हरिद्वार के कुछ संतों व कुछ बुद्धि जीवियों की बात मानी जाए तो इन संतों में झगड़ा कराने का कार्य एक कलमकार महोदय कर रहे हैं
इन कलमकार महोदय का काम ही है की तेरी इससे और उसकी उससे करते हैं, और अपना उल्लू सीधा करते हैं इनका एक सूत्री कार्यक्रम है पैसा कमाओ किसी तरीके से भी कमाओ, आजकल यह महोदय मनसा देवी मंदिर के अध्यक्ष व अपने को अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष बताने वाले रवींद्र पुरी जी के खेमे का नेतृत्व कर रहे हैं।
हालांकि रवींद्र पुरी जी इन सब बहुत सारे झगड़ों में पड़ना नहीं चाहते हैं लेकिन कलमकार ऐसी ऐसी राय पेश करते हैं , जिस्से रविंद्र पुरी जी को ये बातें करनी पड़ती है।
अब बात सुपारी देकर हत्या कराने तक पहुंच गई मामला सुरेंद्र गिरी के मर्डर तक पहुंच गया है, कलमकार महोदय अब से पहले कनखल वाले रवींद्र पुरी जी के यहां माथा टेका करते थे और जो भी नेता या बड़ा अधिकारी हरिद्वार आता था बस उसको दक्ष मंदिर पर पूजा कराने ले जाया करते थे ,अब पूजा करने के लिए तो ना कोई नेता मना करता है ना कोई अधिकारी मना करता है, इसलिए अधिकारियों से भी संबंध और नेताजी से भी संबंध , अब दक्ष मंदिर पर तो जाना बंद हो गयाहै।
उससे पहले संतोषी माता मंदिर में वर्चस्व कायम कर रखा था ,वहां से भी इनकी विदाई की गई जहां-जहां से विदाई होती है वहां वहां की बुराई करना यह अपना परम सिद्ध अधिकार मानते हैं।

आजकल मनसा देवी मंदिर के ट्रस्टी और धन कुबेर रवींद्र पुरी जी के खेमे के नगीनो में इनकी गिनती होती है, एक पोस्ट की भी बात आ रही है कि कहीं से वह पोस्ट की गई की महाराज श्री का निधन हो गया है, ये सब हरकतें कौन कर रहा है कोई तो कर ही रहा होगा।
कलमकार बड़े ऊंचे खिलाड़ी हैं जब से उत्तराखंड बना है, नित्यानंद स्वामी से लेकर और पुष्कर सिंह धामी तक जितने भी मुख्यमंत्री बने हैं सभी के यहां पहुंच जाते हैं,और वही हरकत इसकी बुराई उससे और उसकी बुराई दूसरे से विजय बहुगुणा ने तो साहब को घांस नही डाली थी।
बाकी सब के यहां यह कहकर तुम्हारे बारे में वह यह कह रहा था और दूसरे के यहां जाकर कहेंगे वह तुम्हारे बारे में वो यह कह रहा था। यह नेता लोग जानते सब कुछ हैं लेकिन थोड़ा कान के कच्चे भी होते हैं ,बस वह इन बातों में आ जाते हैं, और कलमकार महोदय अपना उल्लू सीधा करने लग जाते हैं।
एक बाबा रामदेव के यहां का किस्सा है, बाबा रामदेव के शखा आचार्य बालकिशन से बाबा रामदेव के छोटे भाई राम भरत की बुराई और राम भरत अगर मिल गए तो राम भारत से आचार्य बालकृष्ण की बुराई, और काम बन गया दोनों में से कोई तो सुन लेगा मान लेंगे तो आचार्य जी से भी काम बन जाएगा और राम भरत जी से भी काम बन जाएगा, योग गुरु बाबा रामदेव से तो मिलना मुश्किल रहता है।
वह तो इन सब बातों पर ध्यान नहीं देते हैं , और रामदेव जी इन महोदय की हरकतों के बारे बहुत कुछ जानते हैं, जानते तो और भी बहुत लोग हैं जो इन कलमकार महोदय के बारे में जानते हैं ,कि ये क्या चीज है लेकिन अपनी हरकतों से ये उसके बाद भी बाज नहीं आते हैं।
शर्म नाम की चीज तो उनके पास कोई है ही नहीं ,आप इन्हें कितना भी जलील करते रहे या कुछ भी कहते रहें इनके ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ता है , इन साधु संतों के बीच आपस में इतनी लड़ाई नहीं है, जितनी यह महोदय इस लड़ाई को अग्नि में घी डालने का काम करते हैं, और ऐसा घी डालते हैं कि आज प्रज्वलित हो ही जाती है, हमारा तो इन साधु संतों से यही आग्रह है कि आपस में किसी प्रकार का मनमुटाव ना रखें आपस में मिल कर कार्य करें और सनातन धर्म का प्रचार प्रसार करें उसी में आप लोगों का मान सम्मान है अन्यथा शहर की जनता तो आप लोगों के बारे में सब कुछ जानती ही है।
कि आप किस प्रवृत्ति के संत हैं तो इन बातों को समाप्त करते हुए आम जनता में यह विश्वास पैदा कीजिए कि जो धारणा इन संतों के बारे में शहर की जनता ने बनाई हुई है, उन धारणाओं को गलत साबित किया जाए। हालांकि अब यह वह संत नहीं है जो भिक्षा मांग कर भोजन किया करते थे और भिक्षा नहीं मिली तो भूखे ही सो जाया करते थे ।
अब तो फाइव स्टार और 7 स्टार कलचर के संत हैं ,और यह संत चार्टर्ड विमान में सफर करते हैं और गाड़ियां भी जो होगी इनके पास वह कई कई करोड़ की गाड़ियां लिए घूमते हैं ।
पैसे की ईनके पास कोई कमी है नहीं क्योंकि अखाड़े के पास मंडलेश्वर और आचार्य महामंडलेश्वर बनाने का कारोबार विगत कई दशकों से चला रहा है, अखाड़ों के आचार्य महामंडलेश्वर भी इन लोगों की करतूतो को जानते हुए भी आंख मूंद लेते हैं, क्योंकि अगर यह आचार्य महामंडलेश्वर इनकी हरकतों के बारे में बोलेंगे तो समझ लीजिए कि इन आचार्य महामंडलेश्वर की तो पदवी गई दूसरा आचार्य महामंडलेश्वर बनने के लिए लाइन में कई लोग खड़े हैं बस खर्च करीब 8 से 10 करोड़ का आता है और आचार्य महामंडलेश्वर बन जाते हैं। आचार्य महामंडलेश्वरों को जो लोग जानते हैं वह तो 13 अखाड़ों के 13 आचार्य महामंडलेश्वर हैं ।
लेकिन इनमें चार पांच आचार्य महामंडलेश्वर को ही आम जनमानस जानता है, क्योंकि अन्य अखाड़े के आचार्य महामंडल बहुत ज्यादा लाव लश्कर और धन संपदा का प्रचार नही करते हैं भले ही साधु सनातन धर्म का प्रचार प्रसार करते हो या ना करते हैं इसलिए हम इन साधु संतों से यही अनुरोध करेंगे की आपस के मनमुटाव और कटुता को समाप्त करते हुए आपसी सौहार्दपूर्ण वातावरण में जीवन व्यतीत करें।
और सनातन धर्म के प्रचार प्रसार में ज्यादा वक्त लगाये तभी सनातन धर्म की रक्षा हो सकेगी और इन साधु संतों के बारे में लोगों की धारणा भी में भी सुधार आएगा, और यह जो महिला संतों को मंडलेश्वर बनाने की परंपरा शुरू हुई है ।
इसको भी थोड़ा देखभाल कर मंडलेश्वर बनाया जाए इनकी योग्यता को परखा जाए सनातन धर्म के लिए अब तक इन्होंने क्या किया है, उसके बारे में जानकारी ली जाए तभी जाकर चाहे महिलाएं हो या पुरुष हो उनके बारे में पूरी जानकारी की जाए कि उनका कहीं कोई आपराधिक इतिहास तो नहीं है यदि जिस किसी का भी आपराधिक इतिहास है तो कम से कम उनको तो महामंडलेश्वर की पदवी से अलंकृत ना करें। अन्यथा सभी जानते हैं , दर्जन भर को छोड़कर हमाम में सारे नंगे हैं।आचार्य महामंडलेश्वरो में जूना अखाड़े के अवधेशानंद जी को विद्वत्ता के बारे जाना जाता है।

