वैकेंसी ओपन कर योग्य लोगो को मौका दे सकती है , उसमें ये 7 संविदा कर्मचारी भी अपनी किस्मत आजमा सकते है,12जून को होने जा रही 3 सदस्य बैठक का एजेंडा क्या है ।ये भी यूनिवर्सिटी के ज्यादातर अधिकारियों को पता ही नही है।इस बैठक में उत्तर प्रदेश से 2 सदस्यों को बुलाया गया है।इनके आने जाने का खर्चा भी यूनिवर्सिटी ही वहन करेंगी।बैठक में शामिल होने के लिए बाहर से आ रहे सदस्य भी , संविदा पर कार्य कर रहे एक कर्मचारी की पसंद है। मानो ये संविदा कर्मचारी , कर्मचारी न होकर यूनिवर्सिटी का सर्वोच्च अधिकारी हो। चर्चा तो ये भी है की इस संविदा कर्मी को अपने से मतलब है।बाकी 6 तो इसकी धोती पकड़ कर वैतरणी पार करेंगे।

