12 Feb 2026, Thu
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तीर्थ नगरी में न तो दारू बिकने से रुक सकती है, और ना सट्टा होने से रुक सकता है ।

हरिद्वार। पुलिस पकड़ती है न्यायालय से ढाई सौ रुपये व ₹500 जुर्माना देकर छूट के आ जाते है,और फिर वही काम चालू, तीर्थ नगरी हरिद्वार में जाने कितने अरसे से चप्पे चप्पे पर शराब बिक रही है, कच्ची पक्की देसी इंग्लिश जिस तरीके की शराब चाहिए उस तरह की शराब यहां उपलब्ध है ।अब तो शराब के कारोबार में महिलाएं और छोटी-छोटी कन्या तक उतर गई है ।हर गली मोहल्ले में शराब बिकती है आराम से सप्लाई होती है होम डिलीवरी भी है, कोई रोकने वाला नहीं है।

पुलिस व आबकारी विभाग पकड़ते भी है, तो ये शराब माफिया न्यायालय में जुर्म कबूल कर जुर्माना देकर आ जाते है, और धन्दा फिर चालू।

रोकता कौन है आबकारी विभाग या पुलिस ,आबकारी विभाग ने आज तक ग्रामीण क्षेत्र में कच्ची शराब जितनी भी पकड़ी है या पुलिस ने जितनी भी कच्ची शराब पकड़ी है उसमें शराब बेचने वाला या शराब बनाने वाला कोई नहीं पकड़ा गया ।केवल ड्रमों में लाहन जरूर मिलता है। और उसे वही पर खिंडा कर फोटो खिंचवाई जाती है और वह फोटो पत्रकारों को भेज दी जाती है ।

हर की पौड़ी पर उपलब्ध है, नशे का हर समान।

ठीक इसी तरीके से शहर के अंदर की तो बात छोड़िए हर की पैड़ी पर कच्ची पक्की देसी टिंचरी सब उपलब्ध है ।जितने भी हर की पैड़ी पर भिखारी रहते हैं, उनको किसी भी खाने की चीज में कोई इंटरेस्ट नहीं है। केवल और केवल पैसे चाहिए वह पैसे उनको केवल इसलिए चाहिए कि उनको सुल्फा पीना है । स्मेक लेनी है शराब लेनी है उनको टिंचरी लेनी है, पहले इस कार्य के लिए यह भिखारी विक्रम में बैठकर श्यामपुर व रायवाला जाया करते थे। लेकिन अब रायवाला और श्यामपुर जाने की कोई आवश्यकता नहीं है सब चीज यही उपलब्ध है, बस 5 से ₹10 फालतू देने पड़ते हैं एक पव्वे पर , धंधा करने वालों को कोई परेशानी नही होती पकड़े जाने के 2 घंटे बाद न्यायालय से छुटकर आ जाते हैं ।न्यायालय इन्हे महीना या दो महीने जेल में नही रखती है, यह जाते हैं ,वकील साहब वहां मौजूद रहते हैं, कोर्ट में पेश किया जाता है ,वहां यह अपना जुर्म स्वीकार कर लेते हैं, न्यायाधीश महोदय इनके ऊपर ढाई सौ 500, 1000 ₹2000 जुर्माना करते हैं और यह फिर छूट के आते ही अपने कारोबार में लग जाते हैं।

इस लिए अब पुलिस भी नही पकड़ती,क्योकी शराब का धन्दा करने वाले ज्यादातर सत्ताधारी दल के नेताओ के चेले है।

इसलिए अब पुलिस वाले भी इनको नहीं पकड़ते पुलिस वाले भी जानते हैं , यह सारा कारोबार नेताओं की छत्रछाया में चल रहा है, और यह नेता कोई और नहीं है सत्ताधारी दल के नेता हैं, सत्ताधारी दल के नेताओं की ही छत्रछाया में पूरे शहर के अंदर शराब का धंधा चलता है, इसीलिए पुलिस भी लाचार है। पुलिस चाहे तो इस धंधे को बिल्कुल बंद करा सकती है, इन शराब के कारोबारीयो पर गैंगस्टर एक्ट लगाकर ,लेकिन गैंगस्टर एक्ट लगाने से पहले पुलिस को नेताजी के बारे में भी सोचना पड़ता है।

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