हरिद्वार । हरिद्वार नगर निगम के पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी द्वारा किए गए 58 करोड रुपए के घोटाले की जांच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आदेश पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रणवीर चौहान द्वारा पूरी करने के बाद जांच रिपोर्ट नगर विकास सचिव को सौंप दी गई है अब यह रिपोर्ट उत्तराखंड के चीफ सेक्रेटरी आनंद वर्धन के पास जाएगी उसके बाद रिपोर्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंप दी जाएगी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस रिपोर्ट को देखकर निर्णय करेंगे की किसको क्या सजा देनी है। नगर निगम हरिद्वार के पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी के साथ ही एसडीएम अजय वीर सिंह वह हरिद्वार के जिलाधिकारी के साथ-साथ नगर निगम के अन्य कई कर्मचारी इस जांच के लपेटे में आ गए हैं। वरुण चौधरी के विरुद्ध कार्रवाई होना निश्चित है क्योंकि इस संपूर्ण घोटाले के मुख्य किरदार वरुण चौधरी ही है इस जांच में सबसे प्रमुख बात अब यह आएगी की नगर निगम के जो 58 करोड रुपए वरुण चौधरी एन्ड कंपनी ने डकारे है ।उस भारी भरकम धनराशि को क्या वरुण चौधरी से रिकवरी कराई जाएगी या वरुण चौधरी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराकर वरुण चौधरी को बर्खास्त करने के लिए केंद्र सरकार को राज्य सरकार लिखेगी ।वरुण चौधरी ने नगर निगम के एम एन ए रहते हुए 58 करोड रुपए का एक घोटाला तो किया ही है इसके अलावा भी और अन्य कई घोटाले वरुण चौधरी ने हरिद्वार नगर निगम में किये है । 58 करोड़ के घोटाले का मामला प्रकाश में हरिद्वार नगर निगम की मेयर किरण जैसल व भाजपा पार्षदों द्वारा सामने लाया गया।
पत्रकारों को धमकी …………
इन लोगों ने इस घोटाले की जांच की मांग मुख्यमंत्री से करने के साथ ही वरुण चौधरी के विरुद्ध कोर्ट जाने तक की बात कही थी इस प्रकरण को सबसे पहले लोकप्रिय अखबार चिंगारी ने ही उठाया था चिंगारी के इस प्रकरण को उठाने के बाद देहरादून के कई पोर्टलो ने भी इस प्रकरण को प्रमुखता से प्रकाशित किया। उसके बाद वरुण चौधरी ने, खाएंगे और गुर्राएँगे वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए हरिद्वार के दो पत्रकारों को खबर के खंडन छापने की धमकी देते हुए यहां तक कह दिया कि अगर खंडन नहीं छापा गया तो वह दो पत्रकारों के विरुद्ध F I R भी करेंगे जिसमें एक पत्रकार चिंगारी के नरेश गुप्ता व दूसरे पत्रकार रामेश्वर गोड है।इस प्रकरण को हरिद्वार के ही दो अन्य वरिष्ठ पत्रकारो कुणाल दरगह व जोगेंद्र मावी ने भी प्रमुखता से उठाया । इस मामले ने जब ज्यादा तूल पकड़ा और यह अखबारों की सुर्खियां भी बना तो मुख्यमंत्री ने तुरंत इसकी जांच के आदेश दे दिए। घोटाले की जांच के आदेश होते ही वरुण चौधरी एंड कंपनी की हवाइयां उड़ने लगी । वरुण चौधरी तो अपने सचिवालय दफ्तर से ही कई दिन लापता रहे पत्रकार उन्हें खोजते रहे लेकिन उन्होंने किसी का फोन नहीं उठाया ।


जांच अधिकारी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रणवीर चौहान को बनाया गया जिनके बारे में कहा जाता है कि वह बहुत ही मिलनसार लेकिन अपने कर्तव्य का निर्वहन करने के लिए अलग से पहचाने जाते हैं ।रणवीर चौहान ने सबसे पहले इस घोटाले की रकम को इधर-उधर ना किया जाए इसके लिए जिन लोगों से सराय स्थिति यह 33 बीघा जमीन खरीद कर उनको धनराशि नगर निगम के खाते से दी गई थी उन तीन लोगों के खाते सीज करने के आदेश दिए। हालांकि इन खातों में से कुछ धनराशि जो की करोड़ों में थी वह पहले ही निकाली जा चुकी थी ।लेकिन फिर भी करीब 37 करोड़ रूपया खातों में बचा हुआ शेष रह गया है। अब जांच हो जाने के बाद कुछ अधिवक्ताओं के अनुसार नगर निगम का जो 58 करोड़ रूपया वरुण चौधरी ने ठिकाने लगाया है वह रकम सरकार चाहे तो वरुण चौधरी से वसूल कर सकती है। जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री के पास पहुंचकर रिपोर्ट में जो कार्यवाही होनी है उसके बारे में ज्यादातर तो लोगों की समझ में आ ही गया है कि इस घोटाले के मुख्य पात्र वरुण चौधरी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी I A S वरुण चौधरी पर किस तरीके की कार्रवाई करते हैं।
इस पर राज्य के सभी अधिकारियों व जनता की निगाहें इस घोटाले की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है ।जांच रिपोर्ट शीघ्र ही मुख्यमंत्री के पास पहुंच जाएगी और तभी फैसला होगा की वरुण चौधरी के साथ-साथ और कौन-कौन इस जांच के लपेटे में आए हैं नगर निगम हरिद्वार के चार कर्मचारियों को पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है अब और कितने अधिकारी और कर्मचारी इस जांच के लपेटे में आएंगे यह जांच रिपोर्ट ओपन होने के बाद ही पता चल सकेगा।लेकिन इस प्रकरण की जांच कराने के आदेश देने से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का राजनैतिक ग्राफ तेजी से बढ़ा है।वरुण चौधरी के फंस जाने के बाद वरुण चौधरी के एक बड़बोले विधि सलाहकार काफी परेशान है।

